चाचा ने फाड़ी मेरी कुंवारी चूत! 02

Hindi Sex Story : चाचा ने पहली रात फाड़ी कुंवारी चूत, फिर 15 दिनों तक रात भर चोदा! किचन में बेंड करके, बल्कनी में बारिश साथ और शावर के नीचे गांड-चूत की चुदाई!!


अभी तक आपने "चाचा ने फाड़ी मेरी कुंवारी चूत!" में पढ़ा :-


“बहुत अच्छा... चाचा... और जोर से... आह्हह... फाड़ दो मेरी चूत... हां... यही... गहरी डालिए...” मेरी शर्म अब कामवासना में बदल चुकी थी।


वे तेज हो गए। मेरी टांगें अपने कंधों पर रख लीं और पूरी ताकत से चोदने लगे। हर थप्पड़ पर मेरी छातियां उछल रही थीं। “आआह्ह... चाचा... मर गई... आपका लंड मेरी चूत फाड़ रहा है... उफ्फ... और तेज...”


मैं दो बार और झड़ चुकी थी। चाचा अभी भी चोद रहे थे। आखिर में उन्होंने लंड बाहर निकाला और मेरे पेट, छातियों पर गाढ़ा-गाढ़ा वीर्य निकाला। “आह्ह... ले मेरी जान...”


अब आगे :-


हम दोनों हांफ रहे थे। चाचा ने मुझे गले लगाया। “कल रात फिर आऊंगा...”


उसके बाद अगले 15 दिनों तक हर रात चाचा मेरे कमरे में आते। धीरे-धीरे हमने और पोजीशन्स ट्राई किए – कभी डॉगी स्टाइल, कभी मैं ऊपर, कभी दीवार के सहारे खड़े-खड़े। चाची को कुछ पता नहीं चला।


उस पहली रात के बाद मेरा शरीर अभी भी दर्द कर रहा था, लेकिन मन में एक अनोखी तृप्ति थी। चाचा जब कमरे से गए तो मैं वहीं पड़ी रही। उनका वीर्य मेरे पेट पर सूख रहा था।


मैंने उंगली से उसे छुआ और सोचा – ये असली है। मेरी कुंवारी चूत अब चुद चुकी थी।


अगली रात का इंतजार बहुत मुश्किल लगा। दिन भर चाची के सामने नॉर्मल रहना, लेकिन चाचा से नजर मिलते ही मेरी चूत सिकुड़ने लगती।


शाम को खाना खाते वक्त चाचा ने टेबल के नीचे अपना पैर मेरी जांघ पर रख दिया। मैं चुपचाप बैठी रही, लेकिन अंदर से गर्म हो रही थी।


रात करीब 12:30 बजे दरवाजा हल्का सा खटखटाया। चाचा अंदर आए। इस बार वो पहले से ही सिर्फ शॉर्ट्स में थे। उनकी उभार साफ दिख रही थी।


“प्रिया... आज कैसी है मेरी छोटी सी चूत?” उन्होंने धीरे से पूछा और बिस्तर पर बैठ गए।


मैं शर्म से मुस्कुराई। “चाचा... थोड़ा दर्द है अभी भी... लेकिन...”


“लेकिन क्या?” उन्होंने मेरी कमर पकड़कर अपने पास खींच लिया।


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“लेकिन मुझे फिर चाहिए...” मैंने फुसफुसाकर कहा।


इस बार उन्होंने बहुत स्लो शुरू किया। पहले तो सिर्फ किसिंग। लंबे, गहरे किस। उनकी जीभ मेरे मुंह में घूम रही थी, मेरी जीभ को चूस रही थी। “उम्म्म... चाचा... आपकी जीभ...” मैं कराह रही थी।


धीरे-धीरे उन्होंने मेरी टी-शर्ट उतारी। मेरी ब्रा खोली और दोनों स्तनों को हाथों में भर लिया। “इतनी नरम, इतनी गोल... आज इनको अच्छे से चूसूंगा।” मुंह लगाया। एक निप्पल को चूसते हुए दूसरे को उंगलियों से मसलते।


“आह्ह... चाचा... काटिए ना हल्का सा... उफ्फ... हां यही...”


मेरी चूत पहले से गीली हो चुकी थी। चाचा ने मुझे लिटाया और मेरी लेगिंग्स खींचकर उतारी। मेरी चूत पर हल्के-हल्के चुंबन किए, फिर जीभ से क्लिट को चाटा। “स्लर्प... चूप... कितना रस निकल रहा है आज...”


“आआह्ह... चाचा... चूत चूसिए... अपनी जीभ अंदर डालिए... उफ्फफ... मैं पागल हो रही हूं...” मैं उनके बाल पकड़कर चूत उनके मुंह पर दबा रही थी।


उन्होंने मुझे 69 पोजीशन में लाया। पहली बार मैंने उनका लंड मुंह के पास देखा। इतना मोटा, नसें फूली हुईं। मैंने हिचकते हुए टोपा चूमा। “उम्म... चाचा... स्वाद अच्छा है...” फिर धीरे-धीरे मुंह में लिया।


चाचा मेरी चूत चूस रहे थे और मैं उनका लंड चूस रही थी। “ग्लक... ग्लक...” मेरे मुंह से आवाज आने लगी।


“हां प्रिया... चूसो मेरे लंड को... गहरा लो... आह्ह... तेरी जीभ कमाल है...”


कुछ देर 69 चलने के बाद उन्होंने मुझे घोड़ी बनाया। पीछे से मेरी गांड पकड़ी और लंड चूत के मुंह पर रगड़ा। “आज थोड़ा तेज करूंगा... तैयार हो?”


“हां चाचा... चोदिए मुझे...”


एक झटके में आधा लंड अंदर। “आआह्ह... फट गई... लेकिन मजा आ रहा है...”


फिर पूरा। धप-धप-धप... कमरे में चुदाई की आवाज गूंज रही थी। मेरी गांड उनके पेट से टकरा रही थी। “उफ्फ... चाचा... और जोर से... मेरी चूत फाड़ दो... हां... यही... गहरी... आह्हह...”


वे मेरे बाल पकड़कर घोड़ी स्टाइल में जोर-जोर से चोद रहे थे। बीच-बीच में थप्पड़ मार रहे थे मेरी गांड पर। “पट्... पट्...” “तेरी गांड भी बहुत sexy है प्रिया...”


मैं तीन बार झड़ चुकी थी। आखिर में उन्होंने मुझे फिर ऊपर लिटाया, मेरी टांगें कंधों पर रखीं और मिशनरी में तेजी से चोदने लगे। “आह्ह... प्रिया... तेरी चूत बहुत टाइट है... मेरे लंड को दबा रही है... ले... ले...”


“चाचा... निकालिए अंदर... आज पहली बार अंदर ही डालिए...” मैंने भीख मांगी।


“ले मेरी जान...” उन्होंने गहरी धक्के देते हुए अपनी सारी माल मेरी चूत के अंदर छोड़ दी। गर्म वीर्य की धार मेरी चूत में भर गई। “आआह्ह... भर गया...”


उसके बाद के 15 दिन स्वर्ग जैसे थे। हर रात नया प्रयोग। एक रात उन्होंने मुझे बाथरूम में चोदा – शावर के नीचे खड़े-खड़े। पानी हमारे शरीर पर बह रहा था, चाचा मेरी कमर पकड़े हुए पीछे से चोद रहे थे।


“आह्ह... चाचा... दीवार पकड़ लूं... उफ्फ... लंड बहुत गहरा जा रहा है...”


दूसरी रात मैंने उन्हें राइड किया। उनके ऊपर बैठकर खुद ऊपर-नीचे उछली। मेरी छातियां उनके मुंह के सामने उछल रही थीं। “चाचा... आपके लंड पर कूद रही हूं... आह्हह... कितना मोटा... मेरी चूत भर गई...”


धीरे-धीरे हमारा रिश्ता सिर्फ चुदाई नहीं रह गया। चाचा मुझे प्यार से भी छूते, बातें करते। लेकिन सेक्स हमेशा गर्म और dirty रहता।


आखिरी रात उन्होंने मुझे खड़े-खड़े दीवार से सटाकर चोदा। मेरी एक टांग उन्होंने उठा रखी थी। “प्रिया... कल तुम जा रही हो... आज पूरी रात चोदूंगा...”


“हां चाचा... जितना मन करे चोदिए... मेरी चूत आपकी है...”


उस रात हमने तीन बार सेक्स किया। सुबह होते-होते मेरी चूत सूज गई थी, लेकिन खुशी भी अनगिनत थी।


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“हां चाचा... जितना मन करे चोदिए... मेरी चूत आपकी है...”


मेरी ये बात सुनकर चाचा की आंखों में भूख और भी बढ़ गई। उन्होंने मुझे दीवार से सटाकर खड़ा रखा, मेरी एक टांग अपनी कमर पर चढ़ा ली और लंड का टोपा मेरी चूत पर रगड़ने लगे।


“तो आज तेरी चूत को पूरी तरह अपना बना लूंगा प्रिया...”


एक तेज धक्के के साथ आधा लंड अंदर घुस गया। “आआह्ह... चाचा... फट गई... लेकिन और डालिए...” मैं दीवार पकड़कर कराह उठी। चाचा ने मेरी कमर पकड़कर पूरा 7.5 इंच का मोटा लंड एक झटके में मेरी चूत में ठोक दिया। “धप्प्...”


“उफ्फफ... मर गई... आपका लंड मेरी चूत का आकार बदल रहा है... आह्हह...” मेरी चीख कमरे में गूंज गई।


चाचा ने रफ्तार पकड़ ली। खड़े-खड़े ही मेरी चूत को जोर-जोर से चोदने लगे। हर धक्के पर मेरी गांड दीवार से टकराती और “धप-धप-धप” की आवाज पूरे फ्लैट में फैल रही थी। मेरी छातियां उनके सीने से रगड़ खा रही थीं।


“ले मेरी रानी... ले मेरे लंड की पूरी ताकत... तेरी चूत आज रात भर मेरे लंड का खेलने का सामान बनेगी...” चाचा मेरे कान में फुसफुसाते हुए मेरी गर्दन चूसने लगे।


मैं उनकी पीठ पर नाखून गड़ा रही थी। “हां चाचा... और तेज... फाड़ दो अपनी प्रिया की चूत... आह्ह... उफ्फ... गहरी... बहुत गहरी... मैं आपकी दासी हूं आज...”


पहला राउंड सिर्फ 10 मिनट चला। चाचा ने मेरी चूत के अंदर ही अपना गाढ़ा वीर्य उछाल दिया। गर्म-गर्म माल मेरी चूत की दीवारों पर चिपकता महसूस हुआ। “आह्ह... भर गई... चाचा का माल अंदर...” मैं कांप उठी और झड़ गई।


हम दोनों हांफते हुए बिस्तर पर गिर पड़े। लेकिन चाचा का लंड अभी भी आधा खड़ा था। उन्होंने मुझे चूमते हुए कहा, “अभी तो रात शुरू हुई है बेटी...”


दूसरा राउंड शुरू हुआ करीब 20 मिनट बाद। इस बार चाचा ने मुझे बिस्तर पर घोड़ी बनाया। मेरी कमर को ऊंचा करके मेरी गांड थपथपाई। “पट्... पट्... कितनी नाजुक गांड है तेरी...”


फिर उन्होंने लंड मेरी चूत में घुसाया। अब दर्द कम था, सिर्फ भराव और मजा था। वे धीरे-धीरे शुरू करके तेज होते गए। कभी-कभी पूरी तरह बाहर निकालकर फिर एक झटके में अंदर ठोक देते। “धप्प्... आह्ह...”


“चाचा... गांड पर थप्पड़ मारते हुए चोदिए... मुझे dirty पसंद है...” मैंने शर्माते हुए कहा।


चाचा ने मेरी गांड पर कई जोरदार थप्पड़ मारे। लाल निशान पड़ गए। फिर मेरे बाल पकड़कर घोड़ी स्टाइल में तेजी से चोदने लगे। “ले... ले... तेरी चूत मेरी है... चूस ले मेरे लंड को अपनी चूत से...”


“आआह्ह... हां... चूस रही हूं... आपका लंड मेरी चूत की दीवारों को रगड़ रहा है... उफ्फ... मैं फिर झड़ने वाली हूं... चाचा... साथ में निकालिए...”


इस बार हम दोनों साथ झड़े। चाचा का वीर्य मेरी चूत से बाहर निकलकर मेरी जांघों पर बहने लगा। मैं थककर बिस्तर पर लेट गई, लेकिन चाचा अभी भी भूखे थे।


उन्होंने मुझे उठाकर अपनी गोद में बिठा लिया। “अब तू ऊपर बैठकर चुद...”


तीसरा राउंड सबसे लंबा और intense था। मैं चाचा के ऊपर सवार हुई। उनका मोटा लंड मेरी चूत में धीरे-धीरे घुसा। “उम्म्म... इतना मोटा... पूरा भर गया चाचा...” मैंने आंखें बंद करके धीरे-धीरे ऊपर-नीचे होने लगी।


चाचा मेरी छातियों को दबाते, निप्पल्स को चूसते और कभी-कभी नीचे से जोरदार धक्के देते। “हां प्रिया... कूद मेरे लंड पर... तेरी छातियां देखकर मन नहीं भरता...”


मैं तेजी से उछलने लगी। “आह्ह... आह्ह... चाचा... आपका लंड मेरी चूत फाड़ रहा है... लेकिन रुकना मत... हां... यही... क्लिट पर रगड़िए...”


कमरे में सिर्फ हमारी आहें, चुदाई की चिकचिक आवाज और चाचा के थप्पड़ों की आवाज गूंज रही थी। मैं दो बार ऊपर बैठकर ही झड़ गई। आखिरकार चाचा ने मुझे कसकर पकड़कर नीचे से तेज धक्के दिए और तीसरी बार अपना माल मेरी चूत के अंदर छोड़ दिया।


“आआह्ह... प्रिया... ले ले... सारा माल तेरी चूत में...”


हम दोनों पसीने से तर, एक-दूसरे से चिपके पड़े रहे। मेरी चूत सूज गई थी, लाल हो गई थी, लेकिन अंदर से संतोष भरा हुआ था। चाचा मेरे बालों में हाथ फेरते हुए बोले, “तुम बहुत हॉट हो प्रिया... मैंने सोचा भी नहीं था कि मेरी छोटी-सी भतीजी इतनी कामुक निकलेगी।”


“चाचा... ये 15 दिन मेरी जिंदगी के सबसे यादगार दिन बन गए। आपने मुझे औरत बना दिया...” मैंने उनके सीने पर सिर रखते हुए कहा।


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अगले 10 दिन...


इसके बाद हर रात नया-नया खेल। एक रात उन्होंने मुझे किचन में बेंड करके चोदा। मैं बर्तन धो रही थी, चाचा पीछे से आए, लेगिंग्स खींचकर नीचे की और लंड घुसा दिया। “आह्ह... चाचा... यहां... चाची जाग गई तो...” लेकिन मजा इतना था कि मैं चुप नहीं रह पाई।


“चुप रह... तेरी चूत तो मेरे लंड के बिना रह ही नहीं सकती...” वे तेजी से चोदते रहे। मैं सिंक पकड़े हुए कराह रही थी – “उफ्फ... चाचा... किचन में चुद रही हूं... कितना dirty... आह्ह... और तेज...”


दूसरी बार उन्होंने मुझे बल्कनी में चोदा। रात के अंधेरे में, बाहर हल्की बारिश हो रही थी। मैं रेलिंग पकड़े हुए खड़ी थी, चाचा पीछे से घोड़ी बनाकर चोद रहे थे। ठंडी हवा और गर्म लंड का कॉम्बिनेशन अनोखा था। “आह्ह... चाचा... कोई देख लेगा तो...”


“देख ले... तुझे चुदते देखकर जलेंगे सब...”


धीरे-धीरे हम emotional भी हो गए। चाचा मुझे प्यार से kiss करते, “तुम्हें कभी नहीं भूल पाऊंगा प्रिया।”


आखिरी रात उन्होंने बहुत स्लो और रोमांटिक सेक्स किया। लाइट्स ऑफ, सिर्फ मोमबत्ती जलाकर। हर हिस्से को चूमते हुए, चूसते हुए। मेरी चूत, गांड, छातियां – सब पर उनका मुंह फिरा। फिर मिशनरी पोजीशन में लंबा सेक्स।


“प्रिया... तेरी चूत अब हमेशा मेरी रहेगी... चाहे तू कहीं भी चली जा...”


“हां चाचा... जब भी मन करे बुलाइएगा... मैं आ जाऊंगी...”


उस रात हमने दो बार सेक्स किया। सुबह होते-होते मेरी चूत बुरी तरह सूज गई थी, चलने में भी दर्द हो रहा था। लेकिन चेहरा खिल रहा था।


जब मैं वापस घर आई तो मम्मी-पापा के झगड़े थम गए थे। एग्जाम्स भी अच्छे हुए। लेकिन अंदर ही अंदर मैं बदल चुकी थी। अब हर रात अकेले में चाचा को याद करके फिंगरिंग करती।


कभी-कभी चाचा का मैसेज आता – “कैसी है मेरी चूत?” और मैं गीली हो जाती।


ये 15 दिन सिर्फ सेक्स नहीं थे – ये मेरी कामुकता की जागृति थे। आज भी, 2 साल बाद, जब मैं अकेली होती हूं तो उन हॉट यादों को सहेजकर खुद को संतुष्ट करती हूं।



दोस्तों, ये थी मेरी पहली Chacha Ke Sath Hui Chudai Ki Sachhi Sex Story! अगर आपको मजा आया हो, गर्मी हुई हो, तो कमेंट में जरूर बताएं। अपनी उंगलियां या लंड पर फेरते हुए पढ़ा हो तो Comment में फीडबैक देना मत भूलना। 🔥

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