देवर-लवर ने मिलकर भाभी की गांड फाड़ी!
सुबह देवर ने भाभी की गीली चूत और टाइट गांड फाड़ दी। अब रोज सुबह लंड पर ही नाश्ता होता है! रात को पुराना लवर रवि और देवर दोनों हरामी मिलकर भाभी की चूत और गांड एक साथ फाड़ने वाले हैं। रांड भाभी अब पूरी तरह बेशर्म हो चुकी है!
इस कहानी का पहला भाग : "रांड भाभी ने 2 अलग लंड से चूत-गांड फड़वाई!"
अगली सुबह जब मेरी आँख खुली तो सूरज की किरणें कमरे में फैली हुई थीं। मेरा पूरा बदन अभी भी कल रात की चुदाई से थका हुआ था, लेकिन चूत के अंदर एक मीठी खुजली और संतोष का अहसास हो रहा था।
मैंने करवट ली तो देखा – विश्वास मेरे बगल में लेटा हुआ था। उसकी मजबूत बाँह मेरी कमर पर पड़ी हुई थी और उसकी उँगलियाँ मेरी मोटी गांड को हल्के से दबा रही थीं।
मैं मुस्कुराई। कल रात जो कुछ हुआ था, वो सपना नहीं था। रवि ने मेरी चूत ठुकवाई, फिर विश्वास ने मुझे पकड़ लिया और दोनों मर्दों ने मिलकर मेरी जलती हुई चूत और गांड की आग बुझाई।
तीन घंटे में दो लंडों से बेशर्म चुदाई… मेरी चुदक्कड़ भाभी वाली छवि अब घर के अंदर भी साफ हो चुकी थी।
विश्वास की आँखें खुलीं। उसने मुझे देखा और एक शरारती मुस्कान फैलाई। “सुबह-सुबह भाभी की चूत कितनी गीली लग रही है… कल रात रवि का माल अभी भी अंदर है क्या?” उसने मेरी जांघ पर हाथ फेरते हुए कहा।
मैंने शर्माने की बजाय उसकी छाती पर हाथ रखा और धीरे से उसकी गर्दन चूम ली। “हाँ देवर जी… तुम्हारा लंड तो रवि के माल को और अंदर धकेल गया था। अब तो मेरी चूत तुम दोनों का सामान लेकर सोई है।”
विश्वास हँसा और मुझे अपनी तरफ खींच लिया। उसका सुबह का खड़ा लंड मेरी नंगी जांघ से टकराया। मैंने तुरंत हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ लिया। अभी भी गर्म और मोटा था।
“देवर जी, अब रोज़ सुबह मेरा नाश्ता तुम्हारे लंड पर बैठकर होगा, जैसा तुमने कहा था ना?” मैंने उसकी आँखों में देखते हुए कहा।
विश्वास ने मेरी मोटी गांड को जोर से थपथपाया। “बिल्कुल भाभी… लेकिन पहले तो ये लंड तेरी चूत में डालकर अच्छे से नहला लूँ। उठो, डॉगी स्टाइल में हो जाओ।” ये Ger Mard Se Chudai Ki Kahani आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।
मैं तुरंत चारों पैरों के बल हो गई। मेरी 38 इंच की मोटी और गोल गांड ऊपर उठ गई। विश्वास ने पीछे से मेरी कमर पकड़ी और अपना तना हुआ लंड मेरी अभी भी गीली चूत पर रगड़ने लगा।
रवि का सूखा हुआ माल और मेरा रस मिलकर चूत को और चिकना बना रहा था। एक जोरदार धक्के के साथ उसका पूरा लंड मेरी चूत में घुस गया।
“आह्ह्ह… देवर जी… जितना मोटा है… आह्ह… कल रात से और भी तगड़ा हो गया है तुम्हारा लंड…” मैं सिसकते हुए बोली।
विश्वास ने मेरी मोटी गांड को दोनों हाथों से पकड़कर तेज-तेज धक्के मारने शुरू कर दिए। हर धक्के में मेरी छातियाँ झूल रही थीं और चूड़ियाँ खनक रही थीं। कमरे में फिर वही पच-पच… पच-पच की आवाज़ गूँजने लगी।
“साली रांड… कल रात रवि के लंड पर उछल रही थी, आज मेरे लंड पर उछल… बोल, कौन बेहतर चोदता है?” विश्वास ने मेरी कमर को कसकर पकड़ते हुए पूछा।
“दोनों अच्छे हैं… आह्ह… लेकिन तुम घर में हो… रोज़… आह्ह… रोज़ चोद सकते हो… रवि तो कभी-कभी…” मैं हाँफते हुए बोली।
विश्वास ने मेरी लंबी काली चोटी पकड़कर मुझे पीछे खींचा और और तेज धक्के मारने लगा। उसका लंड मेरी चूत की सबसे गहरी जगह को छू रहा था।
बस कुछ ही मिनटों में मैं पहली बार झड़ गई। मेरी चूत ने उसके लंड को कसकर पकड़ लिया और रस निकालने लगी।
लेकिन विश्वास रुका नहीं। उसने मुझे पलटकर मिशनरी स्टाइल में चोदा, फिर मुझे अपनी गोद में उठाकर खड़े-खड़े चोदा। आखिरकार वो भी मेरी चूत के अंदर गरम-गरम माल छोड़कर झड़ गया।
सुबह का नाश्ता सचमुच उसके लंड पर बैठकर हुआ। मैंने उसे मुँह में लिया, चूसा, और फिर अपनी चूत में डालकर धीरे-धीरे उछली। जब वो दूसरी बार झड़ा तब मैं पूरी तरह संतुष्ट हो गई।
इसके बाद हम दोनों नहाए। लेकिन नहाते समय भी विश्वास ने मुझे शावर के नीचे खड़ा करके फिर से चोदा। मेरी गोरी चमड़ी पर पानी की धारें बह रही थीं और उसका लंड मेरी गांड की दरार में घुस-घुसकर निकल रहा था।
दोपहर होते-होते घर में एक नया नियम बन गया था। ये Devar Bhabhi ki Chudai Wali Kahani आप Garam Kahani पर पढ़ रहे है।
जब भी विश्वास घर पर होता, मैं उसे “देवर जी” कहकर बुलाती और वो मुझे “चुदक्कड़ भाभी” या “रांड भाभी” कहकर।
मैंने घर के सारे काम ऐसे कपड़ों में करने शुरू कर दिए जो मेरी बॉडी को ज्यादा से ज्यादा दिखाएँ। कभी हल्का सा शॉर्ट गाउन, कभी साड़ी जिसमें ब्लाउज बहुत टाइट हो और पेटीकोट नीचे से काफी ऊपर।
शाम को जब विश्वास ऑफिस से लौटा तो मैंने उसे चाय देते समय जानबूझकर झुककर अपनी भरी हुई छातियाँ दिखाईं। उसकी नजरें वहीं अटक गईं।
“भाभी, आज रात को मैं कुछ नया ट्राई करना चाहता हूँ…” उसने चाय का कप रखते हुए कहा।
मैंने मुस्कुराते हुए पूछा, “क्या नया देवर जी?”
“तुम्हारी वो मोटी गांड… आज उसमें अपना लंड डालना चाहता हूँ। कल रात तो सिर्फ चूत ठुकी, आज गांड भी फाड़नी है।”
मेरी चूत फिर से सिहर उठी। रवि के समय मैंने कभी गांड नहीं मरवाई थी, लेकिन विश्वास की बात सुनकर मेरी गांड में भी खुजली होने लगी।
रात के नौ बजे थे। विश्वास ने मुझे अपने कमरे में बुलाया। उसने पहले से ही लाइट डिम कर रखी थी और बिस्तर पर कुछ ऑयल की बोतल रखी हुई थी।
मैंने साड़ी उतारकर सिर्फ ब्लाउज और पेटीकोट में उसके सामने खड़ी हो गई।
विश्वास ने मुझे बिस्तर पर लिटाया और मेरी टांगें ऊपर करके मेरी गांड की दरार को चाटने लगा। उसकी जीभ मेरी गांड के छेद पर घूम रही थी। मैं कराह उठी – “आह्ह… देवर जी… वहाँ… उफ्फ… अच्छा लग रहा है…”
उसने ऑयल लेकर अपनी उँगलियाँ मेरी गांड में डालनी शुरू कर दीं। एक, फिर दो उँगलियाँ… धीरे-धीरे वो मेरी गांड को तैयार कर रहा था। मैं दर्द और मजा दोनों महसूस कर रही थी।
जब वो तैयार हो गया तो उसने मुझे चारों पैरों के बल कर दिया। मेरी मोटी गांड पूरी तरह उसके सामने थी। विश्वास ने अपना लंड ऑयल से चिकना किया और मेरी गांड के छेद पर रख दिया।
“आराम से देवर जी… पहली बार है…” मैं घबराते हुए बोली।
“चिंता मत कर भाभी… धीरे-धीरे फाड़ूँगा तेरी गांड…” कहते हुए उसने धीमा दबाव डाला।
मेरा गांड का छेद धीरे-धीरे फैलने लगा। दर्द के साथ एक अजीब सा सुख भी हो रहा था। आधा लंड अंदर घुसा तो मैं चीख पड़ी – “आह्ह्ह… माँ… फट जाएगी… धीरे…”
विश्वास ने मेरी कमर पकड़कर एक और जोरदार धक्का मारा। पूरा लंड मेरी गांड में समा गया। मैं दांत भींचकर सिसक रही थी। लेकिन कुछ देर बाद दर्द कम होने लगा और मजा बढ़ने लगा।
विश्वास ने रफ्तार बढ़ाई। अब वो मेरी मोटी गांड को जोर-जोर से थपथपा रहा था और अपना लंड पूरी तरह बाहर निकालकर फिर से अंदर पटक रहा था।
“साली… तेरी गांड तो चूत से भी टाइट है… आह्ह… कितनी गर्म है…” वो हाँफते हुए बोला।
मैं भी अब पूरी तरह मस्ती में आ चुकी थी। “चोदो देवर जी… फाड़ दो मेरी गांड… आह्ह… रवि ने कभी ये मजा नहीं दिया… तुम ही मेरे असली मालिक हो… आह्ह… तेज… तेज…”
लगभग 40 मिनट तक वो मेरी गांड फाड़ता रहा। आखिर में उसने मेरी गांड के अंदर ही अपना गरम माल छोड़ दिया। जब वो बाहर निकला तो मेरी गांड से सफेद माल रिस रहा था।
उस रात हम तीन बार चुदाई किए – एक चूत में, एक गांड में, और तीसरी बार फिर चूत में। ये Antarvasana Bhabhi Sex Story आप Garam Kahani पर पढ़ रहे हो।
अब घर में हमारा रिश्ता पूरी तरह बदल चुका था। दिन में मैं उसकी चुदक्कड़ भाभी बन जाती और रात में उसकी रांड। कभी-कभी वो मुझे किचन में, कभी बालकनी में, कभी बाथरूम में चोद लेता।
एक हफ्ते बाद एक शाम रवि का फोन आया।
“भाभी… आज रात फिर आऊँ क्या? बहुत याद आ रही है तेरी चूत की…”
मैंने विश्वास की तरफ देखा। वो मुस्कुरा रहा था। उसने फोन मेरे कान से लगाकर खुद ही जवाब दिया – “आ जा रवि… लेकिन इस बार अकेले नहीं… मेरे साथ चोदना पड़ेगा। भाभी अब हम दोनों की प्रॉपर्टी है।”
रवि हैरान रह गया, लेकिन फिर हँस पड़ा। “ठीक है भाई… दो लंडों से चुदेगी तो और मजा आएगा।”
मैंने फोन रखा और विश्वास की तरफ देखकर कहा, “देवर जी… कल रात फिर तीन घंटे की बेशर्म चुदाई होने वाली है… तैयार रहना।”
विश्वास ने मेरी गांड पर जोर से थप्पड़ मारा और बोला, “हाँ रांड भाभी… लेकिन इस बार हम दोनों मिलकर तेरी चूत और गांड एक साथ फाड़ेंगे।”
मैंने मुस्कुराते हुए अपनी चूत पर हाथ फेरा। मेरी चूत फिर से जलने लगी थी। अब एक नहीं, दो मर्द मेरी जवानी का मजा लेने वाले थे। और मैं… मैं पूरी तरह तैयार थी अपनी बेशर्म चुदास को और बढ़ाने के लिए।
तो दोस्तों कैसे लगी यह Devar Bhabhi की Lover साथ Threesome Gand चुदाई की कहानी? कॉमेंट में जरूर बताए!
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