दूध पिलाती भाभी के मुहँ मे दिया लंड!

Antarvasna Hindi Sex Kahani : रात में अकेली चचेरी भाभी की फाड़ी चड्डी! चॉकलेट-शहद से चटवाई चूत, घोड़ी बनकर पेलवाई अपनी चुत! सुबह तक देवर ने चूत में भरा वीर्य!


यह कहानी तब की है जब मैं 18 साल का या मतलब आज से 10वर्ष पहले की, मेरे बड़े पापा के लडके यानि मेरे चचेरे भाई की पत्नि या मेरी चचेटी भाभी के साथ रंगीन रातों की, 


मैं जब बारह का तब उनकी शादी हुई थी और मैं शादी के दिन ही समझ गया था कि ये भाभी थोड़ी-सी अश्लील किस्म की है मतलब छोटे कपडे पहनना, शर्म लिहाज न होना।


मैं गांव का हूँ इसिलिए मैं उसी समाज का हिस्सा जहां स्त्रीयों पर, मुख्य रूप से नयी नवेली बहु‌ओं को काफी कायदे में रखा जाता है तब इस प्रकार से उनको खुले कपड़ो मे देखना थोड़ा सा अजीव या अश्लील लगता था पर कभी-कभी उत्तेजना भी पैदा करता था,


17-18 साल का ही था ज्यादा कुछ समझ में भी नहीं आता था पर मैं देखता था उनको, जब वो नीचे झुक कर झाडू लगाती थी तो उनकी सीने की दरार मुझे पूरी तरह से दिखाई दे जाती थी,


खुले ब्लाउज पहनने के कारण उनकी पीठ पूरी तरह से दिखाई दे जाना उनकी छाती से बूब्स के ऊपर का कुछ हिस्सा और पतली कमर काफी उत्तेजक लगती थी धीरे-धीरे मैं उनको सोचकर मुठ मारने लगा कुछ समय ऐसे ही बीता उनका लड़का बहुत ही जल्द हो गया सिर्फ (शादी के)9 महीने बाद।


बच्चा होने से उनके दूध और भी काफी बड़े-बड़े दिखने लगे, मेरा लिंग उनको देखकर खड़ा हो जाता था,


वो कभी-कभी अपने बच्चे को मेरे सामने ही दूध पिलाने लग जाती थी जिससे उनकी छाती को मैंने पूरी तरह से देख लिया था लाल - लाल कड़क निप्पल काफी दूध और प्यार भरा हुआ था उनमें ।


वो धीरे-धीरे काफी बेशर्म होते जा रही थी मेरे साथ। 


मतलब उनको मेरे होने से कोई प्रॉप्लम नहीं होती थी जब भी वो अपने बच्चे को दूध पिलाएँ, मेरे सामने काफी खोलकर पिलाती थी शायद वो मुझे छोटा बच्चा ही समझती थी जो कि सेक्स के प्रति नादान हो पर मैं नादान नहीं था। 


मैं किसी मौके की तलाश में ही था कि कब उनको पकड़ पाऊं, हालाँकि वो मुझे काफी हिंट देती थी पर मैं डर के कारण या मर्यादा के कारण पीछे हट जाता था। 


वो मुझे कई बार अकेले में बुलाती थी कभी कोई भी डिस बनाकर खिलाने के लिए तो कभी उनके लड़के को खिलाने के लिए. 


इस बीच काफी हँसी-मजाक भी होने लगा हमारे बीच, हम साथ में कैरम भी खेला करते थे और मैं ऐसे बिल्कुल उनको ताड़ता ही रहता था,


वो भी काफी कुछ हरकते करती रहती थी मुझे उत्तेजित करने के लिए, कभी-कभी तो कैरम खेलते-खेलते ऐसी मादक आवाजे निकलने लगती है जैसे कोई उनको चोद रहा हो।


आह...आह..उह...ऊह.....आदि-आदि, काफी रोमांचक लगता था ये सब ।


फिर कुछ ऐसा हुआ कि मुझे कुछ रातों के लिए उनके घर पर उनके साथ अकेले रहने का मौका मिल गया, दरअसल मेरे चचेरे भाई के मामा के लड़के की शादी थी,


सभी लोगों को वहाँ जाना था और भाभी को घर पर अकेले ही रहना था और मुझे उनके साथ उनके घर पर ही रहने को कहा गया, मैंने सोचा यहीं मौका है मेरे पास उनको चोदने का।


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और वो रात आयी ।


उस रात मैंने उन्ही के घर पर खाना खाया, और मेरे मन में बात यहीं चल रहा था कि कुछ भी हो जाए बस आज रात उनके साथ रंगीन हो जाये, पर वो मौका भी मेरे पास खुद ही चलकर आ रहा था


जब हम रात को सोये तो वो उसी हॉल में आकर सो गयी जहाँ मैं सो रहा था हमारे बीच बस उनका चिराग सो रहा था।


तो माहौल ये था कि लाइट बंद कर ली गई यी और वो केवल ब्लाउज और चड्डी में मेरे बाजू मे जो गयी (मतलब बीच मे उनका छोटा-सा बच्चा भी था।


लेकिन मुझे क्या था कि मैं नई जगह सो रहा था तो कई बार नींद नहीं लगती है मेरी और उस रात तो वैसे भी नहीं लगनी थी।


जब मेरी नींद खुली और मैने भाभी को देखा तो मैं देख कर दंग ही रह गया क्योंकि वो केवल चड्डी और ब्लाउज पहने हुए थी मैं अंधेरे में उनके नंगे पैरो को देख पा रहा था।


मेरा लण्ड फुल स्पीड से खड़ा हो गया, मैं पेण्ट पहनने ही सो रहा था मैंने भी अपनी पेण्ट उतार दी, और चड्डी से मेरा लण्ड फाड़ मचा रहा था


मैं बहुत उत्तेजित हो गया था ऐसा लग रहा था बस अब दबोच लूँ, पर इट भी रहा था मैंने उनके लड़‌के को निसाना बनाया और जोर से उसे चोट लिया, वो रोने लगा, उसका रोना सुनकर मैने लाइट चालू कर दी भाभी भी जाग चुकी थी या शायद वो भी सोने का नाटक ही कर रही थी।


वो एकदम से लाइट चालू होने से वो भी चौकसी गयी असल में नाटक कर रही थी चौकने का; लाइट चालू होने के बाद मै उनको देखता ही रह गया उनके ब्लाउज के बटन भी काफी बुरी तरह से खुले हुए थे सिर्फ एक बटन लगा हुआ था।


लेकिन उनका लडका रोने लगा था तो वो उसे चुप कराने में लग गई और उसके दूध पिलाने के लिए वो बटन भी खोल दिया और मैं सब देख रहा था मेरी नज़र इस बार उनके पैरो पर थी और उस चड्डी वाले भाग पर जो उनकी जांघो के पास। 


क्यूँकि ऊपर का नजार तो मैं फिर भी देख चुका था उन्होंने चिराग को चुप कराते हुए मेरी तरफ देखा और खास तौर पर मेरी चड्डी से मेरे फन-फनाते हुए मेरे को लण्ड। 


मेरे लण्ड को इस प्रकार से देखकर उनके चेहरे पर तुरंत मुस्कान आ गयीं और मुस्कुराते हुए तुरंत ही मेरे लण्ड को पकड़ लिया और उसके टोपे को बाहर निकालते हुए सहलाते हुए कहा -


"ठरकी लड़के इधर आओ, आज मैं तुम्हारी आग को बुझ ही दूं , बहुत दिनों से देख रही हूँ तुझे, मुझे चोदने की कि ताक में रहता है। मैने भी तुझे कितनी बार हिंट दी कि आओ दबोच लों मुझे, डरपोक कही का।


मैंने भी कहा "तुमने "भी मुझे सीधे-सीधे नहीं कहा कभी, मुझे भी समझ में नहीं आता था कि मैं क्या करु, कही आप गुस्सा न करने लग था मेरे घरवालों से न कह दें कुछ।


और वो मेरे लण्ड को धीरे-धीरे सहलाती जा रहीं थी, मुझे अन्दर से कितनी खुशी हो रही थीं मैं बता भी नहीं सकता, मैंने एक लम्बी साँस ले कर रिलेक्स फील किया कि चलो बात बन गयी अब मैं भाभी को चोदूंगा।


भाभी भी मेरे लण्ड को पकड़ कर बहुत खुशी महसूस कर रहीं थी और फिर उन्होने लण्ड को अपने मुँह में ले लिया, उसे चूसने लगी, मुंह को अन्दर बाहर कर रही थी और मेरा पूरा लण्ड गीला कर दिया.


मुझे बहुत मजा आ रहा था ये सब होते देख और मुवमेंट पर जो मैं फील कर रहा था, it's amazing......


मुँह में लेते -लेते उन्होने मेरी, चड्डी पूरी तरह से उतरवा दी और मेरे लण्ड को व अपने दूधों के बीच की दरार के बीच रख कर अपने दोनो दूधो से मेरे लण्ड के साथ खेल रही थी और फिर उसे मुंह लेने लगती या उसे जोर-जोर ले चूमने लगती,


मुझे बहुत मजा आ रहा था, मै एक बार झड़ चुका था


भाभी पूरा वीर्य अपने मुँह में लेकर ही उसे पी गई; मैंने भी पता नहीं कब उनके सिर पर हाथ रख लण्ड को उनके मुंह में घुसा दिया गया वो घोच-घोप की आवाजे करने लगी।


जैसे उन्हें उल्टी आने वाली हो पर मे जोर-जोर से लण्ड को उनके मुंह मे अन्दर बाहर करने करने लगा, 


इतना जोर से कि उनके आंसु निकल आये फिर में थोड़ा-सा घबराकर रुक जाता हूँ पर वो फिर भी मेरे लण्ड को बर्फ के गोले जैसा चूसती रही, वो नहीं रुकी।


मेरा लण्ड शायद उतना बड़ा नहीं था जितना कि आज है (वो की उन्हीं के कारण हुआ) पर फिर भी वो बहुत मज़े कर रही थी।


वो मेरे लण्ड जबतक चूसती रही जब तक उन्होंने मेरा एक बार का सारा माल न पी लिया, और बोली कि "मुझे ये रस पीना बड़ा अच्छा लगता है इससे मुझे काफी एनर्जी मिलती है।"


इसके बाद उन्होंने मेरे हाथो को पकड़ कर अपने बूब्स पर रख दिये, बहुत सॉफ़्ट लग रहे थे मै उनको सहलाने लगा उनके निप्पल को मरोड़‌ने लगा, दूध निकल रहा था, मैं उनको बारी-बारी से पीने लगा, बहुत मीठा दूध था काफी दूध निकल रहा था। 


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फिर वो पलट कर खड़ी हो गयी मेरे शरीर से झुकते -झुकते, मेरा लण्ड उनके पेट से रगड़ खा रहा था पलटने के बाद उनकी पीठ मेरी छाती से टच हो रही थी और मेरा लण्ड उनकी गाण्ड पर रगड़ खाने लगा।


मैंने पीछे ले उनके दोनों मम्मे पकड़ लिये उनको सहलाने लगाये, धीरे-धीरे मेरे हाथ उनके पूरे शरीर पर फेरने लगा। कभी उनके गले पर तो कभी पीठ पर, कंधो पर तो कभी पेट पर कमर पर और धीरे-धीरे नीचे आते जा रहे थे।


उनकी चड्‌डी के ऊपर और उसके बाद उसकी चड्डी के अन्दर, मुझे पता ही नहीं था कि ये सब मैं कैसे कर रहा हूँ या क्यूँ कर रहा हूँ बात करते जा रहा था बस मजे आ रहे थे मुझे बहुत अच्छा लग रहा था ऐसा कुछ करने में।


मेरे हाथों की उंगलियाँ उनकी चूत में चली गयी, चुत का हिस्सा बहुत गर्म लग रहा था और काफी गीला-सा लगा रहा था मैं पूरी जोर से उंगलियों को चूत में डाल देता। 


भाभी सहर उठती और आह आह आह ऊह के आवाजे निकलती ही रहती और मेरा लण्ड उनके गाण्ड की दरार में फंसता जा रहा था वो बार-बार उपर नीचे होकर अपनी गाण्ड से रगड़ रही थी।


मेरे दोनो हाथ नीचे आये और एकाएक मैने उनकी चड्डी को फाड़ दिया, वो बुरी तरह से फट गयी थी 1


उसको पूरा फाड़ के फेंक दिया और उनका ब्लाउज की मैंने पहले ही उतार दिया मैने तुरंत अपनी टी-शर्ट उतार दी, हम दोनों पूरी तरह से नंगे हो चुके थे


भाभी ने मंगलसूत्र, चूड़ी बगैरह आज पहले ही उतार दिये थे वो पूरा मूड बनाये हुए थी आज रात मेरे साथ मस्ती करने का। 


मैंने देर न करते हुए उनको बेड पर लेटा दिया और उनकी चूत पर मेरा लण्ड रख दिया, वो लण्ड का चूत को स्पर्श करना लाबजबाव था मेरे लिए


पर वो कहने लगी कि मेरी चूत को चाटो उस पर अपनी जीभ चलाओ और उसे गीला कर दो, मुझे यह सुनकर थोड़ा अजीव-सा लगा,


मैंने ये कहा 'ये सब भी करना होता है" तो उन्होंने कहा "हाँ! मेरे राजा, यहीं तो मज़ा है" मैंने क्योड़े अनगढ़ ढंग से उनकी चूत पर जीभ रखी मुझे स्वाद थोड़ा अजीव सा लगा या मैंने नहीं सुना था इसीलिए मुझे अजीव लग रहा था। 


तो मैने भाभी से बोल दिया "भाभी ! मुझे इसका स्वाद अजीव-सा लग रहा है, मैं नहीं करूंगा।" भाभी बोली एक मिनट"


वो ऊपर गयी और किचन से कुछ चोकलेट और शहद उठा कर ले आयी और चूत पर लगा दिया और चोकलेट तो अन्दर ही घुसा दिया, फिर मैं उनकी चूत को चाटने में जुट गया|


जीभ चूत के अन्दर डाल-डाल कर पूरी चोकलेट और शहद को चाट लिया और भाभी चूत चटवाने का आनंद ले रही थी


आह, आहे, कह, ऊँछ, कह, और जोर से, और जोर से" जैसे अवाजे निकालते ही जा रही थी।


और बोली "आज पहली बार मेरी चुत चाटी किसी ने, बहुत मज़ा आ रहा है, आज से तू ही मेरा सबकुछ है, आज से ये शरीर मैं तेरे नाम करती हूँ, तू ही इस शरीर का मालिक है।


मेरे दोनों हाथ उनके मम्मों से होते-होते उनके शरीर के हर हिस्से पर जा रहे थे, मैंने कई बार अपनी उंगलियो को उनके मुंह में डालता और उनके मम्मों को दूध से गीला कर दिया।


ऐसा करते-करते भाभी भी झड़ गयी, मेरा पूरा चेहरा गीला हो गया। भाभी ने उठते ही मुझे गले लगा लिया और बोली " I love you मेरे लाल, I love you so much, आज तूने मेरी जवानी को पूरा कर दिया..


मेरी सिर्फ एक यहीं ख्वाहिश थी कि कोई मेरी चूत को चाटे और इतना चाटे कि बस, यह कहकर भाभी रुक जाती है और फिर कहती है कि "आनन्द आ गया मुझे"


मुझे पागलो की तरह kiss करने लगती है मेरे लण्ड को सहलाया और एक बार फिरसे चूसने लगती है इस बार और भी ज्यादा प्यार से चूस रही थी,


उन्होंने मुझे बेड पर लेटा दिया और मेरे लण्ड के ऊपर अपनी चूत को रख दिया और छपाक से बैठ गयी, उस पर ऊपर-नीचे होकर अपनी पूरी मदहोशी में उछल रही थी,


कभी अपने बालो संभालती तो कभी मेरी छाती पर हाथ रखती और मुझे लिए kiss करने लगती, उनकी खुःशी सातवें आसमान पर थी और कहने लगी -


"आज तक कोई भी मेरे साथ आधे घण्टे से ज्यादा नहीं चला पर तुम तो पुरे डेढ घण्टे से मेरे साथ खेल रहे हो क्या बात है ..... It is so nice! wow "


वो पूरी तरह पसीने से नहां जाती है और कहती है थक गयीं यार अब झड़ेगा, मैने कहा कि "मैं इतनी जल्दी हार मानने वाला नहीं हूँ मैं" 


बोलती है "सच्ची"


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"तो तुम फिर मुझे रोज चोदना" 


"जी बिलकुल" मैंने कहा 


उछलते उछलते वो बहुत बुरी तरह थक चुकी थीं 


और थक कर मेरे बाजू में आकर लेट जाती है लेकिन मै अभी रुकने वाला नहीं था, मैने उनका एक पैर उठाया और पीछे से उनकी चूत में घुसा दिया, धीरे-धीरे उनकी मस्ती दर्द भरी मस्ती बनती जा रही थी उनके दर्द में कराहने की आवाजे बड़ती जा रही थी।


आह, आह पर वो मेरा साथ भी देती जा रही थी और बोलते भी जा रही थी


"ये शरीर तेरे नाम है आज से, चोदले मुझे जी भर के, मै न नहीं कहूंगी ।" और न जाने क्या मैं अपनी पूरी रफ्तार के साथ उनको चोदता जा रहा था, 


कभी उनके ऊपर चढ़ कर तो कभी घोड़ी बनाकर तो कभी कुतिया बनाकर, मैं उनको चोदता रहा जबतक मेरा मन नहीं भर गया।


इसके बाद मैंने उन्हें दीवाल ले सटाकर अपने हाथों में उनको उठा लिया और जोर-जोर से शॉट मारने लगा, उनकी जाँघो से मेरी जाँघे बार-बार टकरा रही यी काफी तेज आवाज थी पर कूलर की अवाज से ये आवाज बाहर कोई भी नहीं समझ पाता, 4-5 मिनट बाद मैं झड़ गया।


मैंने अपना सारा वीर्य उनकी योनि मे डाल दिया, उन्होंने कुछ नहीं कहा इस पर, बल्कि मुझे फिरसे मेरे गालो kiss करने लगती है जिस वजह से उनका पूरा भार मेरे ऊपर आ गया जैजे-तैसे करके मैं बेड पर आपा और गिर गया। 


वो मेरे ऊपर ही मुझ से चिपक कर सो गयी और मैं भी उसी हालत में सो गया।


2-3 घण्टे बाद ही मेरी फिर से नींद खुल गई मेरा लण्ड फिर से खड़ा हो गया, और भाभी अभी भी मेरे ऊपर लिपटी हुई सो रही थी मैंने अपने लण्ड को फिर से उनकी चूत में डाल दिया और उनकी गाण्ड को उठा-उठा धक्के मारने लगा। 


कुछ देर बाद नींद टूट जाती है और लण्ड को चूत के अन्दर हलचल मचाते देख वो मुझे फिर से kiss करने लगती, और उछल-उछल कर फिर से मजा लेने लगती थोड़ी देर बाद हम time देखने लगते है 7 बज गये थे इसीलिए हमने बीच में छोड़ने का फैसला किया। 


और बोली "आज रात भी हम घर पर अकेले ही सोयेंगे", इसके बाद मैं अपने घर आ गया और जाकर सो गया जब घर वालों ने पूछा तो बता दिया कि मुझे नींद नहीं आ रही थी बहाँ पर, हम बहुत देर तक मस्ती करते रहे।


दूसरी रात "I will write on the second part of this Stories"


Always for you, Author - Proudmen

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