एक महीने तक छोटे भाई की बीवी चोदी! 02

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मैंने धीरे-धीरे उसके स्तनों को मसलना शुरू किया। ऊपर से ही। वो मेरी गोद में बैठी सांसें ले रही थी। उसके निप्पल सख्त हो गए थे।


"भैया... धीरे... उफ्फ..."


उसकी आवाज में वासना घुल गई थी। मैंने उसके होंठों पर किस किया। पहले हल्का, फिर गहरा। वो भी जवाब दे रही थी। उसकी जीभ मेरी जीभ से खेल रही थी। हम दोनों के मुंह से सिसकारियाँ निकल रही थीं।


"म्म्म... रोहन भैया..." वो बुदबुदाई।


मैंने उसकी नाइट सूट के अंदर हाथ डाला। सीधे उसके नंगे स्तनों पर। गर्म, मुलायम, भारी। मैंने उन्हें जोर से दबाया।


"आआह... हाँ... दबाओ ना..." वो पहली बार खुलकर बोली।


अब आगे :-


मैंने उसके निप्पल को उंगलियों में पकड़कर घुमाया। वो मेरी गोद में तड़पने लगी। उसकी गांड मेरे खड़े लंड पर रगड़ रही थी।


लेकिन मैंने उस दिन भी पूरा नहीं किया। बस उसे छेड़ा, उकसाया।


"आज बस इतना ही।" मैंने कहा।


वो निराश होकर बोली, "भैया... मुझे और चाहिए..."


"धीरज रखो प्रिया। पूरा महीना हमारा है।"


उसके बाद के दिन और गर्म हो गए।


वो अब मेरे सामने खुलकर कपड़े बदलती। कभी ब्रा पहनते वक्त मुझे दिखाती। कभी साड़ी का ब्लाउज खोलकर मुझे अपनी पीठ दिखाती।


एक दिन वो किचन में खाना बना रही थी। मैं पीछे से आया और उसे जकड़ लिया। मेरे हाथ सीधे उसके स्तनों पर।


"आह रोहन... कोई देख लेगा..." वो बोली, लेकिन खुद मेरे हाथों पर हाथ रखकर दबवाने लगी।


"कोई नहीं है घर में।" मैंने उसके गले पर किस करते हुए कहा। ये Desi Sex से भरपूर  Antarvasana Family Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


मैंने उसकी साड़ी ऊपर उठाई। उसकी जांघें चिकनी और गर्म थीं। मैंने अंदर हाथ डाला। उसकी पैंटी पहले से गीली थी।


"उफ्फ... तुम तो बहुत गीली हो गई हो..." मैंने उसके कान में कहा।


"आपके वजह से... रोज... आह..." वो कराह रही थी।


मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से उसकी चूत को सहलाया। वो मेरे हाथों पर झुक गई।


"हाँ... वहाँ... दबाओ... उम्म्म..."


उसकी आवाज गंदी और हॉट हो रही थी। लेकिन मैंने उसे चरम पर नहीं पहुँचने दिया। बस छेड़कर छोड़ दिया।


अब वो बेचैन रहने लगी थी। हर वक्त मेरे पास आने को तरसती।


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उस दिन शाम को आर्यन ने बताया कि उसे दो दिन के लिए बाहर जाना है। प्रिया की आँखों में चमक आ गई। वो मुझे देखकर मुस्कुराई।


रात को आर्यन के जाने के बाद पूरा घर सिर्फ हम दोनों का था।


मैं डिनर के बाद अपने कमरे में था। प्रिया नहाकर आई। उसके बाल गीले थे। वो सिर्फ एक हल्की सी ट्रांसपेरेंट नाइट गाउन पहने थी। अंदर कुछ नहीं। उसके निप्पल साफ दिख रहे थे।


"रोहन..." उसने पहली बार मेरा नाम लिया।


मैं उठा और उसे दीवार से लगा दिया। इस बार कोई रुकावट नहीं थी। मैंने उसके होंठों को चूसना शुरू किया। जोर से। उसकी जीभ को चूसते हुए।


"म्म्म... आह..." वो कराह रही थी।


मेरे हाथ उसकी गांड पर थे। मैंने जोर से दबाया। उसकी नरम, मोटी गांड मेरी उंगलियों में दब गई।


"आआह... जोर से... हाँ..."


मैंने उसे बिस्तर पर पटक दिया। गाउन ऊपर चढ़ा दिया। उसकी चूत पूरी तरह गीली और चमक रही थी। बिना बाल की, गुलाबी।


मैंने घुटनों के बल बैठकर उसकी जांघों को चूमना शुरू किया। धीरे-धीरे ऊपर की तरफ।


"रोहन... प्लीज... मत छेड़ो... खा लो ना..." वो बेचैनी से बोली।


मैंने उसकी चूत पर जीभ फेरी।


"आआआह... हाँ... वहाँ... चूसो ना भैया..." वो चीख पड़ी।


मैंने उसकी चूत को पूरी तरह चाटना शुरू किया। उसका रस मीठा और गाढ़ा था। मैंने क्लिटोरिस को चूस लिया।


"उफ्फ्फ... मार डालोगे... आह... हाँ... तेज... चूसो मेरी चूत को..."


प्रिया मेरे बालों को पकड़कर अपने चूत पर दबा रही थी। उसकी कमर ऊपर-नीचे हो रही थी।


"मैं... आ रही हूँ... आह... रोहन... निकल रहा है..."


वो पहली बार झड़ गई। पूरा रस मेरे मुंह में। मैंने सब चाट लिया।


वो हाँफ रही थी। लेकिन मैं रुका नहीं। मैंने अपना लंड बाहर निकाला। 7 इंच का, मोटा और खड़ा।


प्रिया ने उसे देखा तो आँखें फैल गईं। "इतना बड़ा... आर्यन का तो आधा भी नहीं..."


मैंने उसे मुंह में लेने को कहा। वो घुटनों के बल बैठ गई। पहले हल्का चूमा, फिर पूरा मुंह में ले लिया।


"ग्लक... ग्लक... म्म्म... कितना मोटा है..." वो चूसते हुए बोली।


मैंने उसके बाल पकड़कर मुंह में धकेलना शुरू किया। वो गला भरकर चूस रही थी।


"हाँ... चूस मेरी भाभी... अच्छे से चूस..."


कुछ देर बाद मैंने उसे बिस्तर पर लिटाया। उसके पैर फैलाए। लंड की टिप उसकी चूत पर रखी।


"डालो ना... प्लीज... भर दो मेरी चूत..." वो तरस रही थी। ये Pregnent  Fantasy से भरपूर Dewar Bhabhi Ki Chudai Ki Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।


मैंने एक झटके में पूरा लंड अंदर डाल दिया।


"आआआह... फट गई... उफ्फ... इतना मोटा... आह..."


मैंने धीरे-धीरे स्टार्ट किया। फिर स्पीड बढ़ाई। उसके स्तन हिल रहे थे। मैंने एक को मुंह में ले लिया और चूसते हुए जोर-जोर से चोदने लगा।


"हाँ... चोदो मुझे... जोर से... तेरी भाभी की चूत फाड़ दो... आह... आह... हाँ... और तेज..."


कमरा उसके मूँह की आवाजों से भर गया था। "थप-थप-थप" की आवाज के साथ उसकी चूत का रस बाहर निकल रहा था।


मैंने पोजीशन बदली। उसे चौथे पैर पर किया और पीछे से घुसा। उसकी मोटी गांड मेरे पेट से टकरा रही थी।


"आह... गांड पर मारो... हाँ... चोदो अपनी रंडी भाभी को..."


मैंने उसकी कमर पकड़कर जोर-जोर से ठोका। उसके मूँह से सिर्फ कराहें निकल रही थीं।


"मैं... फिर से... आ रही हूँ... आआआह..."


वो दूसरी बार झड़ गई। लेकिन मैंने रुकना नहीं था। मैंने उसे लगातार 15 मिनट तक चोदा।


आखिर में मैंने बोला, "मैं निकालने वाला हूँ..."


"अंदर डाल दो... भर दो मेरी चूत... आह..."


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मैंने पूरा लंड अंदर रखकर झड़ दिया। गर्म वीर्य उसकी चूत में भर गया।


हम दोनों थककर बिस्तर पर गिर पड़े। वो मेरे सीने पर सिर रखकर लेटी।


"रोहन... इतना मजा आज तक नहीं आया..." वो फुसफुसाई।


ये सिर्फ शुरुआत थी।


अगले दिन


सुबह वो नंगी ही उठी। चाय बनाकर नंगी ही मेरे पास आई।


"आज पूरा दिन चोदना मुझे..." उसने कहा।


मैंने उसे टेबल पर लिटाया और फिर से चोदना शुरू किया। इस बार और गंदा।


"ले मेरी रंडी... तेरी चूत आज मैं रोज भरूँगा..."


"हाँ... भर दो... मैं तुम्हारी प्राइवेट रंडी हूँ... आह... चोदो..."


हम पूरे दिन अलग-अलग जगहों पर चुदाई करते रहे — बाथरूम में, किचन में, बालकनी में। उसकी हर सिसकारी घर में गूंज रही थी।


"आह... रोहन... तुम्हारा लंड जादू है... फाड़ दो... हाँ... और जोर से..."


 


उस महीने के बाकी दिन पूरी तरह जंगली और बेशर्म हो गए। प्रिया अब पूरी तरह मेरी हो चुकी थी। वो दिन-रात मेरी चुदाई के लिए तरसती रहती।


तीसरा दिन


सुबह-सुबह वो मेरे मुंह पर बैठ गई। उसकी गीली चूत मेरे चेहरे पर रगड़ रही थी।


"चाटो ना मेरी चूत... अपनी भाभी की रस भरी चूत चाटो... आह... हाँ... जीभ अंदर डालो... उफ्फ्फ..."


मैंने उसकी चूत को जोर से चाटा। उसका रस मेरे मुंह में बह रहा था। वो मेरे सिर को दबाए हुए थी।


"हाँ... खाओ मुझे... मैं तुम्हारी चूत की रानी हूँ... आआह... चूसो क्लिट... मार डालोगे... हाँ... तेज... तेज..."


वो पहली बार झड़ गई और मेरे पूरे चेहरे पर अपना रस गिरा दिया।


फिर मैंने उसे उठाकर दीवार से लगा दिया। उसके पैर कमर पर चढ़ाए और खड़े-खड़े पूरा लंड घुसा दिया।


"आआआह... फट गई मेरी चूत... इतना मोटा लंड... हाँ... चोदो... फाड़ दो अपनी भाभी की चूत को... जोर से... थप-थप-थप..."


मैंने तेज-तेज ठोके मारे। उसकी गांड दीवार से टकरा रही थी। उसके स्तन मेरे मुंह में थे। मैंने निप्पल को काटा।


"आह... काटो... चूसो... मुझे दर्द दो... मैं तुम्हारी गंदी रंडी हूँ... चोदो मुझे... भर दो वीर्य से..."


हमने पूरा दिन बिस्तर पर गुजारा। हर पोजीशन में। डॉगी स्टाइल, राइडिंग, 69।


जब वो ऊपर बैठकर चुद रही थी तो उसकी गांड मेरे लंड पर ऊपर-नीचे हो रही थी।


"देखो... तुम्हारा लंड मेरी चूत में कैसे गायब हो रहा है... आह... हाँ... गहरे... बहुत गहरे... फाड़ दो... मैं झड़ रही हूँ... आआआह... निकल गया..."


उसकी चूत मेरे लंड को निचोड़ रही थी। मैंने उसकी गांड पर जोरदार थप्पड़ मारा।


"ले रंडी... तेरी गांड भी मारनी है आज..."


पांचवां दिन


मैंने उसे बाथरूम में घसीटा। शावर जल रहा था। गीले शरीर पर मैंने उसे झुका दिया और पीछे से घुस गया।


"आह... पानी के साथ चोद रहे हो... हाँ... जोर से... मेरी गांड फाड़ दो... उफ्फ... तुम्हारा लंड मेरी गांड में... आआह... गंदा कर दो मुझे..."


मैंने उसकी गांड में उंगली डालकर चोदा। वो पागल हो रही थी।


"दो उंगलियाँ... तीन... फाड़ दो... मैं तुम्हारी गांड मारने वाली रंडी हूँ... आह... हाँ... और तेज... मारो मुझे..."


उस दिन मैंने पहली बार उसकी गांड में लंड डाला। धीरे-धीरे पूरा घुसा।


"आआआह... फट रही है... दर्द हो रहा है... लेकिन मत निकालो... चोदो... चोदो मेरी गांड को... हाँ... पूरा... आह... आह... हाँ..."


धीरे-धीरे वो मजा लेने लगी। फिर पागलों की तरह चुदवाने लगी।


"जोर से... गांड चोदो... मेरी गांड तुम्हारी है... भर दो वीर्य से... आआह..."


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दसवां दिन


अब वो पूरी तरह फैंटसी मोड में आ चुकी थी।


वो स्कूल टीचर वाली ड्रेस पहनकर आई। "आज मैं तुम्हारी स्टूडेंट हूँ भैया... मुझे सजा दो..."


मैंने उसे टेबल पर लिटाया, स्कर्ट ऊपर की और बिना किसी पूर्व तैयारी के जोर से चोदना शुरू किया।


"आह... टीचर की चूत फाड़ दी... हाँ... सजा दो मुझे... मैं बहुत गंदी लड़की हूँ... चोदो... मारो... आआह... हाँ... तुम्हारा लंड बहुत बड़ा है सर... फाड़ दो..."


मैंने उसके बाल खींचे, थप्पड़ मारे और लगातार चोदा।


"ले रंडी टीचर... तेरी चूत आज मैं खराब कर दूँगा... रोज चोदूँगा..."


पंद्रहवां दिन


हमने घर में पूरे नंगे घूमना शुरू कर दिया। वो किचन में खाना बना रही थी तो मैं पीछे से घुस जाता।


"आह... फिर से... मैं खाना बना रही हूँ... हाँ... चोदते रहो... मेरी चूत तुम्हारे लंड के लिए हमेशा खुली रहेगी... उफ्फ... हाँ... गहरा... आह... आह... झड़ रही हूँ... फिर से..."


उस महीने हमने लगभग रोज 4-5 बार चुदाई की। कभी-कभी रात को 2-3 घंटे तक लगातार।


एक रात तो वो बोली, "आज मुझे बांध दो... और जितना मन करे चोदो..."


मैंने उसके हाथ बांध दिए। फिर उसे हर तरीके से चोदा। मुंह में, चूत में, गांड में।


"आआह... हाँ... बांधकर चोदो... मैं तुम्हारी सेक्स स्लेव हूँ... भर दो सारी होल्स... आह... आह... निकल रहा है... हाँ... और डालो..."


उसके मूँह से सिर्फ गंदी-गंदी आवाजें निकल रही थीं — "चोदो... फाड़ो... रंडी... गांड... चूत... वीर्य... हाँ... आह... आआह..."


महीना खत्म होने तक प्रिया पूरी तरह बदल चुकी थी। वो अब खुलकर कहती, "आर्यन के आने के बाद भी जब चाहो चोद लेना... मैं तुम्हारी हूँ।"


आखिरी दिन


हम दोनों थक चुके थे, लेकिन फिर भी एक आखिरी राउंड।


वो मेरे ऊपर बैठी, धीरे-धीरे राइड कर रही थी।


"रोहन... ये महीना स्वर्ग था... तुम्हारा लंड मेरी चूत का मालिक है... आह... हमेशा चोदना मुझे... हाँ... हाँ... मैं झड़ रही हूँ... आआआह..."


मैंने भी आखिरी बार उसके अंदर भर दिया।


"ये वीर्य हमेशा तेरी चूत में रहेगा मेरी जान..."


तो दोस्तों कैसी लगी यह चुदाई कहानी कॉमेंट करके जरूर बताएं!!


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