भाई के 9 इंच लंड ने मेरी कुंवारी चूत और गांड फाड़ दी!
Family Sex Story : भाई की छाती सहलाई, जींस खोली तो 9 इंच मोटा निकला लंड! अपनी कुंवारी चूत और गांड में भाई का मोटा लंड घुसवाकर अपनी सील तोड़वाई! पिया भईया का वीर्य!
दोस्तों, नमस्ते। ये कहानी मैं बहुत छुप-छुप कर लिख रही हूँ। कृपया कोई मुझे मेल मत करना, ना ही किसी को शेयर करना।
मेरा नाम जनवी है। उम्र 22 साल, कद 5 फुट 4 इंच। रंग गोरा, चेहरा इतना मासूम कि देखने वाला एक नज़र में दीवाना हो जाए। लेकिन अंदर से मैं पूरी औरत हूँ।
मेरी चूचियाँ 34 साइज़ की हैं, गोल-गोल, भरी हुई, निप्पल्स हल्के गुलाबी। कमर 24 इंच की पतली, और गांड़ 36 इंच की मोटी-मोटी, जो चलते वक्त लहराती है।
कॉलेज की फाइनल ईयर की स्टूडेंट हूँ। घर एक अच्छे मध्यमवर्गीय परिवार का है – मम्मी-पापा, और मेरा बड़ा भाई विनय।
विनय 25 साल का है। हट्टा-कट्टा, चौड़ी छाती, मोटी-मोटी बाहें, और चेहरे पर वो मर्दाना आकर्षण जो किसी भी लड़की को पागल कर दे। वो प्राइवेट कंपनी में अच्छी जॉब करता है। लेकिन लड़कियों के सामने थोड़ा शर्मीला है।
हम दोनों भाई-बहन बचपन से ही बहुत क्लोज़ रहे हैं। एक बेडरूम शेयर करते थे, साथ खेलते, साथ पढ़ते। लेकिन पिछले दो-तीन सालों से मेरे मन में उसके लिए एक गुप्त आग जल रही थी। वो आग बहन वाली नहीं, बल्कि एक भूखी औरत वाली थी।
रात को अकेले लेटे-लेटे मैं कल्पना करती कि विनय भैया का लंड मेरी चूत में घुस रहा है। मेरी कुंवारी चूत तब गीली हो जाती और मैं उँगली डाल-डाल कर मुठ मारती। ये Antarvasna वाली Bhai Behan Ki Hindi Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हो।
मेरी बेस्ट फ्रेंड है करीना। वो भी 22 साल की, लेकिन उसका फिगर मुझसे भी ज़्यादा खतरनाक – 36-28-36। लंबे काले बाल, काजल वाली बड़ी-बड़ी आँखें, गुलाबी होंठ और वो नज़र जो किसी भी मर्द को ललचा दे।
करीना थोड़ी फ्री-स्पिरिटेड है। बॉयफ्रेंड बदलती रहती है, लेकिन अभी सिंगल है। हम दोनों कॉलेज से साथ हैं। एक-दूसरे के राज़ की रखवाली करते हैं।
एक दिन कॉलेज की कैंटीन में चाय पीते हुए करीना ने अपनी परेशानी बताई। “जनवी यार, मुझे एक सच्चा बॉयफ्रेंड चाहिए। वो जो सीरियस भी हो और बेड पर वाइल्ड भी। मुझे तो बस एक ऐसा मर्द चाहिए जो मुझे पूरी तरह संभाल ले।” वो हँसते हुए बोली।
मेरे दिमाग में तुरंत विनय भैया का चेहरा घूम गया। मुझे पता था कि विनय को करीना बहुत पसंद है। जब भी करीना घर आती, उसकी नज़रें करीना की उभरी हुई चूचियों और नितंबों पर अटक जातीं।
लेकिन विनय शर्मीला है, कभी आगे नहीं बढ़ता। मैंने मन ही मन फैसला कर लिया – मैं करीना को विनय की गर्लफ्रेंड बनवा दूँगी। लेकिन मेरी असली मंशा कुछ और थी। मैं खुद विनय भैया को छूना चाहती थी।
उनके मर्दाना जिस्म की गर्मी महसूस करना चाहती थी। मेरी वर्जिन चूत सालों से उनकी तलाश में तड़प रही थी।
उस रात नींद नहीं आ रही थी। मन में बेचैनी थी। घड़ी में बारह बज चुके थे। पूरे घर में सन्नाटा था। मैं धीरे-धीरे उठी, सिर्फ़ एक हल्की नाइट सूट पहने हुए। पैरों में चप्पल भी नहीं डाली। चुपके से विनय भैया के कमरे में चली गई। दरवाज़ा आधा खुला था।
अंदर हल्की नीली नाइट लैंप जल रही थी। विनय भैया गहरी नींद में थे। उनकी छाती ऊपर-नीचे हो रही थी। वो सिर्फ़ एक स्लिम फिट ट्रैक पैंट पहने थे। ऊपर का बदन नंगा था।
मैं उनके बिस्तर के पास घुटनों के बल बैठ गई। उनकी मर्दानी खुशबू – पसीने, देह की और पुरुषत्व की मिली-जुली महक – मेरे नथुनों में घुस गई। मेरा दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। ये Desi Sex वाली Vargin Sister Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हो।
डरते-डरते मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उनकी चौड़ी छाती पर रख दिया। घने-घने बाल थे, नरम लेकिन मर्दानी। मेरी हथेली काँप रही थी। मैंने धीरे-धीरे उनकी छाती सहलाई। फिर नीचे पेट की तरफ़ गई।
उनकी ट्रैक पैंट के अंदर कुछ उभरा हुआ था।
मैंने हिम्मत करके उनकी ट्रैक पैंट का नाड़ा खोला। अंदर सिर्फ़ एक काला बॉक्सर था। वो पहले ही टेंट बना चुका था। मेरे मुँह में पानी आ गया। मैंने बॉक्सर को धीरे से नीचे सरकाया।
और फिर… ओह गॉड! विनय भैया का लंड आधा खड़ा हो चुका था। कम से कम 9 इंच लंबा, मोटा, नसों वाला, गुलाबी सुपाड़ा। मेरी चूत तुरंत गीली हो गई।
मैंने पहले करीना को फोन पर बताया था कि मैं विनय को उसके लिए सेटअप कर रही हूँ। लेकिन असल में मैं खुद को सेटअप कर रही थी।
अगले दिन मैंने करीना को कॉल किया। “यार, आज शाम को घर पर डिनर का प्लान है। तू आ जाना। विनय भैया को भी रोक लूँगी।”
करीना खुश हो गई, “वाह! परफेक्ट। मैं आती हूँ।”
शाम को मैंने घर को थोड़ा सजाया। मम्मी-पापा को भी बताया कि करीना आ रही है। विनय भैया ऑफिस से लौटे तो मैंने उन्हें पकड़ लिया। “भैया, आज करीना आ रही है। तुम घर पर ही रहना।”
विनय थोड़ा शरमाया, लेकिन हाँ कह दिया।
सात बजे करीना आई। नीली टाइट टॉप और स्किनी जींस में। उसकी चूचियाँ टॉप से फटने को तैयार थीं। गांड़ जींस में कैद होकर भी लहरा रही थी। विनय ने दरवाज़ा खोला और उनकी आँखें करीना पर अटक गईं। मैंने दोनों का परिचय कराया।
डिनर के दौरान मैंने जानबूझकर बातों का रुख रोमांस की तरफ़ मोड़ दिया। करीना ने खुलकर बताया कि उसे स्ट्रॉन्ग, मर्दाना लड़का चाहिए। विनय चुपचाप सुन रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान थी।
मैंने कहा, “भैया, करीना को डेट कर लो ना। तुम दोनों परफेक्ट मैच हो।”
करीना हँस पड़ी। विनय ने शरमाते हुए सिर हिला दिया। बस, उसी पल से उनकी दोस्ती ने नया रंग लिया।
उस रात करीना चली गई। विनय भी अपने कमरे में चला गया। लेकिन मेरी चूत फिर से जलने लगी थी। मैं बिस्तर पर लेटी, आँखें बंद किए कल्पना कर रही थी कि विनय भैया का वो मोटा लंड मेरी चूत में घुस रहा है।
मेरी उँगलियाँ अपने आप मेरी पैंटी के अंदर चली गईं। मैंने दो बार झड़ चुकी थी, फिर भी तृप्ति नहीं हुई।
मैं जानती थी कि अब मुझे अगला कदम उठाना है।
अगले कुछ दिनों में विनय और करीना का अफेयर धीरे-धीरे शुरू हो गया। करीना रोज़ कॉलेज के बाद विनय से मिलने लगी। कभी कैफे, कभी मूवी, कभी पार्क में लंबी वॉक।
मैं जानबूझकर बीच में नहीं पड़ती थी, लेकिन दोनों की हर बात मुझे बताई जाती थी।
करीना फोन पर खुशी से बताती, “जनवी, तेरे भाई बहुत स्वीट हैं। मुझे गले लगाते वक्त उनकी छाती की गर्मी… उफ्फ! लेकिन अभी तक सिर्फ़ किसिंग और हगिंग ही हो पाया है। वो कहते हैं पहले कमिटमेंट, फिर आगे बढ़ेंगे।”
मैं मुस्कुराकर कहती, “अरे यार, धीरे-धीरे सब होगा। विनय भैया थोड़े पुराने ख्यालों वाले हैं।”
लेकिन अंदर ही अंदर मेरी जलन और प्यास दोनों बढ़ रही थी। हर रात मैं कल्पना करती कि विनय भैया करीना को किस कर रहे हैं, उसके स्तनों को दबा रहे हैं, उसकी चूत को छू रहे हैं।
मेरी चूत इन ख्यालों से इतनी गीली हो जाती कि पैंटी पूरी तर हो जाती। मैं बिस्तर पर लेटकर अपनी दो उँगलियाँ चूत में डालती, विनय भैया का नाम ले-लेकर चीखती हुई झड़ जाती, लेकिन संतोष नहीं होता।
मुझे असली चीज चाहिए थी – उनका मोटा, गर्म लंड।
एक शाम करीना मेरे घर आई। हम दोनों मेरे कमरे में बैठे थे। विनय ऑफिस से अभी लौटा था और अपना कमरा बदल रहा था। करीना ने धीरे से कहा, “जनवी, मुझे विनय बहुत पसंद है। लेकिन वो बहुत स्लो है। मैं तो अब चुदाई के लिए तरस रही हूँ।”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “चिंता मत कर। अगले वीकेंड मम्मी-पापा अपने रिश्तेदारों के यहाँ जा रहे हैं। दो दिन घर खाली रहेगा। मैं तुम दोनों के लिए परफेक्ट रोमांटिक नाइट सेटअप कर दूँगी।”
करीना की आँखें चमक उठीं। “सच? तू सच में मेरी बेस्ट फ्रेंड है यार!” उसने मुझे जोर से गले लगा लिया। उसके नरम, बड़े स्तन मेरी छाती से सट गए। उस पल भी मेरे मन में गंदे ख्याल आए, लेकिन मैंने खुद को संभाला।
उस रात मैंने प्लान को अंतिम रूप दिया। मैंने ऑनलाइन और लोकल फार्मेसी से “स्लीपिंग पिल्स” मँगवाईं – वो गोलियाँ जो जूस में घुल जाती हैं और 20-25 मिनट में गहरी नींद ला देती हैं।
कोई साइड इफेक्ट नहीं, सिर्फ़ 6-7 घंटे की बेहोशी। मैंने दो गोलियाँ अलग रख लीं।
वीकेंड आया। सुबह मम्मी-पापा सामान लेकर निकल गए। घर पूरी तरह खाली था। मैंने पूरे घर को सुहागरात जैसा बना दिया। लिविंग रूम में सुगंधित मोमबत्तियाँ जलाईं, सॉफ्ट रोमांटिक म्यूजिक चला दिया
बेडरूम में लाल रंग की सिल्क शीट्स बिछाईं, पिलो पर फूल बिखेर दिए। एसी को 22 डिग्री पर सेट कर दिया ताकि ठंडक में शरीर और भी संवेदनशील हो जाए।
शाम 7 बजे करीना आई। वो काली बैकलेस ड्रेस में थी। ड्रेस इतनी डीप नेकलाइन वाली थी कि उसकी आधी चूचियाँ बाहर झाँक रही थीं।
स्कर्ट इतनी छोटी कि जरा सा झुकते ही उसकी गोल गांड़ के निचले हिस्से दिख जाते। उसकी पीठ पूरी तरह नंगी थी। मैंने उसे देखते ही मन ही मन कहा – आज तू मेरे भाई के साथ सोएगी, लेकिन मेरी चूत पहले उसका स्वाद लेगी।
थोड़ी देर बाद मैंने विनय को फोन किया, “भैया जल्दी घर आओ। तुम्हारे लिए सरप्राइज है।” ये Family k bhai bahan ki Antarvasna Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हो।
विनय 8 बजे पहुँचा। सफेद शर्ट और ब्लैक जींस में वो बेहद हैंडसम लग रहा था। उसकी मसल्स शर्ट के अंदर से साफ़ दिख रही थीं। जैसे ही उसने करीना को देखा, उसकी आँखें चमक उठीं।
मैंने दोनों को लिविंग रूम में बिठाया और कहा, “तुम दोनों आराम से बैठो, मैं वेलकम ड्रिंक लाती हूँ।”
किचन में जाकर मैंने दो ग्लास ऑरेंज जूस बनाए। दोनों ग्लास में एक-एक स्लीपिंग पिल पाउडर कर के अच्छे से घोल दिया। खुद के लिए प्लेन जूस लिया। फिर मुस्कुराते हुए लिविंग रूम में गई।
“चीयर्स टू न्यू बिगिनिंग्स!” मैंने कहा और तीनों ने ग्लास उठाए। विनय और करीना ने पूरा जूस एक साँस में पी लिया। मैंने भी अपना प्लेन जूस पी लिया।
हम तीनों ने साथ में डिनर किया। मैंने जानबूझकर हल्के-फुल्के मजाक किए। करीना विनय के कंधे पर सिर रख रही थी। विनय उसके हाथ को चूम रहा था। माहौल धीरे-धीरे गरम होने लगा था।
करीना की साँसें थोड़ी भारी हो रही थीं।
बीस मिनट बाद असर दिखने लगा। करीना की आँखें भारी होने लगीं। “जनवी… मुझे बहुत नींद आ रही है यार…” वो बोली।
विनय भी बोला, “हाँ… अचानक थकान सी लग रही है।”
मैंने नॉर्मल स्वर में कहा, “कोई बात नहीं। चलो, तुम दोनों बेडरूम में आराम कर लो। मैं लाइट बंद कर देती हूँ।”
मैंने दोनों को सहारा देकर बेडरूम तक ले गई। बड़ा डबल बेड था। मैंने दोनों को बेड पर लिटा दिया। करीना तुरंत गहरी नींद में चली गई। उसकी साँसें धीमी और समान थीं।
विनय भी कुछ मिनट बाद पूरी तरह बेहोश हो गया। उसका सिर एक तरफ़ लुढ़क गया।
मैंने कमरे का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया। लाइट को डिम कर दिया। अब सिर्फ़ हल्की लाल रोशनी कमरे में फैली हुई थी। मेरा दिल इतनी तेज़ धड़क रहा था कि लग रहा था बाहर निकल जाएगा।
हाथ-पैर काँप रहे थे। लेकिन मेरी चूत पहले ही पूरी तरह गीली हो चुकी थी।
मैंने पहले करीना को देखा। वो पूरी तरह बेहोश थी। फिर मैं विनय भैया की तरफ़ मुड़ी। उनकी सफेद शर्ट के बटन धीरे-धीरे खोलने शुरू किए। एक-एक बटन खुलता गया।
उनकी चौड़ी, घनी बालों वाली छाती सामने आ गई। मर्दाना, मस्कुलर, पसीने की हल्की चमक के साथ। मैंने अपनी हथेली पूरी छाती पर फैला दी और धीरे-धीरे सहलाने लगी।
फिर मेरे हाथ नीचे गए। उनकी जींस का बेल्ट खोला, बटन खोला, ज़िपर नीचे की। जींस को पैरों से उतार दिया। अब सिर्फ़ काला बॉक्सर बचा था। बॉक्सर के अंदर एक बड़ा टेंट बना हुआ था। मैंने साँस रोके बॉक्सर को धीरे से नीचे सरकाया।
और फिर… हम्मम्म! विनय भैया का लंड पूरी तरह सामने था। आधा खड़ा, लेकिन फिर भी 8 इंच से ऊपर। मोटाई देखकर मेरी आँखें फट गईं। गुलाबी सुपाड़ा, फूली हुई नसें, भारी अंडकोश।
मेरी चूत में करंट दौड़ गया। सालों की प्यास अब फूटने को तैयार थी।
मैंने अपनी टी-शर्ट उतारी, ब्रा का हुक खोला। मेरी 34 साइज़ की गोरी चूचियाँ उछलकर बाहर आ गईं। निप्पल्स पहले से ही सख्त हो चुके थे। फिर स्कर्ट और पैंटी भी उतार दी। मैं पूरी तरह नंगी हो गई। मेरी चूत से रस टपक रहा था।
मैं बेड पर चढ़ गई, विनय भैया के बीच में बैठ गई। उनके लंड को दोनों हाथों से पकड़ा। वो गर्म था, नरम लेकिन तेज़ी से सख्त हो रहा था।
मैंने अपनी गीली जीभ निकाली और सुपाड़े पर चाटा। नमकीन, मर्दाना स्वाद। फिर धीरे-धीरे पूरा सुपाड़ा मुँह में ले लिया और चूसने लगी।
विनय की साँसें थोड़ी तेज़ हो गईं, लेकिन आँखें अभी भी बंद थीं। मैंने लंड को पूरा मुँह में लिया, गला तक पहुँचाया, फिर बाहर निकाला। थूक लगाकर चिकना किया। कुछ ही मिनटों में उनका लंड पूरा 9 इंच का राक्षस बन गया – खड़ा, मोटा, नसों वाला।
अब मैं उनके ऊपर चढ़ गई। अपनी टाँगें फैलाईं, चूत के फाँक अलग किए। लंड का सुपाड़ा मेरे टाइट, वर्जिन छेद पर रखा। दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। मैंने आँखें बंद कीं और धीरे से नीचे बैठने लगी।
“आआआह…!” बहुत तेज़ दर्द हुआ। सुपाड़ा अंदर घुसा। मैंने हिम्मत करके और नीचे दबाया। आधा लंड अंदर चला गया। मेरी चूत में खिंचाव और जलन हो रही थी। फिर एक और जोरदार धक्का।
“आआआह… भैया…!”
मेरी कुंवारी सील टूट गई। खून की एक पतली धार मेरे जाँघों पर बह निकली। दर्द से मेरी आँखों में आँसू आ गए, लेकिन सुख भी साथ था। मैं रुकी नहीं। धीरे-धीरे पूरा 9 इंच का लंड अपनी चूत में उतार लिया।
वासना की आग में मैं जल रही थी। मैंने कमर हिलानी शुरू की – ऊपर-नीचे, धीरे-धीरे। “आह… आह… भैया… तुम्हारा लंड… अंदर… पूरा… आह!”
थप-थप… थप-थप… हल्की आवाज़ कमरे में गूँजने लगी। मेरी चूचियाँ उछल रही थीं।
5 मिनट तक मैं इसी तरह सवार बनकर चुदाई का मजा ले रही थी। तभी अचानक…
विनय भैया की आँखें खुल गईं!
आगे की कहानी : जल्द.. (भाई के 9 इंच लंड ने मेरी कुंवारी चूत और गांड फाड़ दी 02)
💬 Leave a Comment :-
📝 Comments :
No comments yet. Be the first to comment!