ट्रेन में बहन-बीवी की सामूहिक चुदाई!
Hindi Group Sex Stories : ट्रेन में 3 मुस्लिम मर्दों ने मेरी हॉट बीवी और कुवारी साली की चूत-गांड-मुंह सब फाड़ डाले! दोनों की कामवासना वाली डर्टी Group चुदाई!!
ये कहानी कुछ महीने पहले की है। मैं राहुल, मेरी खूबसूरत बीवी प्रिया और उसकी छोटी बहन स्नेहा, एक शादी में शामिल होने जबलपुर जा रहे थे। ट्रेन रात 11 बजे वाली थी।
हम कल्याण स्टेशन पर प्लेटफॉर्म पर खड़े इंतजार कर रहे थे। सर्दियों का मौसम था, इसलिए प्लेटफॉर्म और वेटिंग रूम में भीड़ कम थी। ज्यादातर लोग जल्दी घर लौट चुके थे।
प्रिया ने आज बहुत हॉट लुक दिया था। वो स्लीवलेस ब्लाउज पहने थी जो उसके भारी 36D वाले चूचों को barely कवर कर रहा था। ऊपर से नेट वाली हल्की सी साड़ी उसके गोरे जिस्म पर लिपटी हुई थी।
ब्लाउज का कट इतना गहरा था कि उसके बड़े-बड़े स्तन आधे से ज्यादा दिख रहे थे। साड़ी का पल्लू बार-बार सरक रहा था, जिससे उसकी गहरी नाभि और कसाव भरी कमर साफ नजर आ रही थी।
उसकी गाँड गोल और मोटी थी, साड़ी में हिलते हुए वो किसी कामुक देवी लग रही थी।
स्नेहा भी पीछे नहीं थी। वो 22 साल की जवान लड़की थी। उसने टाइट स्लीवलेस टी-शर्ट पहनी थी जो उसके निप्पल्स को साफ उभार रही थी। छोटी स्कर्ट उसके गोरे मोटे जांघों को अच्छी तरह एक्सपोज कर रही थी।
दोनों बहनें आपस में हँस-हँस कर बातें कर रही थीं, एक-दूसरे की कमर पर हाथ फेर रही थीं और चुटकियाँ ले रही थीं।
मैं चाय वाला ढूंढ रहा था जब ट्रेन प्लेटफॉर्म पर आ गई। हम तीनों जल्दी से अपने रिजर्व्ड डिब्बे में चढ़ गए। डिब्बा ऑफ-सीजन की वजह से लगभग खाली था। सिर्फ हम तीनों। मैंने अपनी सीट पर बैठकर अखबार निकाला।
प्रिया खिड़की की तरफ, स्नेहा बीच में और मैं बाहर की तरफ।
ट्रेन चल पड़ी। करीब एक घंटे बाद कसारा स्टेशन आया और ट्रेन रुकी। अचानक हमारे डिब्बे में तीन आदमी चढ़ गए। तीनों 35-45 साल के बीच के लग रहे थे, मोटे-तगड़े शरीर, दाढ़ी और पठानी सूट पहने हुए।
वो हमारे सामने वाली सीट पर बैठ गए। हल्की-हल्की झांट वाली लंड उनके पाजामे से उभर रही थी।
मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया, लेकिन प्रिया बार-बार उनकी तरफ देख रही थी। स्नेहा को कोहनी मारकर इशारा कर रही थी। तीनों में से सबसे बड़े वाले ने प्रिया का इशारा पकड़ लिया और मुस्कुरा दिया। प्रिया भी शर्माते हुए मुस्कुराई।
ट्रेन फिर से चल पड़ी। अब हम टनल में घुसने लगे थे। अंधेरा छा गया था। स्नेहा ने ऊपर बैग से चादर निकालने की कोशिश की। ट्रेन अचानक ब्रेक लगी और स्नेहा सामने वाले आदमी की गोद में गिर गई।
उसकी मोटी गाँड ठीक उसके उभरे हुए लंड पर आ गई। आदमी ने दोनों हाथों से उसकी गाँड को जोर से पकड़कर सहारा दिया।
"आह्ह्ह... सॉरी..." स्नेहा ने धीरे से कहा, लेकिन उसकी आवाज में कुछ और ही था। आदमी ने गाँड दबाते हुए उसे उठाया। स्नेहा लाल होकर अपनी जगह पर बैठ गई।
प्रिया ने अंगड़ाई ली, अपनी कमर को मोड़ते हुए जिससे उसके चूचे और भी उभर गए। मैंने कहा, "प्रिया को शायद लेटना है, मैं बगल वाली सीट पर बैठ जाता हूँ।" स्नेहा बाहर की तरफ सरक गई। मैं बगल में चला गया और अखबार पढ़ने का नाटक करने लगा।
धीरे-धीरे माहौल गर्म होने लगा।
टनल के अंधेरे में मैंने देखा कि प्रिया के बगल वाला आदमी (जिसका नाम बाद में पता चला कि रशीद था) उसकी जांघ पर हाथ फेर रहा था। प्रिया ने कोई विरोध नहीं किया। वो बस आँखें बंद किए बैठी थी।
स्नेहा भी दूसरे आदमी (फिरोज) के बगल में सरक गई थी।
मैं चुपचाप ऊपर वाले अपर बर्थ पर चढ़ गया और लेटने का नाटक करने लगा। लेकिन मेरी आँखें नीचे की तरफ थीं।
कुछ देर बाद चादर की आड़ में प्रिया की साड़ी ऊपर सरक रही थी। रशीद का सिर प्रिया की टांगों के बीच था। उसकी जीभ प्रिया की चूत पर घूम रही थी।
"म्म्मह्ह्ह... आह्ह..." प्रिया ने धीमी सी सिसकारी भरी। उसकी एक टांग फैल गई थी, दूसरी रशीद के कंधे पर।
उधर स्नेहा के हाथ में फिरोज का मोटा, काला, झांटों वाला लंड था। वो धीरे-धीरे उसे हिला रही थी। फिरोज ने स्नेहा की टी-शर्ट ऊपर की और उसके निप्पल चूसने लगा।
"उफ्फ्फ... धीरे..." स्नेहा ने कांपती आवाज में कहा। ये Desi Sex से भरपूर Antarvasana Family Hindi Sex Kahani आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
तीसरा आदमी (सलमान) अब खड़ा हो गया। वो धीरे-धीरे कपड़े उतार रहा था। उसका लंड पहले से ही खड़ा था – मोटा, लंबा, काला और बदबूदार। उसने प्रिया की तरफ बढ़ना शुरू किया।
प्रिया ने आँखें खोलीं और उस भारी लंड को देखकर उसके होंठ सूख गए। लेकिन उसने हाथ बढ़ाकर उसे पकड़ लिया।
"क्या मोटा है..." प्रिया फुसफुसाई।
सलमान ने अपना लंड प्रिया के मुंह के पास किया। प्रिया ने पहले तो सिर्फ चूम लिया, फिर जीभ से चाटा। धीरे-धीरे उसने मुंह खोला और आधा लंड अंदर ले लिया।
"सल्... स्लर्प... म्म्म..." प्रिया के मुंह से आवाजें आने लगीं।
नीचे रशीद अब तेजी से प्रिया की चूत चाट रहा था। उसकी जीभ अंदर-बाहर हो रही थी। प्रिया की कमर हिलने लगी थी।
"आह्ह्ह... हां... वहां... चूसो ना..." प्रिया बुदबुदाई।
स्नेहा को देखो – फिरोज ने उसे गोद में बिठा लिया था। उसकी स्कर्ट ऊपर थी और वो फिरोज के लंड पर अपनी चूत रगड़ रही थी।
"उफ्फ... बड़ा है... डर लग रहा है..." स्नेहा ने कांपते हुए कहा।
मैं ऊपर लेटा सब कुछ देख रहा था। मेरा अपना लंड पत्थर की तरह खड़ा था।
टनल का अंधेरा और ट्रेन की हल्की-हल्की आवाज़ पूरे डिब्बे को और ज्यादा कामुक बना रही थी। मैं ऊपर अपर बर्थ पर लेटा था, आँखें नीचे की तरफ, दिल जोरों से धड़क रहा था।
प्रिया और स्नेहा दोनों अब पूरी तरह उस माहौल में खो चुकी थीं।
रशीद अभी भी प्रिया की चूत को चाट रहा था। उसकी मोटी जीभ प्रिया की फूली हुई पर बार-बार घूम रही थी। प्रिया की साड़ी कमर तक सरक चुकी थी, पेटीकोट और पैंटी दोनों एक तरफ फेंकी हुई थीं।
उसकी गोरी जांघें फैली हुई थीं और रशीद का सिर उनके बीच पूरी तरह गड़ा हुआ था।
"आह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ... रशीद... और जोर से चूसो ना... हां... यही... म्म्म्माह्ह्ह..." प्रिया की आवाज़ कांप रही थी। उसकी कमर बार-बार ऊपर उठ रही थी, जैसे वो रशीद की जीभ को और गहरा महसूस करना चाहती हो।
सलमान का मोटा, काला लंड प्रिया के मुंह में आधा घुसा हुआ था। प्रिया उसकी बदबूदार झांटों को नाक से छूते हुए चूस रही थी। उसके गाल अंदर-बाहर हो रहे थे।
"सल्... स्लर्प... ग्लक... म्म्म... कितना मोटा है तेरा लंड... आह्ह..." प्रिया ने लंड को मुंह से निकालकर चूमते हुए कहा, फिर फिर से पूरी ताकत से चूसने लगी।
उधर स्नेहा की हालत भी कम नहीं थी। फिरोज ने उसे अपनी गोद में बिठाया हुआ था। स्नेहा की छोटी स्कर्ट कमर तक चढ़ी हुई थी। फिरोज का मोटा लंड स्नेहा की चूत की लिप्स पर रगड़ रहा था, लेकिन अभी अंदर नहीं डाला था।
स्नेहा अपनी कमर हिला-हिला कर खुद को रगड़ रही थी।
"उफ्फ्फ... फिरोज भाई... इतना मोटा... मेरी चूत फट जाएगी... धीरे... आह्ह्ह..." स्नेहा ने कांपती हुई आवाज में कहा। फिरोज ने उसकी टी-शर्ट पूरी तरह ऊपर कर दी थी। उसके दोनों चुचे बाहर थे।
वो एक-एक करके स्नेहा के गुलाबी निप्पल्स को चूस रहा था, कभी-कभी हल्का-हल्का काट भी लेता था।
"तेरी चूत तो बहुत गीली हो गई है रंडी... चूसने दे पहले..." फिरोज ने स्नेहा की गर्दन चूमते हुए कहा। ये Muslim Sex से भरपूर Hindi Sex Stories आप Garam kahani पर पढ़ रहे है।
मैं देख रहा था कि स्नेहा कितनी धीरे-धीरे तैयार हो रही थी। उसकी आँखें बंद थीं, होंठ कांप रहे थे। वो कभी-कभी मेरी तरफ भी देख लेती थी, लेकिन शर्म और हवस के मिश्रण में कुछ बोल नहीं पा रही थी।
कुछ मिनट बाद रशीद उठा। उसने अपनी पठानी सूट उतार दी। उसका लंड अब पूरी तरह खड़ा था – करीब ७ इंच लंबा, मोटा और काला। झांटें भरपूर थीं। उसने प्रिया को सीट पर लिटाया और उसके ऊपर झुक गया।
प्रिया ने अपनी जांघें और फैला दीं। उसकी चूत अब पूरी तरह भीगी हुई, चमक रही थी।
"धीरे से डालना... पहली बार इतना मोटा ले रही हूँ..." प्रिया ने शर्माते हुए कहा, लेकिन उसकी आँखों में हवस साफ दिख रही थी।
रशीद ने अपने लंड का सिर प्रिया की चूत पर रखा। धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। प्रिया की चूत की लिप्स फैलने लगीं।
"आआआह्ह्ह्ह... उफ्फ्फ... धीरे... बड़ा है... आह्ह्ह..." प्रिया ने जोर से सिसकारी भरी। उसकी उंगलियां सीट को पकड़ रही थीं।
रशीद ने एक झटका दिया और आधा लंड अंदर चला गया। प्रिया की आँखें फट गईं।
"मर गई... आह्ह्ह... पूरा मत डालो अभी... हां... धीरे... म्म्म्म..." लेकिन रशीद रुका नहीं। वो धीरे-धीरे पूरा लंड अंदर डालने लगा। प्रिया की चूत पूरी तरह फैल चुकी थी।
सलमान अब प्रिया के मुंह में तेजी से लंड हिला रहा था। प्रिया दोनों तरफ से भर चुकी थी।
"ग्लक... ग्लक... आह्ह... चोदो मुझे... जोर से..." प्रिया के मुंह से निकल रही थी।
स्नेहा की तरफ देखा तो फिरोज ने उसे सीट पर लिटा दिया था। उसने स्नेहा की जांघें चौड़ी कीं और अपना लंड उसकी कुवारी-सी चूत पर रख दिया।
"डर लग रहा है फिरोज... पहली बार है... आह्ह..." स्नेहा रोती हुई-सी आवाज में बोली।
फिरोज ने उसके होंठ चूमे, उसके चुचों को दबाया और धीरे से अंदर दबाव डाला।
"आआआह्ह्ह्ह... फट गई... दर्द हो रहा है... उफ्फ्फ..." स्नेहा ने जोर से चीख मारी। उसके नाखून फिरोज की पीठ में गड़ गए। खून की हल्की सी धार स्नेहा की जांघों पर बहने लगी।
फिरोज रुका, उसे चूमता रहा, फिर धीरे-धीरे हिलने लगा। स्नेहा पहले दर्द से कराह रही थी, लेकिन धीरे-धीरे उसके कराहने में मजे की आवाज आने लगी।
"हां... अब अच्छा लग रहा है... और अंदर... आह्ह्ह... चोदो मुझे..." स्नेहा ने आखिरकार कहा।
अब पूरा डिब्बा चुदाई की आवाजों से भर गया था। प्रिया की चूत में रशीद जोर-जोर से धक्के दे रहा था।
"थप... थप... थप... आह्ह्ह प्रिया रानी... तेरी चूत तो स्वर्ग है... ले... ले पूरा..."
प्रिया नीचे से कमर उठा-उठा कर जवाब दे रही थी। "हां... जोर से चोदो... मेरी चूत फाड़ दो... आह्ह्ह... सलमान तेरा लंड भी चूसती हूँ... म्म्म..."
सलमान ने अब प्रिया को घोड़ी बनाया। रशीद नीचे लेट गया और प्रिया उसकी चूत में बैठ गई। सलमान पीछे से उसकी गाँड पर लंड रखकर दबाने लगा।
"नहीं... गांड में मत... आह्ह... दर्द होगा..." प्रिया ने डरते हुए कहा, लेकिन सलमान ने थूक लगाकर धीरे से अंदर डालना शुरू कर दिया।
"आआआह्ह्ह्ह... फट गई गांड... उफ्फ्फ... धीरे... हां... आह्ह..." प्रिया दोनों तरफ से भर चुकी थी। उसकी आँखों से आंसू निकल रहे थे, लेकिन वो कमर हिला रही थी।
स्नेहा अभी मिशनरी में फिरोज से चुद रही थी। उसके चुचे उछल रहे थे। "फिरोज... तेज... हां... मेरी चूत में पूरा डाल दो... आह्ह्ह... मैं तुम्हारी रंडी हूँ..."
आगे की कहानी : "ट्रेन में बहन-बीवी की सामूहिक चुदाई! 02"
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