55 की उम्र में बेटे के बीज से माँ हुई प्रेग्नेंट!

Antarvasna Family Sex Story : 19 साल के बेटे ने बारिश की रात 55 साल की प्यासी माँ की चूत फाड़ दी। रसोई में कुतिया बनाकर चोदा और बीज डालकर कर दिया प्रेग्नेंट!


मेरा नाम पुर्णिमा है। लोग मुझे पुर्णिमा ताई कहते हैं। उम्र 55 साल हो गई, लेकिन मेरा बदन अभी भी वैसा ही है – मोटी कमर, भारी-भारी चुचियाँ जो ब्लाउज फाड़ने को तैयार रहती हैं, चौड़े-चौड़े कूल्हे और वो चूत जो बारह साल से सूखी पड़ी थी।


बारह साल पहले मेरे पति ने मुझे तलाक दे दिया और एक जवान लड़की ले आया। मुझे और मेरे सात साल के बेटे आरव को छोड़कर चला गया। तब से सिर्फ मैं और मेरा आरव… लखनऊ के पुराने मोहल्ले में एक छोटा-सा मकान।


बाहर से सब कुछ ठीक दिखता है, लेकिन अंदर… अंदर तो आग लगी रहती थी। (Maa aur Beta Sex)


आरव जब अठारह का हुआ तो उसकी नजरें बदल गईं। जब मैं नहाकर तौलिया लपेटकर बाहर निकलती, उसकी आँखें मेरी जाँघों पर, मेरी गहरी चोचियों की खाई में और मेरी नंगी कमर पर अटक जातीं।


मैं समझती थी कि ये गलत है, लेकिन सच बोलूँ तो मुझे बहुत अच्छा लगता था। बारह साल से किसी मर्द ने मुझे छुआ तक नहीं था। मेरी चूत सूख चुकी थी, लेकिन अंदर आग जल रही थी।


एक दिन मैं बाजार से लौटी तो देखा – आरव मेरे अलमारी से मेरी काली ब्रा और पैंटी निकालकर उन्हें सूँघ रहा था। उसका लंड लोअर के अंदर खड़ा था। मैं चुपके से दरवाजे पर खड़ी रही। उसने ब्रा को नाक से लगाकर गहरी साँस ली और बोला, “मम्मी… आपकी खुशबू…”


मैं अंदर घुसी और धीरे से पूछा, “क्या कर रहा है बेटा?” वो डर के मारे काँप गया। “कुछ नहीं ताई…”


उस दिन मैंने कुछ नहीं कहा, लेकिन रात को अकेले लेटे-लेटे मेरी चूत गीली हो गई थी।


गर्मी का मौसम था। आरव छत पर सोता था, मैं कमरे में। एक रात अचानक जोरदार बारिश शुरू हो गई। आरव भागता हुआ कमरे में आया। “ताई… बाहर बहुत बारिश हो रही है… क्या मैं आपके पास लेट जाऊँ?”


मैंने सिर्फ एक पतला-सा पेटीकोट और ब्लाउज पहना हुआ था। ब्लाउज के ऊपर से मेरी भारी चुचियाँ साफ दिख रही थीं। मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ आ जा बेटा… मेरे पास आ जा।”


वो मेरे पास लेट गया। उसका बदन गीला था। उसने अपना हाथ धीरे-धीरे मेरी कमर पर रख दिया। मैंने अनदेखा कर दिया। थोड़ी देर बाद जब मुझे नींद आने लगी, आरव का हाथ धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा… और मेरी भारी चुचियों पर आकर रुक गया। उसने हल्के से दबाया।


मैं सहम गई। “आरव… ये क्या कर रहा है बेटा?”


वो काँपती आवाज में बोला, “ताई… मुझे आपकी बहुत जरूरत है। आपकी खुशबू… आपकी गर्मी… आपकी ये भारी-भारी चुचियाँ… सब कुछ मुझे चाहिए।”


मैंने काँपते हुए कहा, “आरव… ये गलत है… मैं तेरी माँ हूँ…”


लेकिन उसने मेरी आँखों में देखा और बोला, “मैं आपको देखते-देखते बड़ा हुआ हूँ ताई… मुझे आप ही चाहिए। आपकी चूत… मैंने सोचा भी नहीं था कि एक दिन मैं इसे छू पाऊँगा।”


उसने अपना हाथ नीचे सरकाया और पेटीकोट के ऊपर से ही मेरी चूत पर रख दिया। मैं पूरी काँप गई। मेरी चूत में बिजली-सी दौड़ गई।


आरव ने कान में फुसफुसाया, “छू लेने दो ना ताई… माँ की चूत बारह साल से प्यासी है… मैंने इसे बहुत दिनों से लेना चाहा है।”


उसके शब्दों ने मेरे तन-बदन में आग लगा दी। मैंने धीरे से कहा, “हाँ… छू लो बेटा…” यह XXX Hindi Sex Story आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


मैंने खुद अपना ब्लाउज खोल दिया। मेरी दोनों भारी चुचियाँ बाहर आ गईं – काली-काली निप्पल्स खड़े हो चुके थे। आरव ने लपककर एक चूची मुँह में ले ली और जोर-जोर से चूसने लगा।


दूसरी चूची को हाथ से मलता रहा। मैं कराह उठी, “आह्ह्ह… आरव… धीरे… लेकिन छोड़ मत…”


फिर मैंने अपना पेटीकोट भी ऊपर कर दिया। मेरी चूत पूरी तरह नंगी थी – बालों वाली, गीली, प्यासी। आरव ने अपना हाथ वहाँ फेरा। दो उँगलियाँ अंदर डाल दीं।


“उफ्फ्फ… ताई… आपकी चूत कितनी गीली है… कितनी गर्म…”


मैंने उसके लोअर में हाथ डाला और उसका लंड निकाल लिया। मोटा, लंबा, नसों वाला, सिर लाल और चमकदार। मैंने फुसफुसाया, “ये लंड… माँ के लिए ही बना है बेटा…”


मैंने तुरंत उसे मुँह में ले लिया। गोक… गोक… गोक… जोर-जोर से चूसने लगी। जीभ से नसों को चाटती रही। आरव ने मेरे बाल पकड़कर मेरा सिर नीचे दबाया। “ताई… आपका मुँह कितना गर्म है… चूसो… और जोर से… अह्ह्ह…”


फिर मैं बेड पर लेट गई। दोनों टाँगें फैला दीं। चूत पूरी तरह खुली हुई। “अंदर डाल दे बेटा… माँ की चूत में अपना पूरा लंड डाल दे…”


आरव ने पहले मेरी चूत चाटी। जीभ अंदर तक डाल दी। मैं चीख उठी, “आह्ह्ह… आरव… चाट… और चाट… मैं पागल हो रही हूँ…”


फिर उसने अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रखा और एक जोरदार झटका मारा। पूरा लंड एक ही बार में अंदर चला गया।


“अआह्ह्ह्ह… फाड़ दिया… माँ की चूत फाड़ दी…” मैं चिल्लाई।


आरव जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के पर मेरी भारी चुचियाँ उछल रही थीं। कमरा मेरी चीखों और उसके कराहों से भर गया था।


“हाँ… फाड़ दे… माँ की चूत को अपने लंड से भर दे… अपना गर्म बीज डाल दे अंदर…” मैं चिल्ला रही थी।


आरव तेज हो गया। आखिरकार उसने गहरी साँस ली और मेरी चूत के अंदर ही सारा गर्म-गर्म रस उड़ेल दिया।


हम दोनों थककर लेट गए। उसने मुझे कसकर जकड़ लिया। हम दोनों रोए – वो खुशी से, मैं अपराध और सुकून के मिले-जुले एहसास से।


उस रात हम दोनों ऐसे ही सो गए।


सुबह जब मेरी आँख खुली तो आरव मेरे पास ही नंगा लेटा था। उसका लंड फिर से खड़ा हो चुका था। मुझे फिर से उसकी जरूरत महसूस हुई। मैंने अपना हाथ बढ़ाया और उसके लंड को सहलाने लगी।


आरव की आँख खुल गई। “ताई… क्या कर रही हो?”


मैंने लजाते हुए कहा, “मैं तड़प रही हूँ बेटा… तेरे लंड के लिए…”


उसका लंड और सख्त हो गया। मैंने तुरंत उसे मुँह में ले लिया। गोक… गोक… गोक… जोर-जोर से चूसने लगी। आरव ने मेरे सिर को पकड़कर अपना पूरा लंड गले तक ठूँस दिया। पाँच मिनट तक मैं उसे चूसती रही। आखिरकार वो झड़ गया और मैंने सारा रस पी लिया।


उसके बाद आरव बाथरूम चला गया। मैं नहाकर रसोई में खाना बनाने लगी। मैंने सिर्फ सलवार-कमीज पहनी थी।


अचानक आरव पीछे से आया। उसने मुझे जकड़ लिया। एक हाथ से मेरी भारी चुचियों को दबाने लगा, दूसरे हाथ से सलवार के अंदर हाथ डालकर चूत सहलाने लगा।


मेरी चूत फिर गीली हो गई। मैं अट्टा लगा रही थी लेकिन अब मूड में आ चुकी थी। यह Antarvasna Desi Sex Story आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।


मैंने कहा, “बेटा… अब और मत तड़पाओ… चोद दो माँ को…”


आरव ने मेरी सलवार और पैंटी एक झटके में नीचे खींच दी। मैं रसोई की स्लैब पर झुक गई। मेरी चौड़ी गांड और गीली चूत पूरी तरह उसके सामने थी। उसने अपनी उँगलियों से मेरी चूत की फाँकें फैलाईं और थूक लगाया।


“ताई… तेरी चूत कितनी गीली और गर्म है… चोदूँ क्या माँ?”


मैं सिसकते हुए बोली, “हाँ बेटा… चोद… माँ को कुतिया बनाकर चोद… अपनी माँ की चूत फाड़ दे…”


आरव ने अपना मोटा लंड मेरी चूत पर रगड़ा और एक जोरदार झटके में पूरा घुसा दिया। “अआह्ह्ह्ह…!” मैं चीख उठी। स्लैब पर अट्टा लगा हुआ था, लेकिन मेरी कमर खुद-ब-खुद पीछे उठ रही थी।


वो जोर-जोर से धक्के मारने लगा। हर धक्के के साथ मेरी भारी चुचियाँ स्लैब पर रगड़ खा रही थीं। “आह्ह… उफ्फ… हाँ बेटा… और तेज… फाड़ दे माँ की चूत…”


आरव ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे और झुकाया। “ताई… तेरी चूत मेरे लंड को कितना चूस रही है… बोल… माँ का लंड पसंद है?”


“हाँ… बहुत पसंद है… तेरा लंड मेरी चूत के लिए ही बना है… चोद… और जोर से चोद…”


वो और तेज हो गया। रसोई में सिर्फ चुदाई की आवाजें गूँज रही थीं – फच… फच… फच… और मेरी चीखें “अह्ह… उँह… आह्ह… फाड़ दे…”


कुछ मिनट बाद आरव ने लंड निकाला और बोला, “ले ताई… चूस…”


मैं तुरंत नीचे बैठ गई। उसका लंड मेरे मुँह के सामने था – मेरी ही चूत का रस चमक रहा था। मैंने उसे पूरा मुँह में ले लिया। गोक… गोक… गोक… जोर-जोर से चूसने लगी। आरव ने मेरे सिर को पकड़कर गले तक ठूँस दिया।


“ताई… तेरा मुँह स्वर्ग है… चूस… और चूस…” वो सिसक रहा था।


दो मिनट बाद वो झड़ने वाला था। उसने मुझे रोका, मुझे स्लैब पर बैठाया, मेरी दोनों टाँगें चौड़ी कीं और फिर से लंड अंदर घुसा दिया। अब आमने-सामने चुदाई हो रही थी। मेरी चुचियाँ उसके मुँह के पास थीं।


वो एक-एक चूची चूसता हुआ जोर-जोर से धक्के मार रहा था।


“अह्ह… उफ्फ… हाँ बेटा… माँ की चूत भर दे… अपना गर्म रस डाल दे…”


आरव और तेज हो गया। आखिरकार वो काँप उठा और मेरी चूत के अंदर गहराई तक अपना सारा गाढ़ा, गर्म वीर्य उड़ेल दिया। मैं भी झड़ गई। मेरी चूत उसके लंड को चूस रही थी।


उस दिन के बाद हमारी जिंदगी बदल गई। दिन-रात बस चुदाई… चुदाई… चुदाई।


कभी सोफे पर – मैं उसकी गोद में बैठकर ऊपर-नीचे उछलती, मेरी भारी चुचियाँ उसके मुँह में। कभी बाथरूम में – मैं नंगी खड़ी होती, वो पीछे से मेरी गांड में उँगली डालता, फिर अपना मोटा लंड मेरी चूत में घुसाता।


एक दिन बाथरूम में वो मेरी गांड चोदने को उतावला हो गया। “ताई… तेरी गांड भी मेरी है… डालूँ क्या?” उसने मेरी गांड पर थूक लगाते हुए पूछा।


मैंने शर्माते हुए लेकिन प्यार से कहा, “डाल बेटा… माँ की गांड फाड़ दे… अपना पूरा माल अंदर डाल दे…”


उसने धीरे-धीरे अपना लंड मेरी टाइट गांड में घुसाया। पहले तो दर्द हुआ, लेकिन फिर मजा आने लगा। “आह्ह… उफ्फ… धीरे… लेकिन पूरा डाल…”


आरव ने मेरी कमर पकड़कर जोर-जोर से गांड मारनी शुरू कर दी। “ताई… तेरी गांड कितनी टाइट है… मैं रोज चोदूँगा इसे…”


मैं चीख रही थी, “हाँ… फाड़ दे… माँ की दोनों छेद तेरे हैं… चोद… चोद…”


तीन महीने तक हम ऐसे ही पागलों की तरह एक-दूसरे को चोदते रहे। रसोई, बेडरूम, छत, बाथरूम – कहीं भी मौका मिलता, आरव मेरा ब्लाउज खोलकर चुचियाँ चूसता, सलवार खींचकर चूत या गांड चोदता।


फिर एक सुबह मुझे उल्टी हुई। मैं डर गई। टेस्ट करवाया तो पता चला – मैं प्रेग्नेंट थी।


मैं बहुत रोई। डर लग रहा था। समाज क्या कहेगा? लेकिन आरव ने मुझे गले लगाया और बोला, “ताई… डरो मत। ये हमारा प्यार है। मैं तुम्हें और हमारे बच्चे को कभी नहीं छोड़ूँगा।”


मैंने रोते-रोते उसका लंड निकाला और फिर से मुँह में ले लिया। उस रात भी हम चुदे – धीरे-धीरे, प्यार से, लेकिन उतनी ही गर्मी के साथ। मेरी गर्भवती चूत अब और भी संवेदनशील हो गई थी। हर धक्के पर मुझे अजीब सा सुकून मिलता था।


अब मैं 55 साल की हूँ, लेकिन मेरी चूत फिर से जवान हो गई है। आरव Beta मेरा मर्द बन चुका है। दिन में जब मन करे, वो मुझे रसोई में, बेड पर या बाथरूम में घसीट ले जाता है और मुझे अपनी माँ की तरह नहीं, अपनी रंडी की तरह चोदता है।


और मैं… मैं खुश हूँ। बारह साल की प्यास आज पूरी हो रही है।


यह Hindi Sex Kahani पढ़ने के बाद आप Maa Bete Sex के अपने विचार, कमेंट्स में ज़रूर लिखें, ताकि हम आपके लिए Daily और बेहतर Chudai ki Kahani पेश कर सकें!

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