बेटे ने माँ और कामवाली कामिनी को बनाया रखैल 02
Family Sex : बेटे ने अपनी माँ और कामवाली कामिनी को रखैल बनाया! उन्हें एक-दूसरे की चूत चटवाता है, फिर दोनों को बारी-बारी से जबरदस्ती चोदकर अपनी रंडी बना लेता है!
अभी तक "बेटे ने माँ और कामवाली कामिनी को बनाया रखैल!" में आपने पढ़ा :-
मैंने उस किस को एक गले लगाने में बदल दिया। मैंने उन्हें कसकर अपनी बांहों में भर लिया। मेरा लंड जो पहले से ही खड़ा था, अब उनकी चूत से दब गया।
मम्मी कांप गईं और पीछे हटने की कोशिश की, पर मैंने उन्हें और कसकर पकड़ लिया। "रोहित, छोड़ो... यह क्या कर रहे हो?"
"कुछ नहीं मम्मी, बस आपसे प्यार कर रहा हूं।" मैंने कहा और उनके गाल पर एक किस किया।
"यह गलत है, रोहित। मैं तुम्हारी मां हूं।" उन्होंने कहा, पर उनकी आवाज में कमजोरी थी।
"आप मेरी मां हो, इसीलिए तो मैं आपसे प्यार करता हूं।" मैंने कहा और उनकी नाइटी के ऊपर से ही उनकी पीठ पर हाथ फेरने लगा।
आगे की कहानी :-
उसी समय कामिनी नाश्ता लेकर आ गई। उसने देखा कि मैं मम्मी को कसकर पकड़े हुए हूं। वह डर के मारे वहां जम गई और उसके हाथ की प्लेट कांपने लगी।
"रोहित, छोड़ो... कामिनी देख रही है।" मम्मी ने शर्मिंदगी में कहा।
मैंने मम्मी को नहीं छोड़ा, बल्कि कामिनी की तरफ देखकर मुस्कुराया। "देख क्या रही है? देखने दे। आज मैं अपनी मां को दिखाऊंगा कि एक असली मर्द क्या होता है।"
यह सुनकर कामिनी का चेहरा पीला पड़ गया। वह डर के मारे वहां से भागना चाहती थी, पर उसके पैर जमे हुए थे। मैंने एक हाथ से मम्मी को पकड़े रखा और दूसरे हाथ से कामिनी को इशारा किया कि वह प्लेट रखकर वहीं खड़ी रहे।
"कामिनी, तू भी आकर बैठ जा। आज तेरे मालिक की मां की चुदाई देखने को मिलेगी।" मेरी आवाज में क्रूरता और वासना दोनों थी।
कामिनी डरते-डरते सोफे पर कोने में बैठ गई और सिर झुका लिया।
मैंने अब मम्मी को उठाया और उन्हें अपनी गोद में उठा लिया। "रोहित, मेरा बेटा, प्लीज... यह गलत है... मैं तुम्हारी मां हूं..." मम्मी रोते हुए बोलीं, पर उनकी आवाज में अब कमजोरी थी।
"चुप, मम्मी! आज से तू मेरी रानी है। और एक रानी को अपने राजा की सेवा करनी चाहिए।" मैंने कहा और उन्हें बेडरूम में ले गया।
मैंने उन्हें बिस्तर पर फेंक दिया और उनकी नाइटी फाड़ दी। अब मम्मी सिर्फ ब्रा और पैंटी में थीं। मैंने उनकी ब्रा भी फाड़ दी और उनके मस्त चूचे आजाद कर दिए।
"क्या मस्त चूचे हैं तेरे, माँ! आज इनकी जमकर सेवा करूंगा।" मैंने कहा और उनके चूचों पर झपट पड़ा।
मैंने पहले एक चूचे को मुंह में भर लिया और दूसरे को मसलने लगा। मम्मी के मुंह से दर्द और मजे की आवाजें निकलने लगीं।
"आह्ह्ह... रोहित... नहीं... प्लीज... छोड़ो... आह..."
मैंने अब उनकी पैंटी भी फाड़ दी और उनकी चिकनी चूत को देखा। उस पर थोड़े बाल थे, पर चूत गीली हो चुकी थी। मैंने उस पर अपनी जीभ रखी और चाटने लगा।
"आह्ह्ह... यह क्या... नहीं... रोहित... मैं तुम्हारी मां हूं... यह पाप है..." मम्मी चिल्ला रही थी, पर अब उनके शरीर में जोश आ रहा था।
"पाप तब है जब एक मां की चूत इतनी गीली हो और उसका बेटा उसे चोद नहीं रहा हो।" मैंने कहा और उनकी चूत में अपनी जीभ घुसा दी।
अब मम्मी पूरी तरह से गर्म हो गई थीं और वह अपनी गांड उठा-उठाकर मेरा साथ दे रही थीं। मैंने उन्हें घोड़ी बना दिया और अपना लंड उनकी चूत पर रख दिया।
"तैयार हो, माँ? आज तेरी चूत की वीर्य से नहाने वाला हूं।
मैंने कहा और एक हाथ से अपना 7 इंच का मोटा लंड पकड़कर उनकी चूत के छेद पर रगड़ने लगा। ये xxx Antarvasna Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
मम्मी का पूरा शरीर कांप रहा था। एक तरफ वह इस पाप के डर से कांप रही थी, तो दूसरी तरफ उनकी चूत की प्यास उन्हें मेरे हाथों से खेलने पर मजबूर कर रही थी।
"रोहित... प्लीज... मत करो यह... मैं तुम्हारी मां हूं..." उनकी आवाज फटी-फटी सी थी, पर उनकी चूत से निकलता रस बता रहा था कि उनका शरीर क्या चाहता है।
मैंने उनकी एक नहीं सुनी और एक जोरदार धक्का देकर अपना आधा लंड उनकी चूत में घुसा दिया।
"आअहहहह... माँ... बाप रे... मर गई... निकालो... रोहित... निकालो अपना हरामखोर लंड... फट गई मेरी चूत..." मम्मी दर्द से चिल्लाईं। शायद पापा ने बहुत दिनों से उनकी चुदाई नहीं की थी, उनकी चूत बहुत टाइट थी।
मैंने उनके मुंह पर हाथ रख दिया। "चुप बिट्च, साली रंडी! आज से तू मेरी रखैल है, मेरी मां नहीं। समझी? और एक रखैल को अपने मालिक का लंड लेने में मजा आना चाहिए।"
यह कहकर मैंने एक और धक्का दिया और मेरा पूरा लंड उनकी चूत की गहराइयों में समा गया।
दरवाजे पर खड़ी कामिनी यह सब देखकर सिहर उठी। उसे डर तो लग रहा था, पर साथ ही उसकी भी चूत में आग लग गई थी। वह धीरे से अपनी सलवार के अंदर हाथ डालकर अपनी चूत को सहलाने लगी।
मैंने मम्मी को घोड़ी बना रखा था और अब मैं उनकी चूत की जमकर पिटाई कर रहा था। मेरे धक्के इतने तेज थे कि पूरा कमरा थप-थप की आवाज से गूंज रहा था। मम्मी के चूचे नीचे लटक रहे थे और हर धक्के के साथ हवा में उछल रहे थे।
"ले माँ, ले मेरा लंड! कैसा लग रहा है तेरी बेटे का लंड? तेरे पति से बड़ा और मोटा नहीं है क्या? आह... तेरी चूत तो बहुत टाइट है रांड... ऐसी चूत को तो रोज चोदना चाहिए।" मैं चोदते हुए गालियां दे रहा था।
"आह... रोहित... और जोर से... फाड़ दे मेरी चूत... आह... हाय... मैं तेरी रांड हूं... मैं तेरी रखैल हूं... आह... चोद अपनी मां को... आह..." अब मम्मी भी पूरी तरह से पागल हो गई थीं और मुझे चोदने का मजा ले रही थीं।
मैंने उनके बालों को खींचकर उनका सिर पीछे किया और उनके होंठों पर किस करने लगा। उसने भी मेरा साथ दिया और हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे।
फिर मैंने उन्हें पलट दिया और उनके ऊपर चढ़ गया। अब मैं उनके होंठ चूस रहा था और उनकी चूत में लंड पेल रहा था।
उन्होंने अपने पैर मेरे कमर में लपेट लिए थे और मेरे धक्कों का जवाब अपनी गांड उठाकर दे रही थीं। मेरे लंड का हर वार उनकी गहराइयों में उतर रहा था और उनकी चूत पानी छोड़ रही थी।
"आह्ह्ह... रोहित... मैं झड़ने वाली हूं... मेरे राजा... अपनी मां की चूत में वीर्य डाल दे... आह..." मम्मी चिल्ला रही थीं।
"हां, माँ! झड़ जा! आज से तू मेरी रखैल है, मेरी रांड है! समझी?" मैंने कहा और तेजी से धक्के मारने लगा।
थोड़ी ही देर में मम्मी झड़ गईं। उनकी चूत ने पानी छोड़ दिया और उनका शरीर ढीला पड़ गया। मैं भी झड़ने वाला था। मैंने अपना लंड उनकी चूत से निकाला और उनके मुंह पर अपना वीर्य छोड़ दिया।
"पी इसे, माँ! पी अपने बेटे का वीर्य!" मैंने कहा।
मम्मी ने मेरा वीर्य पी लिया। फिर मैंने उन्हें उठाया और उनके कपड़े पहनाए।
"अब जाकर नहा लो। आज से तू मेरी रखैल है।" मैंने कहा। ये Hot Nonveg वाली Parivarik Chudai पर Based Hindi Sex Kahani आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
मम्मी शर्म से पानी-पानी होकर बाथरूम में चली गईं। मैं भी अपने रूम में आ गया।
दरवाजे पर खड़ी कामिनी यह सब देखकर सिहर उठी। उसे डर तो लग रहा था, पर साथ ही उसकी भी चूत में आग लग गई थी। वह धीरे से अपनी सलवार के अंदर हाथ डालकर अपनी चूत को सहलाने लगी।
मैंने उसे देखा और मुस्कुराया। "कामिनी, तू भी आ जा। अब तेरी बारी है।"
कामिनी डरते-डरते मेरे पास आई। मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और उसके होंठों पर किस करने लगा। उसने भी मेरा साथ दिया और हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे।
"तूने सब देखा?" मैंने पूछा।
"हां, बाबूजी।" कामिनी ने कहा।
"कैसा लगा?"
"बहुत मस्त लगा।" कामिनी ने कहा।
"तो चल, अब मैं तुझे भी मजा देता हूं।" मैंने कहा और उसे बेड पर लिटा दिया।
मैंने उसके कपड़े उतारे और उसकी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। वह भी मजा ले रही थी और मेरे बालों में हाथ फेर रही थी।
"आह्ह्ह... बाबूजी... चूसो... जोर से चूसो मेरे चूचे... आह..." कामिनी चीख रही थी।
मैंने उसकी चूत में उंगली करने लगा। उसकी चूत गीली हो गई थी। मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसकी चूत में घुसा दिया।
"आह्ह्ह... बाबूजी... मर गई... और जोर से... फाड़ दो मेरी चूत... आह..." कामिनी चिल्ला रही थी।
मैंने उसकी चूत में अपना पूरा लंड घुसा दिया और तेजी से धक्के मारने लगा। उसकी चूचियां हवा में लहरा रही थीं। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ा और जोर से मसलने लगा।
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