बेटे ने माँ और कामवाली कामिनी को बनाया रखैल!
Family Group Sex : रसोई में काम कर रही कामवाली कामिनी को पकड़कर उसके कपड़े फाड़े और रसोई के सिंक पर उसकी चूत में लंड पेल दिया! फिर हुई चुदाई में माँ की एंट्री!
मेरा नाम रोहित है और मैं 21 साल का हूं। मेरी फैमिली में मेरे पापा, मम्मी और मैं हूं। पापा बिजनेसमैन हैं और अक्सर बाहर रहते हैं। घर में ज्यादातर मैं और मम्मी ही होते हैं।
मेरी मम्मी का नाम रीना है और वह 40 साल की हैं। देखने में वह एकदम मस्त माल हैं। उनका फिगर 36-30-38 का है और वह अक्सर साड़ी पहनती हैं।
हमारे घर में कामवाली बाई का नाम कामिनी है।
वह 35 साल की है और उसका फिगर भी कमाल का है। उसके 34-28-36 के माप और गोरे-गुलाबी रंग की चमड़ी को देखकर किसी भी मर्द का लंड खड़ा हो जाए। कामिनी हमारे घर में पिछले 5 साल से काम कर रही है।
यह कहानी उस दिन की है जब पापा 10 दिन के लिए दुबई गए हुए थे। मम्मी और मैं घर में अकेले थे। उस दिन सुबह मैं जब उठा तो घर में शांति थी।
मैंने नाइटी पहनी हुई मम्मी को किचन में काम करते देखा। उनकी नाइटी थोड़ी ट्रांसपेरेंट थी और उनकी ब्रा और पैंटी साफ दिख रही थी। मेरा लंड तो बस खड़ा होने ही वाला था कि तभी घर की घंटी बजी।
मम्मी ने दरवाजा खोला तो कामिनी खड़ी थी। आज कामिनी ने ब्लैक कलर का सूट पहना हुआ था जो उसके बदन पर एकदम फिट था। उसके चूचे ब्लाउज से बाहर आने को बेचैन थे और उसकी गांड तो जैसे मानो मांस के दो पहाड़ हों। मैं तो बस उसे देखता ही रह गया।
"आ गई कामिनी?" मम्मी ने पूछा।
"हां बहनजी, आज थोड़ी देर से आ गई।" कामिनी ने कहा।
"कोई बात नहीं, चल काम शुरू कर।" मम्मी ने कहा और किचन में चली गई।
मैं अपने रूम में चला गया और बाथरूम में जाकर मुठ मारने लगा। मेरे दिमाग में मम्मी और कामिनी की चुदाई के ख्याल आ रहे थे। जब मैं बाहर निकला तो कामिनी झाड़ू लगा रही थी।
वह झुकी हुई थी और उसकी गांड मेरे सामने थी। मैं उसे देखकर फिर से गर्म हो गया।
मैंने जानबूझकर उसके पास से गुजरते हुए उसे धक्का दिया। ये Maa Bete Ki Chudai Ki Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
"अरे बाबा, धीरे से।" कामिनी ने कहा।
"सॉरी, गलती से हो गया।" मैंने कहा और उसकी गांद को दबा दिया।
कामिनी ने कुछ नहीं कहा और अपना काम करती रही। मैं समझ गया कि वह भी मेरे से चुदना चाहती है। दिन भर मैं मौके की तलाश में रहा।
शाम को जब मम्मी नहा कर निकली तो वह टॉवल लपेटे हुई थी। उनका गीला बदन और बाल मुझे पागल कर रहे थे। मैंने देखा कि कामिनी भी उन्हें ऐसे ही घूर रही थी।
रात का खाना खाने के बाद, मैंने अपना प्लान एक्शन में लाने का फैसला किया। मैं जानता था कि सीधे तौर पर मम्मी पर अटैक करना आसान नहीं होगा, लेकिन कामिनी एक गरीब, भूखी औरत थी।
उसे थोड़े पैसे और थोड़ा अटेंशन देकर मैं उसे अपनी उंगली पर नचा सकता था। यही मेरी पहली स्ट्रेटेजी थी।
जब मम्मी अपने रूम में चली गईं, तो मैंने कामिनी को रसोई में बर्तन मांजते हुए देखा। मैं धीरे से पीछे से गया और उसके कान में फुसफुसाया, "कामिनी, तुम्हारा काम तो बहुत अच्छा है।"
वह करघते हुए मुड़ी और बोली, "शुक्रिया, बाबूजी।"
मैंने उसके कंधे पर हाथ रखा, जो गीला और नरम था। "नहीं, मैं सच कह रहा हूं। तुम बहुत मेहनती हो। मम्मी तुम्हें कभी-कभी तो डांट भी देती हैं, पर मुझे तुम पर गर्व है।" मेरे हाथ की गर्मी से उसका शरीर कांप गया।
"वो तो बस मेरा भला ही चाहती हैं," उसने सिर झुकाते हुए कहा, पर उसकी सांसें तेज हो गई थीं।
"मैं तुम्हारा एक तोहफा देना चाहता हूं," मैंने अपना हाथ उसकी पीठ से हटाकर उसके कूल्हे पर रख दिया और धीरे-धीरे सहलाने लगा।
"तुम्हारी इस मेहनत के लिए।" मैंने अपनी जेब से 500 के नोट निकाले और उसके हाथ में थमा दिए।
उसने पैसे देखकर आंखें चौड़ी कर लीं। "अरे नहीं बाबूजी, यह क्या कर रहे हैं आप? मैं तो बस अपना काम कर रही हूं।"
"यह तुम्हारे काम का पैसा नहीं है, यह मेरा दिल है," मैंने कहा और उसे और करीब खींचा। अब मेरा सीना उसकी पीठ से चिपक गया था। मैंने अपना एक हाथ आगे बढ़ाकर उसके पेट पर रखा और धीरे-धीरे ऊपर की ओर ले जाने लगा।
उसने मेरा हाथ पकड़ लिया, "बाबूजी, क्या कर रहे हैं आप? कोई देख लेगा।"
"कौन देखेगा, कामिनी? मम्मी सो गई हैं। और मैं तुम्हें बस इतना देखना चाहता हूं कि तुम्हारे ये चूचे कितने मस्त हैं।" यह कहते हुए मैंने जोर से उसके कमीज के ऊपर से ही उसके बूब्स दबा दिए।
"आह्ह्ह..." उसके मुंह से एक कामुक आवाज निकल गई। उसका विरोध कमजोर पड़ता जा रहा था।
मैंने मौके का फायदा उठाया और उसकी कमीज के हुक खोल दिए। अब वह सिर्फ ब्रा में थी। मैंने उसे मोड़कर सिंक के सहारे खड़ा कर दिया और पीछे से उसकी ब्रा का हुक खोल दिया।
उसके दोनों गोल-मटोल, गुलाबी निप्पल वाले चूचे आजाद होकर लहराने लगे।
"बाबूजी, यह गलत है... मैं एक गरीब औरत हूं... मेरा भला कीजिए..." वह फुसफुसाई, पर उसकी आवाज में वासना थी।
"मैं ही तुम्हारा भला करने आया हूं, कामिनी!"
मेरी बात सुनकर कामिनी का शरीर कांपने लगा। उसकी आंखों में डर और वासना दोनों थे। ये xxx Antarvasna Desi Sex Story आप garamkahani.com पर पढ़ रहे है।
वह एक तरफ गरीब, भयभीत औरत थी, जिसे अपनी इज्जत की चिंता थी, और दूसरी तरफ वह एक जवान, भूखी औरत भी थी, जिसे सालों से एक असली मर्द के स्पर्श की प्यास थी।
"बाबूजी, छोड़िए... मैं गलत हूं... आप मम्मीजी को बता देंगे..." वह रोते हुए बोली, पर उसकी आवाज में कमजोरी थी।
मैंने उसके बालों को खींचकर उसका सिर पीछे किया और उसके गले पर एक जोरदार किस कर दिया। "चुप, रंडी! आज से तू मेरी रखैल है। समझी?" मेरी आवाज में क्रूरता थी, जिससे वह और डर गई।
मैंने उसे जोर से सिंक के सामने झुका दिया। उसकी गांड मेरी तरफ उठी हुई थी। मैंने उसकी सलवार की नाड़ी पकड़ी और एक झटके में उसे उसके पैरों तक उतार दिया। अब वह सिर्फ पीले रंग की पैंटी में थी।
"नहीं... प्लीज... मेरी इज्जत रख लो..." वह फिर से बिलखी।
"इज्जत? तुझ जैसी कामवाली की इज्जत क्या होती है? तेरा काम है मेरा लंड चुसवाना और अपनी चूत मरवाना।" यह कहते हुए मैंने उसकी पैंटी भी फाड़ दी। उसकी चिकनी, गीली चूत मेरे सामने थी।
उसके बाल साफ थे, शायद उसने आज ही सफाई की थी।
मैंने अपना लंड बाहर निकाला, जो पूरी तरह से खड़ा और तना हुआ था। उसे देखकर कामिनी की सांस और तेज हो गई। मैंने उसकी चूत पर अपना लंड रखा और रगड़ने लगा।
"आह्ह्ह... बाबूजी... यह क्या कर रहे हैं आप... नहीं..." वह चिल्ला रही थी, पर उसकी चूत पानी छोड़ रही थी।
"चुप बिट्च, आज मैं तेरी इस चूत की ऐसी-तैसी करूंगा।" मैंने एक जोरदार धक्का दिया और मेरा लंड का सुपारा उसकी चूत में घुस गया।
"आआआअह्ह्ह... मर गई... छोड़ो... निकालो..." वह दर्द से चिल्लाई।
मैंने उसके मुंह पर हाथ रख दिया। "चुप, साली! अगर आवाज की तो मैं तुझे और ज्यादा दर्द दूंगा।" फिर मैंने एक और जोरदार धक्का दिया और आधा लंड उसकी चूत में घुसा दिया।
उसकी आंखों से आंसू निकल रहे थे, पर मैं नहीं रुका। मैंने उसे घोड़ी बना दिया और उसकी चूत में लंड पेलना शुरू कर दिया। पहले तो धीरे-धीरे, फिर तेज-तेज। उसकी चूत टाइट थी, शायद उसके पति ने काफी समय से चोदा नहीं था।
"आह... आह... आह..." उसके मुंह से दर्द और मजे की आवाजें निकल रही थीं।
"ले रंडी, ले मेरा लंड! कैसा लग रहा है? तेरी चूत को असली मजा मिल रहा है ना?" मैं चोदते हुए बोला।
"हां... आह... बाबूजी... और जोर से... फाड़ दो मेरी चूत... आह..."
मेरी बात सुनकर कामिनी का सारा डर वासना में बदल गया। अब वह चुदने का मजा ले रही थी। उसकी चूत पानी छोड़ रही थी और वह पीछे से धक्के लगा रही थी।
"हां... आह... बाबूजी... और जोर से... फाड़ दो मेरी चूत... आह..." वह चिल्ला रही थी।
मैंने उसकी चूत में अपना पूरा लंड घुसा दिया और तेजी से धक्के मारने लगा। उसकी चूचियां हवा में लहरा रही थीं। मैंने उसकी चूचियों को पकड़ा और जोर से मसलने लगा।
"आह्ह्ह... मर गई... और जोर से मसलो मेरे चूचे... आह..." वह चीख रही थी।
मैंने उसे उठाया और सिंक के सामने खड़ा कर दिया। अब मैं उसके पीछे खड़ा था और उसकी चूत में लंड पेल रहा था। मैंने उसके बालों को खींचकर उसका सिर पीछे किया और उसके गले पर किस करने लगा।
"कामिनी, तू मेरी रखैल है। समझी? जब मैं कहूंगा, तब तू मेरे पास आएगी और मैं तेरी चूत मारूंगा।" मैंने कहा।
"हां... बाबूजी... मैं आपकी रखैल हूं... आप जब चाहे मेरी चूत मार सकते हैं... आह..." वह बोली।
मैंने उसे घुमाया और उसके होंठों पर किस करने लगा। उसने भी मेरा साथ दिया और हम दोनों एक-दूसरे के होंठों को चूसने लगे। मैंने उसकी चूचियों को चूसना शुरू कर दिया।
"आह्ह्ह... चूसो... जोर से चूसो मेरे चूचे... आह..." वह चीख रही थी।
मैंने उसे उठाया और उसे सिंक पर बिठा दिया। अब मैं उसके सामने झुका हुआ था और उसकी चूत में लंड पेल रहा था। उसने अपने पैर मेरे कंधे पर रख लिए थे।
"आह्ह्ह... बाबूजी... मैं झड़ने वाली हूं... आह..." वह चिल्लाई।
"हां, झड़ जा, रंडी! झड़ मेरे लंड पर!" मैंने कहा और तेजी से धक्के मारने लगा। ये Hot Nonveg वाली Parivarik Chudai पर Based Hindi Sex Kahani आप गरम कहानी डॉट कॉम पर पढ़ रहे है।
थोड़ी ही देर में कामिनी झड़ गई। उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया और उसका शरीर ढीला पड़ गया। मैं भी झड़ने वाला था। मैंने अपना लंड उसकी चूत से निकाला और उसके मुंह पर अपना वीर्य छोड़ दिया।
"पी इसे, रंडी!" मैंने कहा।
कामिनी ने मेरा वीर्य पी लिया। फिर मैंने उसे उठाया और उसके कपड़े पहनाए।
"अब जाकर सो जा। कल से तू मेरी रखैल है।" मैंने कहा।
कामिनी शर्म से पानी-पानी होकर चली गई। मैं भी अपने रूम में आ गया। मेरा अगला टारगेट मम्मी थीं। मुझे पता था कि यह आसान नहीं होगा, पर मैं हार मानने वाला नहीं था।
अगले दिन सुबह मैं जब उठा तो कामिनी काम कर रही थी। वह मुझे देखकर शर्मा गई और सिर झुका लिया। मैं उसके पास गया और उसके गाल पर एक किस किया।
"कैसी है तू?" मैंने पूछा।
"मैं ठीक हूं, बाबूजी।"
"मैं ठीक हूं, बाबूजी।" कामिनी ने आंखें झुकाते हुए कहा, उसकी आवाज में एक अजीब सी घुटन और डर था।
मैं मुस्कुराया और उसके कान में फुसफुसाया, "ठीक है या फिर तुझे फिर से इसका प्यार चाहिए?" मैंने अपनी पैंट के ऊपर से अपना लंड दबाकर दिखाया।
कामिनी कांप गई और इधर-उधर देखकर फुसफुसाई, "नहीं बाबूजी, प्लीज... कोई देख लेगा। मम्मीजी जल्दी आ जाएंगी।" उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था।
"डर मत, मेरी रंडी। आज रात मैं तुझे फिर से चोदूंगा, पर अब जा और नाश्ता बना।" मैंने उसकी गांड पर एक तमाचा मारा और वह चौंककर भागकर रसोई में चली गई।
थोड़ी देर बाद मम्मी नींद से उठकर बाहर आईं। उन्होंने एक लाइट पिंक कलर की नाइटी पहनी हुई थी और उनके बाल खुले हुए थे। नींद की वजह से उनकी आंखें थोड़ी सूजी हुई थीं, पर वह बिल्कुल एक सेक्सी औरत लग रही थीं।
"सुबह अच्छी, मम्मी।" मैंने खुशमिजाजी होकर कहा और उनके पास जाकर सोफे पर बैठ गया।
"सुबह अच्छी, बेटा। इतनी जल्दी कैसे उठ गए?" उन्होंने मेरे सिर पर प्यार से हाथ फेरते हुए पूछा।
"आज अच्छा लग रहा है मम्मी। आप आज बहुत खूबसूरत लग रही हो।" मैंने कहा और उनकी तारीफ की।
मम्मी शर्मा गईं और मुस्कुराते हुए बोलीं, "बकवास मत करो। चलो, नाश्ता करो।"
"नाश्ता तो बाद में, पहले आपको एक गिफ्ट देता हूं।" मैंने अपना हाथ अपनी जेब में डाला और एक छोटा सा बॉक्स निकाला। यह एक खूबसूरत सा पेंडेंट था।
"यह क्या है, रोहित?" मम्मी ने आश्चर्य से पूछा।
"यह आपके लिए है, मम्मी। कल मैं बाजार गया था तो सोचा कि आपको गिफ्ट दूं।" मैंने कहा और उनके गले में पेंडेंट पहना दिया।
मम्मी बहुत खुश हुईं और उन्होंने मेरे गाल पर एक किस कर लिया। "थैंक यू, बेटा।"
मैंने उस किस को एक गले लगाने में बदल दिया। मैंने उन्हें कसकर अपनी बांहों में भर लिया। मेरा लंड जो पहले से ही खड़ा था, अब उनकी चूत से दब गया।
मम्मी कांप गईं और पीछे हटने की कोशिश की, पर मैंने उन्हें और कसकर पकड़ लिया। "रोहित, छोड़ो... यह क्या कर रहे हो?"
"कुछ नहीं मम्मी, बस आपसे प्यार कर रहा हूं।" मैंने कहा और उनके गाल पर एक किस किया।
"यह गलत है, रोहित। मैं तुम्हारी मां हूं।" उन्होंने कहा, पर उनकी आवाज में कमजोरी थी।
"आप मेरी मां हो, इसीलिए तो मैं आपसे प्यार करता हूं।" मैंने कहा और उनकी नाइटी के ऊपर से ही उनकी पीठ पर हाथ फेरने लगा।
आगे की कहानी : जल्द ही..
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