खेत में निकली माँ की चुदाई की चीखें 02
Family Antarvasna Stories : माँ की गांड फाड़ी 12 इंच लंड से! भूतनी की चीखें निकालीं, फिर हुई जोरदार गांड चुदाई! मम्मी बनी रंडी, खेत में रोजाना बेटे से चुदती!
अभी तक "खेत में निकली माँ की चुदाई की चीखें!" में आपने पढ़ा :-
मम्मी ने रोते हुए जवाब दिया, “कहाँ कुत्ते! वह तो बीस साल पहले ही फट चुकी है! तू तो बस चोद ले! मेरे दोनों छेद की सील खोलने वाले तो मर्द अलग थे।”
मैंने कहा, “कुतिया… उनके लंड से आगे की चूत मैं आज फाड़ने वाला हूँ तेरी!”
फिर मैं मम्मी को एक बेरहम कसाई की तरह चोदने लगा।
करीब पाँच मिनट बाद मम्मी मेरा साथ देने लगीं और “आह आह आह! और जोर से!” बोलने लगीं। मैं जितनी ताकत से चोदता, वे उतना ही जोर से चोदने को कहतीं। उनकी चीखें अब दर्द की जगह मजा लेने वाली हो गई थीं।
अब आगे :-
हम दोनों घमासान चुदाई में लगे हुए थे। मैं मम्मी की चूत को पूरी ताकत से पेल रहा था।
हर झटके के साथ मम्मी की मोटी जाँघें हिल रही थीं और उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ उछल-उछलकर एक-दूसरे से टकरा रही थीं।खेत की मेड़ पर मिट्टी उड़ रही थी। मम्मी अब पूरी तरह रंडी बन चुकी थीं।
वे अपने हाथों से अपनी चूत की फांकों को फैलाए हुए थीं ताकि मेरा मोटा लंड और गहराई तक घुस सके।
उनकी आवाज अब चीखों से भरी हुई थी – “आह… हाँ बेटा… और जोर से… फाड़ दे अपनी माँ की चूत… आह… मादरचोद… तेज… तेज!”
मैं पसीने से तर हो चुका था। करीब पौन घंटा हो गया था और मम्मी दो बार झड़ चुकी थीं। उनकी चूत से सफेद रस बह रहा था जो मेरे लंड पर चमक रहा था। तभी मम्मी ने कराहते हुए कहा, “कुत्ते! कितना चोदेगा? मेरी चूत में जलन होने लगी है… अब बस कर!”
मुझे लगा कि मेरा भी निकलने वाला है। मैंने कहा, “मेरी रंडी! मेरा पानी निकलने वाला है!”
मम्मी मदरफक का मजा लेती हुई बोलीं, “कुत्ते! अपने लंड का माल तो मुझे चखा दे… अंदर मत डालना!”
मैंने तुरंत लंड बाहर निकाला और मम्मी के रसीले मुँह में ठूंस दिया। उनके सिर को दोनों हाथों से पकड़कर मैंने उनका मुँह जोर-जोर से चोदा।
एक मिनट बाद मेरे लंड ने इतना ज्यादा वीर्य उगला कि मानो तीन लंड का माल एक साथ निकल रहा हो। मम्मी का मुँह पूरा भर गया। वे गटक-गटककर मेरा सारा माल पी गईं और फिर मेरे लंड को चाट-चाटकर साफ कर दिया।
दस मिनट तक हम दोनों वहीं मेड़ पर लेटे रहे। साँसें सामान्य होने के बाद मैंने पूछा, “कैसा लगा मेरा काम?”
मम्मी मुस्कुराते हुए बोलीं, “हाँ तो! तूने ऐसी चूत मारी है कि मेरी चूत फट गई! तूने मुझे चलने लायक नहीं छोड़ा!”
मैं हँसते हुए बोला, “अभी तो चूत ही फटी है… अभी गांड बाकी है!”
इतना सुनते ही मम्मी डर गईं। उनकी आँखों में डर साफ दिख रहा था। वे बोलीं, “एक बार चूत में लिया तो चूत फट गई! और कुंवारी गांड में लूँगी तो क्या होगा?”
मैंने चिढ़ाते हुए कहा, “कुंवारी? तुम तो कह रही थीं कि दोनों छेद खुल चुके हैं!”
मम्मी शर्माते हुए बोलीं, “खुल चुके हैं मतलब आम इंसान के लंड से… तेरे जैसे घोड़े छाप लंड से नहीं! मैं गांड में तेरा लंड नहीं ले पाऊंगी! मुझे मरना नहीं है!”
मैंने जैसे-तैसे चुम्मा-चाटी करके, प्यार से मनाते हुए और थोड़ा डरा-धमकाकर मम्मी को गांड मरवाने के लिए राजी कर लिया। इस बार मैंने फिर से मम्मी से लंड चूसने को कहा। वे आनाकानी करने लगीं।
मैंने गुस्से में कहा, “अबे गांडू औरत… बारह इंच को गांड में सूखा लेगी तो मर जाएगी! इसे चूस कर जितना ज्यादा गीला करोगी, दर्द उतना कम होगा!”
मम्मी ने हिम्मत करके कहा, “मैं दर्द में मरना चाहती हूँ! तू घुसा साले बिना चूसे!”
बस फिर क्या था… मैंने मम्मी को घोड़ी बनाया। उनकी मोटी गांड मेरे सामने उठी हुई थी। मैंने ढेर सारा थूक अपने मोटे काले लंड पर लगाया। फिर मम्मी की गांड के छेद पर भी थूका और उन्हें कुतिया की तरह झुका दिया।
मेरा लंड उनकी गांड पर सैट कर दिया। मम्मी की साँसें अटक गई थीं। जैसे मौत उनकी गांड पर खड़ी हो गई हो।
फिर मैंने अपने लंबे और मोटे लंड का सुपारा मम्मी की गांड के छोटे छेद में सैट किया और पूरी ताकत लगाकर एक ही झटके में पूरा लंड गांड में ठोक दिया!
अचानक हुए इस वार से मम्मी जोर से चिल्ला दीं – “हाय मम्मी… मर गईईईई!”
वे आगे की ओर गिर पड़ीं। मैं उनके ऊपर जा गिरा और मेरा लंड बाहर निकल गया। मैंने फोन की टॉर्च जलाकर देखा तो इस झटके से मम्मी की गांड से टट्टी निकल गई थी।
मम्मी की हालत बेहोशी जैसी हो गई थी। वे अपनी गांड पकड़कर तड़प रही थीं और बार-बार “हाय… हाय… फट गई…” कर रही थीं।
मैंने मम्मी को उठाया, पास के खेत में चल रहे पानी से उनकी गांड और टट्टी को अच्छे से धोया। फिर उन्हें पानी पिलाया। मम्मी का दर्द देखकर मैंने कहा, “चलो मम्मी, चलते हैं! फिर कभी कर लेंगे!”
मम्मी ने दर्द से कराहते हुए भी हिम्मत दिखाई और बोलीं, “मैंने 12 इंच लंड से अपनी गांड की टट्टी निकालने वाले बेटे को जन्म दिया है! मैं हार नहीं मानूँगी! तू तो बस फाड़ दे, चीर दे, चिथड़े-चिथड़े कर दे मेरी गांड के!”
मैं जोश में आ गया। मैंने मम्मी को उल्टा लिटाया और लंड फिर से गांड में सैट कर दिया। मम्मी ने दोनों मुट्ठियों में खेत की मिट्टी भींच ली और अपनी चुन्नी अपने मुँह में ठूंस ली ताकि चीख ज्यादा न निकले।
फिर मैंने अगले दो झटकों में आधा लंड ठोक दिया। मम्मी दर्द से बिना पानी की मछली की तरह तड़पने लगीं। वे चिल्लाईं – “ऊईईई… ऊईईई… मर गई… बचाओ बचाओ… मर गई बेटा… बाहर निकाल… बहुत दर्द हो रहा है… मुझे नहीं करवाना!”
मगर मैं नहीं माना। मैंने अगले ही जोरदार झटके में अपना पूरा १२ इंच का लंड मम्मी की गांड में ठूंस दिया। वे और जोर से चिल्लाईं – “ऊई बहन के लौड़े… मारेगा क्या? आराम से डाल न मादरचोद!”
मैंने पूछा, “रंडी, तेरी गांड फट गई क्या सचमुच?”
मम्मी की गांड सचमुच फट गई थी। इसकी गवाही मेरे लंड के सुपारे पर लगा खून बता रहा था। मैंने लंड बाहर निकालकर मम्मी को दिखाया और कहा, “देख रंडी, आज तेरी गांड फटी है!”
मम्मी कराहती हुई बोलीं, “आह कुत्ते… तूने मुझे कहीं का नहीं छोड़ा आज!”
मैंने मुस्कुराते हुए कहा, “अब तो तू गधे का लंड भी ले लेगी पूरा!”
मम्मी ने दर्द के बीच भी जवाब दिया, “तू साले किसी गधे के लंड से कमजोर लंड वाला है क्या?”
मैं हँस दिया और एक बार फिर से मैंने मम्मी की गांड में लंड ठोक दिया। मम्मी चाहकर भी कुछ नहीं कर पाईं। उनकी आँखों से आँसू बह रहे थे जो उनके दर्द को बयां कर रहे थे।
उधर मैं अपने लंड पर गुरूर करते हुए मम्मी की गांड की ठुकाई करने लगा। शुरू-शुरू में मम्मी की हालत बहुत खराब थी। वे दर्द से तड़प रही थीं, लेकिन दस मिनट बाद जब लंड की जगह बन गई तो मम्मी धीरे-धीरे गांड हिलाकर लंड अंदर लेने लगीं।
अब उनकी चीखें दर्द वाली कम और मजा वाली ज्यादा हो गई थीं। वे गालियाँ देने लगीं – “क्या हुआ बहन के लौड़े? चोद ना! इतना ही है तो अब तू घुस जा मेरी गांड में! बहन के लौड़े, पेल जोर से, हरामी, कुत्ते कहीं के!”
मैं गालियाँ सुनकर और भड़क गया। मैंने मम्मी की मोटी गांड पर जोर का थप्पड़ मारा और गांड फाड़ने में जुट गया। हर झटके में मेरा पूरा १२ इंच का काला हब्शी लंड मम्मी की गांड में घुस-घुसकर बाहर निकल रहा था।
मम्मी की गांड अब पूरी तरह फैल चुकी थी। उनकी गांड की दीवारें मेरे लंड को कसकर पकड़े हुए थीं। चूत से लगातार रस बह रहा था जो मेरे लंड को और चिकना बना रहा था।
मम्मी अब पूरी तरह कुतिया बन चुकी थीं। वे गांड उठा-उठाकर मेरे लंड का स्वागत कर रही थीं। उनकी आवाज गंदी-गंदी गालियों से भरी हुई थी – “हाँ मादरचोद… और जोर से… फाड़ दे अपनी माँ की गांड… आह… हाय… कितना मोटा है तेरा लंड… मेरी गांड अब तेरी हो गई… पेल… पेल… और तेज!”
हम दोनों घमासान चुदाई करते रहे। मम्मी की चीखें और कराहें खेतों में गूँज रही थीं। आसपास के जंगलों में पक्षी उड़-उड़कर भाग रहे थे। शायद उन्हें भी यकीन हो गया होगा कि आज किसी की मम्मी-बहन चुद रही है।
रात का अंधेरा, पहाड़ की तलहटी और भूतनी की अफवाह – सब कुछ हमारे पक्ष में था। कोई भी वहाँ आने की हिम्मत नहीं कर सकता था।
करीब आधा घंटा तक गांड मरवाने के बाद मम्मी का खड़ा रहना मुश्किल हो चुका था। उनकी टांगें काँप रही थीं। लेकिन मम्मी को पता था कि मैं जल्दी झड़ने वाला हूँ। इसलिए वे हिम्मत करके गांड उठा-उठाकर चुदती रहीं।
मैंने मम्मी की लंबी चोटी पकड़ ली और उनकी गर्दन पीछे खींच दी।
इस कारण मम्मी भड़क गईं और मुझे लगातार गंदी-गंदी गालियाँ देने लगीं – “साले हरामी… चोटी मत खींच… आह… लेकिन चोद तो जोर से… कुत्ते… तेरे लंड ने मेरी गांड बोरिंग पाइप बना दी… हाँ… और तेज… मेरा पानी निकलने वाला है!”
मुझे गालियाँ सम्मान जैसी लग रही थीं। मम्मी की टांगें बुरी तरह काँप रही थीं। फिर वे कुतिया बनकर हिम्मत से खड़ी हुईं। मैंने देखकर हँसा और कहा, “चाहे तुझ जैसी रंडी की चूत कितनी भी खुली हो, मेरा लंड झेलना आसान नहीं है!”
मम्मी दर्द और मजे के मिले-जुले स्वर में बोलीं, “तू जीत गया… मैं हार गई बेटे! अब झड़ जा… मेरी गांड भर दे अपने गर्म माल से!”
मैंने आखिरी जोर लगाया। पूरी ताकत से मम्मी की गांड में लंड ठोकता रहा। आखिरकार मेरा लंड फड़फड़ाया और मैं मम्मी की गांड के अंदर ही झड़ गया। गर्म-गर्म वीर्य की धार मम्मी की गांड में भर गई। मम्मी भी इसी के साथ तीसरी बार झड़ गईं। उनकी चूत से रस की फुहार छूट गई।
जैसे ही मैंने लंड बाहर निकाला, मम्मी की गांड से सफेद वीर्य और थोड़ा खून मिला हुआ निकला। मम्मी गिर पड़ीं और बेहोश हो गईं। आखिर इतना बड़ा लौड़ा उन्होंने अपने दोनों छेदों और मुँह में बेरहमी से झेला था।
पहली बार इतना मोटा और लंबा लंड गांड में लेने से बेहोशी तो आनी ही थी।
थोड़ी देर बाद मम्मी को होश आया। वे बहुत कमजोर लग रही थीं। मैंने उन्हें सहारा देकर उठाया। हम दोनों धीरे-धीरे घर की तरफ चल दिए। रास्ते में मम्मी बार-बार अपनी गांड पकड़ रही थीं और कराह रही थीं।
घर पहुँचकर हम चुपके से अपने-अपने कमरों में सो गए।
सुबह मेरे छोटे भाई ने कहा, “भैया, मुझे रात को भूतनी की बहुत जोरदार आवाजें सुनाई दीं! चीखें निकल रही थीं… ऊईईई… मर गई… जैसे कोई बहुत दर्द में हो!”
हम दोनों – मैं और मम्मी – उसकी बात सुनकर जोर से हँस पड़े। मम्मी मेरी तरफ देखकर शर्म से मुस्कुरा रही थीं। उनकी आँखों में अब शर्म के साथ संतोष भी था।
उस रात के बाद से मैं रोज मम्मी को चोदने लगा। कभी खेत में, कभी घर में जब भाई सो जाता, कभी रात को छत पर। मम्मी को मैंने पूरी तरह पॉर्नस्टार बना रखा है।
उनकी चूत तो पहले से ही खुली थी, लेकिन अब उनकी गांड 5 इंची बोरिंग पाइप बन चुकी है। वे खुद कहती हैं कि अब तेरे लंड के बिना मुझे नींद नहीं आती।
मैं उनकी बड़ी-बड़ी छातियाँ चूसता हूँ, उनके रसीले होंठ चूसता हूँ, उनकी मोटी गांड पर थप्पड़ मारता हूँ और फिर दोनों छेदों में बारी-बारी से अपना 12 इंच का हब्शी लंड घुसेड़ता हूँ।
मम्मी हर बार चीखती हैं, गालियाँ देती हैं, लेकिन अंत में मुझे कसकर जकड़ लेती हैं और कहती हैं – “बेटा… तू ही मेरा असली मर्द है… पापा से ज्यादा तू ही मुझे खुश कर सकता है।”
अब हम दोनों खेतों में पानी लगाने के बहाने अक्सर जाते हैं। वहाँ मेड़ पर मम्मी घोड़ी बन जाती हैं और मैं पीछे से उनकी गांड या चूत फाड़ता रहता हूँ। रात की चीखें अब भूतनी की आवाजें बनकर गाँव वालों को डराती रहती हैं, लेकिन असल में वे मेरी माँ की चुदाई की चीखें होती हैं।
दोस्तों, यह Family Sex Stories कैसी लगी? अगर Maa-Bete की और Gandi Chudai Kahani पढ़ना चाहते हो तो Story ❤️ लाइक करो और कमेंट में “NEXT” लिख दो!
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