पार्टी में बीवी बनी रंडी, दोस्त ने चोदा सबके सामने!


Cuck : ललिता को और बड़े लंड की चाहत होती है, पति उसे दोस्त अनुराग की पार्टी में ले जाता है जहां अनुराग उसे सबके सामने नंगा करके चोदता है और अपनी रंडी बनाता है!


अभी तक आपने  "हनीमून में मसाजर से चुदवाई सील पैक बीवी!" में पढ़ा :-


ललिता बिस्तर पर बेसुध पड़ी थी, करण का वीर्य उसकी जांघों पर धीरे-धीरे सूख रहा था। लेकिन यह तो बस शुरुआत थी। मेरी आंखों के सामने मेरी पत्नी को एक अजनबी ने जिस बेरहमी से रौंदा था, उसने मेरे भीतर के सोए हुए जानवर को जगा दिया था।


मैंने अपनी शर्ट उतारी और ललिता के चेहरे को सहलाते हुए कहा, "बेबी, अब मेरी बारी है।"


अब आगे :-












ललिता की आँखों में अभी भी हैरानी थी, लेकिन शरीर पूरी तरह जाग चुका था। मैंने करण को इशारा किया।


उसने ललिता को बिस्तर के किनारे पर किया और उसके दोनों पैरों को हवा में फैला दिया। करण पीछे से उसकी गांड के हिस्से को ऊपर उठाकर उसकी चूत को मेरे सामने कर दिया।


मेरा 6 इंच का लंड पूरी तरह पत्थर की तरह सख्त था। मैंने एक हाथ से ललिता के 34 साइज के स्तनों को भींचा और दूसरे हाथ से अपना लंड उसकी गीली और सूजी हुई चूत के मुहाने पर रखा।


जैसे ही मैं अंदर गया, ललिता ने एक लंबी आह भरी। करण पीछे से उसकी गर्दन चूम रहा था और मैं सामने से उसे ठोक रहा था। कुछ ही देर बाद, करण ने अपनी उंगलियां ललिता की गांड के छेद में डाल दीं। वह ऊपर-नीचे से घिरी हुई थी।


उस रात हम दोनों ने बारी-बारी से उसे तब तक चोदा जब तक कि वह पूरी तरह निढाल होकर सो नहीं गई।


अगले दिन सुबह जब ललिता उठी, तो उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। अब उसे किसी अजनबी से शर्म नहीं आ रही थी। हमने होटल का दरवाज़ा अंदर से लॉक कर दिया और 'डू नॉट डिस्टर्ब' का बोर्ड लगा दिया।


करण ने आज ललिता को नहलाने का जिम्मा लिया। बाथरूम में फव्वारे के नीचे, करण का 10 इंच का लंड एक बार फिर ललिता की चूत में गपा-गप उतर रहा था।


ललिता दीवार का सहारा लेकर खड़ी थी और करण पीछे से उसे बेरहमी से चोद रहा था। मैं बाहर सोफे पर बैठकर यह सब देख रहा था।


दोपहर होते-होते खेल और गहरा गया। हमने ललिता को बीच में लिटाया। करण ने अपना लंड ललिता के मुंह में डाल दिया और मैं उसकी चूत मारने लगा। ललिता अब एक अनुभवी रंडी की तरह व्यवहार कर रही थी। वह करण के काले लंड को ऐसे चूस रही थी जैसे आइसक्रीम हो।


जब करण का लंड उसके हलक तक जाता, तो उसकी आँखें फट जातीं। शाम तक ललिता का भोसड़ा इतना ढीला और गीला हो चुका था कि करण का पूरा 10 इंच का मूसल बिना किसी रुकावट के अंदर-बाहर हो रहा था।


दार्जिलिंग की उस तीसरी शाम, कमरे का माहौल पूरी तरह से कामुकता और पसीने की गंध से भर चुका था। ललिता अब तक की चुदाई से अधमरी हो चुकी थी, लेकिन मेरे और करण के भीतर का जानवर अभी शांत नहीं हुआ था।


मैंने करण की आँखों में देखा और उसे इशारा किया—आज उसकी गांड की सील तोड़नी थी।


करण ने ललिता को बिस्तर के किनारे पर पेट के बल लिटाया और उसकी सुडौल गांड को ऊपर की ओर उठा दिया। ललिता समझ गई थी कि अब क्या होने वाला है।


वह डर के मारे कांपते हुए बोली, "अंशुल, नहीं... वहाँ नहीं... बहुत दर्द होगा, वह बहुत मोटा है।"


लेकिन करण ने उसकी एक न सुनी। उसने ढेर सारा जैस्मिन ऑयल ललिता की गांड के छेद पर डाला और अपनी उंगलियों से उसे फैलाना शुरू किया। जैसे ही करण की मोटी उंगली अंदर गई, ललिता दर्द से कराह उठी।


फिर करण ने अपना 10 इंच का फौलादी लंड हाथ में पकड़ा, जो खून की तरह लाल और पत्थर जैसा सख्त हो चुका था। उसने लंड का सुपाड़ा ललिता की गांड के तंग छेद पर टिकाया और एक हल्का दबाव दिया।


ललिता चिल्लाई, "आह्ह्ह! मर गई... बचा लो अंशुल... फट रही है मेरी!"


अब दोनों तरफ से चुदाई :-


तभी मैं उसके सामने आया और अपना लंड उसकी चूत के मुहाने पर सटा दिया। मैंने उसके दोनों हाथों को मजबूती से पकड़ लिया। अब वह दोनों तरफ से घिरी हुई थी।


करण ने कमर का एक जोरदार झटका मारा और अपना आधा लंड उसकी गांड के भीतर उतार दिया। ललिता की एक ऐसी चीख निकली जो शायद पूरे होटल में गूँज गई होगी।


उसकी आँखों से आंसू टपकने लगे और उसका पूरा शरीर अकड़ गया। "आह्ह्ह्ह्ह! अंशुल... निकालो इसे... फाड़ दिया उसने... मेरा भोसड़ा और गांड दोनों खत्म हो गए... आह्ह्ह!"


उसी वक्त, मैंने भी अपनी पूरी ताकत से अपना लंड उसकी चूत में जड़ तक उतार दिया। अब ललिता के शरीर के दोनों छेद पूरी तरह से भरे हुए थे। करण पीछे से उसकी गांड मार रहा था और मैं सामने से उसकी चूत।


कमरे में 'चप-चप' और 'थप्प-थप्प' की मिली-जुली आवाज़ें एक खौफनाक संगीत पैदा कर रही थीं।


करण ने अब अपनी रफ्तार बढ़ा दी। वह बेरहमी से धक्के मार रहा था, जिससे ललिता की गांड की खाल खिंच रही थी। हर धक्के के साथ करण का 10 इंच का मूसल उसकी बच्चेदानी तक वार कर रहा था।


उसका चेहरा तकिये में धंसा हुआ था, उसकी सिसकियाँ अब केवल गले की घराहट बनकर रह गई थीं। वह बस इतना ही बोल पा रही थी, "ओह... फाड़ डालो मेरी चूत गांड... आह... और जोर से... फाड़ दो मेरी गांड!"


जैसे ही करण पीछे खींचता, मैं आगे धक्का मारता। ललिता का शरीर एक खिलौने की तरह हमारे बीच झूल रहा था। उसके 34 के दूध बोबे बिस्तर पर बुरी तरह दब और रगड़ रहे थे।


करीब आधे घंटे तक चले इस चुदाई के खेल के बाद, करण का सब्र जवाब दे गया। उसने ललिता की कमर को कसकर पकड़ा और आख़िरी पाँच-छह धक्के इतनी ताकत से मारे कि ललिता के मुँह से आवाज़ तक नहीं निकली।


करण ने अपना सारा गरम वीर्य ललिता की गांड के गहरे हिस्से में ही छोड़ दिया। उसी पल मैंने भी अपना डिस्चार्ज उसकी चूत के भीतर खाली कर दिया।


ललिता निढाल होकर गिर पड़ी। उसकी गांड और चूत दोनों से वीर्य और चिपचिपा पानी बाहर बह रहा था। उसके दोनों छेद बुरी तरह सूजकर लाल हो चुके थे।


तीन दिनों का वह खेल उस रात अपने चुदाई और कामुक अंजाम तक पहुँचा। मेरी Cuckold Fantasy ने ललिता को पूरी तरह से एक कामुक रंडी में बदल दिया था।


इसके बाद की स्टोरी में लिखूंगा।


लेकिन यह सिर्फ शुरुआत थी। दार्जिलिंग से लौटने के बाद, ललिता पूरी तरह बदल चुकी थी।


वह अब वो शर्मीली लड़की नहीं थी जो किसी अजनबी की बात से लज्जित हो जाती थी। अब उसकी आँखों में एक नई भूख थी—एक ऐसी भूख जो मेरे 6 इंच के लंड से कभी नहीं बुझ सकती थी।


हम मध्यप्रदेश लौट आए। शुरुआती कुछ दिन तो सब ठीक रहा, लेकिन मैं देख सकता था कि ललिता कुछ खोज रही है।


वह अक्सर रात में सोते समय मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर फुसफुसाती, "काश... ये भी करण जैसा होता।" यह सुनकर मेरे अंदर का जानवर तो खुश होता था, पर मेरा अहंकार थोड़ा ज़रूर चुभता था।


एक दिन मैंने उसे पूछा, "क्या बात है बेबी? तुम्हें क्या चाहिए?"


उसने शर्म से मेरी आँखों में देखा और धीरे से बोली, "अंशुल, मुझे वो... वो अहसास फिर चाहिए। करण वाला।"


मेरे दिमाग़ में एक नया प्लान आया। मैंने उसे अपनी बाहों में भरा और कहा, "तुम्हारी हर इच्छा पूरी होगी मेरी जान। बस तुम मेरे पर भरोसा रखो।"


अगले हफ्ते, मैंने एक नया जाल बुना। मैंने अपने एक दोस्त अनुराग से बात की। अनुराग मेरा कॉलेज दोस्त था और अब एक बड़ी कंपनी में मैनेजर था। वह भी एक कामुक इंसान था और अक्सर मुझे अपनी सेक्स कहानियां सुनाता था।


मैंने उसे कॉफी पर बुलाया और सीधे बात की। "अनुराग, मुझे तुम्हारी ज़रूरत है।"


अनुराग हैरान हुआ, "मेरी? क्यों, क्या बात है?"


मैंने उसे सारी कहानी सुनाई—दार्जिलिंग, करण, और मेरी ककल्ड फैंटेसी। शुरू में तो वह दंग रह गया, पर फिर उसके चेहरे पर एक मस्ती की मुस्कान आ गई।


"यार अंशुल, तुम तो कमाल करते हो। तुम्हारी बीवी इतनी माल है और तुम उसे दूसरों से चुदवाना चाहते हो। वाह!" वह बोला।


"तो तुम मदद करोगे?" मैंने पूछा।


"क्यों नहीं? पर मेरी एक शर्त है।" उसने कहा।


"शर्त वो क्या?"






अनुराग ने मेरी आँखों में देखा और एक हावी मुस्कान के साथ बोला,


"मैं तुम्हारी बीवी को चोदूँगा, पर मेरे तरीके से। मैं चाहता हूँ कि वह मेरी रंडी बने, मेरी गुलाम। तुम्हें सब कुछ देखना होगा, पर हस्तक्षेप नहीं करना। और हाँ, मैं उसे अपने साथ भी ले जाऊँगा कुछ दिनों के लिए।"


मेरे दिमाग़ में बिजली सी दौड़ गई। यह तो मेरी फैंटेसी से भी कहीं आगे था। मेरा लंड तो सुनकर ही खड़ा हो गया था। मैंने सोचा, यह तो मौका है ललिता को और भी बेशरम बनाने का।


मैंने एक गहरी सांस ली और कहा, "डील फाइनल है। पर तुम्हें उसे तैयार करना होगा। मैं एक प्लान बनाऊंगा।"


अनुराग ने मुस्कुराते हुए कहा, "मैं इंतज़ार करूँगा।"


उस रात मैंने ललिता को अपनी बाहों में लिया और उसे चूमने लगा। वह गर्म हो गई और मेरे लंड को सहलाने लगी। मैंने उसके कान में फुसफुसाया, "बेबी, कल हम एक पार्टी में जा रहे हैं। अनुराग की।"


ललिता ने चौंककर मुझे देखा, "अनुराग? वो तुम्हारा दोस्त?"


"हाँ, और वही तुम्हारी अगली चुदाई करेगा।" मैंने सीधा कह दिया।


ललिता का चेहरा लाल हो गया। उसने मेरी छाती पर सिर रख दिया और धीरे से बोली, "मुझे डर लग रहा है।"


मैंने उसके बालों में हाथ फेरते हुए कहा, "डर मत। मैं हूँ ना। बस एन्जॉय करो। तुम्हारा भोसड़ा तो अब बड़े लंड के लिए तैयार है।"


अगले दिन, मैंने ललिता को एक बहुत ही सेक्सी ड्रेस पहनाई। वह एक ब्लैक कलर की डीप नेक ड्रेस थी जिसमें उसके 34 के दूध बोबे बुरी तरह दिख रहे थे और पीछे से उसकी गांड का उभार देखकर किसी भी मर्द का लंड खड़ा हो जाए।


जब हम अनुराग के फार्महाउस पहुँचे, तो वहाँ लगभग 15-20 लोग थे। सब अनुराग के दोस्त थे। अनुराग ने ललिता को देखते ही आँखें निकाल लीं। वह सीधा हमारे पास आया और ललिता का हाथ पकड़कर चूम लिया।


"वाह अंशुल, तुमने तो असली खज़ाना छुपाया था।" अनुराग बोला।


मैं मुस्कुराया।


अनुराग ने ललिता को एक ड्रिंक ऑफर की। ललिता ने मना किया, पर मैंने कहा, "लो बेबी, थोड़ी रिलैक्स हो जाओ।"


ललिता ने एक घूंट लिया और खांसने लगी। अनुराग ने उसकी पीठ थपथपाई और अपना हाथ उसकी कमर पर रख दिया। ललिता ने कुछ नहीं कहा।


धीरे-धीरे, पार्टी का माहौल गर्म होने लगा। सब नाच रहे थे और ड्रिंक कर रहे थे। अनुराग ने ललिता को डांस के लिए बुलाया। वह थोड़ी शर्मा रही थी, पर मेरे इशारे पर मान गई।


अनुराग ने ललिता को अपनी बाहों में ले लिया और डांस शुरू हो गया।


धीरे-धीरे अनुराग ने ललिता को अपनी बाहों में ले लिया और डांस शुरू हो गया। धीरे-धीरे वह उसे काफी क्लोज़ ले गया। उसने अपना एक हाथ ललिता की पीठ पर रखा और दूसरा हाथ उसकी कमर पर।


डांस के बहाने, वह अपना लंड ललिता की चूत पर रगड़ रहा था। ललिता शर्म से पानी-पानी हो रही थी, पर मैं देख सकता था कि वह भी एन्जॉय कर रही थी।










फिर अनुराग ने एक बोल्ड स्टेप उठाया। डांस के दौरान, उसने अपना हाथ ललिता की ड्रेस के अंदर डाल दिया और सीधा उसकी चूत पर रख दिया। ललिता ने एक झटके से उसे धकेलने की कोशिश की, पर अनुराग ने उसे और कसकर पकड़ लिया।


"शांत हो जाओ मेरी रानी, आज तुम मेरी हो।" अनुराग ने उसके कान में फुसफुसाया।


मैं दूर से यह सब देख रहा था और मेरा लंड तन गया था। मैंने देखा कि ललिता अब अनुराग का विरोध नहीं कर रही थी। वह उसके स्पर्श में खो गई थी।


अनुराग ने ललिता का हाथ पकड़कर उसे एक कोने में ले गया जहाँ कम रोशनी थी। वहाँ उसने ललिता को किस करना शुरू कर दिया। उसने उसके बोबे दबाने शुरू कर दिए और फिर धीरे से उसकी ड्रेस को ऊपर उठा दिया।


ललिता ने धीरे से कहा, "यहाँ नहीं, कोई देख लेगा।"


"देखने दो, मैं तो सबको दिखाऊँगा कि तुम कितनी कमीनी रंडी हो।" अनुराग ने कहा।


फिर उसने अपना लंड निकाला और ललिता को उसे चूसने को कहा। ललिता ने पहले मना किया, पर जब अनुराग ने उसके बाल पकड़कर ज़ोर से खींचा, तो वह मान गई। वह घुटनों के बल बैठ गई और अनुराग का 8 इंच का मोटा लंड मुँह में ले लिया।


मैं वहाँ से कुछ दूरी पर खड़ा था और यह सब देखकर मेरा तो बुरा हाल था। मेरा 6 इंच का लंड पैंट में फड़फड़ा रहा था।


थोड़ी देर बाद, अनुराग ने ललिता को उठाया और उसे एक सोफे पर लिटा दिया। उसने उसकी ड्रेस पूरी उतार दी। अब ललिता सिर्फ अपनी ब्रा और पैंटी में थी। अनुराग ने उसकी ब्रा और पैंटी भी फाड़ दी।


अब ललिता पूरी तरह से नंगी थी और उसका शरीर सबके सामने था। कुछ लोग उन्हें देखकर हैरान थे, पर कुछ तो यही चाहते थे।


अनुराग ने अपनी पैंट उतारी और अपना लंड ललिता की चूत पर रख दिया। उसने एक ज़ोरदार धक्का दिया और अपना पूरा लंड ललिता की चूत में घुसा दिया।


"आह्ह्ह... अनुराग... धीरे... मुझे दर्द हो रहा है।" ललिता चिल्लाई।


"चुप कर रंडी, आज तुझे चोद-चोद कर रख दूँगा।" अनुराग ने कहा और उसे और तेज़ चोदने लगा।


जब अनुराग ललिता को चोद रहा था, तब उसके दोस्त भी आ गए। एक ने अपना लंड निकाला और....


आगे की कहानी दूसरे स्टोरी में! 
















← Previous Story

Share This Story :  

🎲 Feeling Lucky? Read a Random Story

यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-

📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!