दिवाली की रात में माँ चोद के हनीमून मनाया 02

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Hindi Family Sex Story : कैसे मेरी प्यासी माँ की Antarvasna ने दिवाली पर अपने बेटे साथ हनीमून मनाने के लिए सिनेमा हॉल चुना जहां उसकी जमकर चुदाई हुई! पढिए इस Antarvasna Sex Story में!


पिछले भाग 'दिवाली की रात में माँ चोद के हनीमून मनाया!' में मैं और मेरी इशानी माँ अपने हनीमून मनाने के लिए होटल पहुंच गए थे अब जाने के उसके बाद क्या हुआ।


घर से गाँव के लिए निकालने के बाद हमने एक होटल मैं चेक इन करा और पूरा पेमेंट कैश में करा ताकी पापा को कुछ न पता चले। होटल के कमरे में जाकर मैने माँ को दबोच लिया! मैने उनके होठों को खूब चूसा


मगर माँ बोली "मुझे चार दिवारी में सुहागरात नहीं मनानी है।" इसलिए दिवाली की रात की खासियत तो बाद में शुरू हुई जो अब में आपको बताने जा रहा हूं।


इशानी ने मस्त मैरून रंग की साड़ी पहन रखी थी, उसकी गांड़ बिल्कुल मटके जैसी लग रही थी मन कर रहा था की खा जाऊं। हमने सुहागरात मनाने के लिए मूवी हॉल चुना।


करीब 10 बजे हम होटल से मूवी देखने के लिए निकले, वो मेरे आगे चल रह थी उनकी पीठ बिल्कुल नंगी दिख रही थी।


कुछ ही देर में हम अपनी कार में बैठ गए, मैने गाड़ी चालू की मेरी इशानी मुझे घूरे जा रही थी।


वो बिल्कुल जंगली बिल्ली जैसी खूंखार लग रही थी, मैने उसे देखा तो वो अपने होठ काट रही थी मैं गाड़ी चलाने पर फोकस कर रहा था।


इशानी ने मेरी पेंट की ज़िप पर हाथ रखा वो अपनी नशीली आँखों से मुझे देख रही थी धीरे धीरे चलती गाड़ी में ही वो मेरे करीब आई और मेरे 7 इंच के लन्ड को निकाल कर चूमने चूसने लगी।


आआह! उज्ज्फ! क्या मज़ा आया।


हमममम! इशानी। मेरे मुंह से सिसकारी निकली।


उन्होंने खूब ज़ोर दे मेरे लन्ड को चूस वो प्यार से हल्के हल्के लैंड को काट रही थी।


सिनेमा हॉल तक जाते जाते मेरा रस उनके मुंह में ही निकल गया ,मैने हाथ से उनके सर को लन्ड पर दबाया और कार में बैठे बैठे ही 3 धक्के उनके मुंह में लगाए।


माँ मेरा सारा माल गटक गई, जब हम सिनेमा हॉल पहुंचे तो मैने गाड़ी पार्किंग में लगाई।


मैं अपनी पेंट ठीक करता हुआ बाहर निकला इशानी अपने रुमाल से होठों पर लगे मेरे रस को साफ करते हुए निकली। ये Family XXX Desi Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


मैने रागिनी एम एम 2 की दो कोने वाली टिकटे ली, और हम हॉल में जाने लगे। मेरा इरादा कुछ और था मगर इशानी को सुहागरात सिनेमा हॉल में मनानी थी।


जब भी हम किसी अंधेरे हिस्से में पहुंचते तो मैं अपनी माँ की गांड़ दबा देता इशानी भी मेरे कमर में हाथ डाले अपने मोटे मोटे बूबे सीने से लगा रही थी।


थोड़ी देर में हम अपनी अपनी सीट पर बैठे, मैं और वो कोने में थे सामने फिल्म में जैसे ही किसिंग सीन शुरू हुए यहां कोने में हम माँ बेटों ने अपनी फिल्म बनानी शुरू कर दी।


सामने चलती स्क्रीन की रोशनी में हमें कोई भी देख सकता था। 


मैने इशानी को कोने में डाल रखा था खुद आगे की तरफ बैठकर उनको छुपा रहा था, पूरे हॉल में सिर्फ छः लोग थे, सबसे आगे एक अंकल जी थे जो करीब सो चुके थे।


हम दोनों माँ बेटे एक दूसरे की आँखों में प्यार से देख रहे थे।


धीरे धीरे हमारे होठ क़रीब आने लगे फिर होठों के चूमने का हसीन सिलसिला शुरू हुआ मैं उनकी ब्रा के पास हाथ फेरने लगा, इशानी माँ बालों में हाथ घूमा रही थी। उम्मम! मम्माह! बेटा हमममम! की आवाज़ें मुझ तक आ रही थी।


वो पूरी मस्ती से अपनी जीभ मेरे मुंह में देकर चुसवा रही थी, ये नज़ारा देखकर किसी का भी लन्ड तन जाता फिर मैने अपने होठ अलग करे और अपनी माँ की गर्दन को चूमने लगा, चूमते चूमते उनके मस्त गदराय चूचों पर पहुंचा।


इशानी बालों के साथ खेलते खेलते गर्म हमममम ससईस वाली आहे भरने लगी


उनके मुंह से निकला "यार अगर तेरे बाप की ट्रिप कैंसिल न हुई होती तो हम आराम से घर पर मौज लेते, वो सोच रहे होंगे इशानी सौरभ को लेकर घर गई है, बेचारा।" 


मैने इशानी की ब्रा खोलना शुरू की, वो अपने बेटे की पेंट पर हाथ रखकर लन्ड सहलाने लगी।


मेरे लन्ड की हालत खराब होने लगी थी मैं अपनी सीट से उठा और लगभग अपनी माँ के ऊपर लेट गया।


मेरे लन्ड की सख्ती आसमान छू गई क्या मस्त गोरे चूंचे थे स्क्रीन लाइट में बिल्कुल चाँद जैसे चमक रहे थे।


इशानी के निप्पल भी गुलाबी थे मैने अपनी माँ के चूंचे पीने शुरू करे, मेरा एक हाथ सरकता सरकता उनकी साड़ी के अंदर जा रहा था उनकी


आआअह! हमममम, ऑफ बेटा आराम से तेरे लिए ही है सब! मस्त आहे मेरे कानो में सुनाई दे रही थी।


चूंचे पीते पीते मैने माँ की पैंटी उतारदी फिर एक हाथ बूब पर रखकर दबाता हुआ पेट पर चूमता गया।


 फिर धीरे धीरे पेट से नीचे उतरा अब दोनों हाथ उन मोटे मोटे चूचों पर गढ़ा दिए टांग को चूमते हुए फिर साड़ी के अंदर चला गया।


अआह! हमममम! बेटा , आराम से! 


हाआअ! खा जाएगा क्या! 


इशानी ज़ोर की आहे ले रही थी।


वो मुझे अपने ऊपर खींचती हुई अपने चूंचे मसल रही थी अपने होठ दांतों में दबाकर मुझे तरसा रही थी।


करीब 10 मिनट चूत चखने के बाद मैं उठा और पेट को चूमते हुए वापस चूंचे पीने आया। इशानी की आँखें बंद हो गई,


हम! आगाह! ओह सौरभ, बेटा अब नहीं रहा जारा! अपनी माँ को शांत कर दे।


मैं उठा और लन्ड बाहर निकाल कर अपनी माँ के चूचों में रगड़ने लगा, फिर इशानी माँ ने लन्ड पकड़ा अपना एक हाथ मेरी की गांड़ पर रखकर लन्ड को चूमने लगी।


इशानी ने मुझे देखकर एक आँख मारी और मुझे देखते देखते पूरा 7 इंच का सख्त लौड़ा मुंह में लेती चली गई।


उन्होंने आँखें बंद की मैं बस


आह ओह माँ!


आआह yes आह! 


कहता हुआ उनके बाल सहलाने लगा अपनी माँ का सर पकड़ा और मुंह चोदने लगा।


इशानी ने दोनों हाथ मेरी गांड़ पर दबा दिए फिर एक उंगली गांड़ के अंदर डाल दी, मेरा लन्ड बस फटने को हुआ उनकी इस हरकत के साथ ही मुझे अलग चरमसुख मिल रहा था।


इतने में पीछे से एक छोटी कद की लड़की और उससे दुगनी लंबाई का लड़का उठकर बाहर निकले।


जाते जाते वो बोल रहे थे कि "इंटरवल से पहले नहीं निकले तो बहुत देर हो जाएगी।"


ये सुनकर मैने अपना लन्ड पूरी तेज़ी से अपनी माँ में मुंह में डाल कर चोदना शुरू कर दिया।


न्ग्गाह गाहग़ हमममम की कुछ आवाज़ो के बाद लन्ड का पानी उनके मुंह में ही निकल गया।


मैं तो थोड़ा शांत हो गया मगर वो हवस की आग में जलने लगी। ये Antarvasan Hindi Sex Kahani आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


इतने में इंटरवल हो गया रात का समय था पूरे हॉल में बस चार लोग थे। 


हमने कपड़े ठीक करे मैं जाकर पॉपकॉर्न ड्रिंक्स वगैरह लेकर आया, कुछ देर बाद इंटरवल खत्म हुआ।


हम माँ बेटे ने भी खाना पूरा किया फिर लाइट बंद हो गई।


कुछ देर तक तो कुछ नहीं हुआ फिर मैने जेब से एक चॉकलेट निकाली इशानी के चूंचे पर से पल्लू हटाया और निप्पल पर चॉकलेट लगाई


फिर थोड़ी चॉकलेट उनके खूबसूरत होठों पर लगाई, फिर उनके पेट पर लगाई , फिर अपने लन्ड पर लगाई। एक एक कर के मैने पहले होठों से चॉकलेट को चखा माँ भी पूरा साथ दे रही थी।


वो वासना के हाथ से अपने बेटे के लन्ड को सहला रही थी, मैं अपनी जीभ से सहलाता हुआ गर्दन से चूचों पर आया और निप्पल से चॉकलेट साफ करने लगा, मेरा लन्ड खुली हवा में खड़ा हुआ था।


अब समय ज़्यादा नहीं बचा था। मैने अपनी माँ को खड़ा करा और खुद उनकी जगह बैठ गया, फिर मेरे मुंह पर माँ पीठ कर के खड़ी हो गई।


मैने उनकी गांड़ को पकड़ा और वो मेरी गोद में अपनी मोटी गांड़ टेक कर बैठ गई।


मैने आँखें बंद करली मैं मस्ती से अपनी माँ के जिस्म को महसूस करने लगा मैं पेट से चूचों तक और चूचों से गले तक अच्छे से उनका जिस्म मसलता रहा। इशानी माँ कामुक आहे भर रही थी।


उनकी अआह हम्मम! मेरे बेटे ओह!


तू न होता तो मेरा क्या होता जान!


आआह हमममम मैं तुझे हमेशा खुश रखूंगी।


तेरे लिए शानदार लड़की लाऊंगी जिसे हम दोनों चोदेंगे!


उन्होंने मेरे लन्ड को साड़ी के अंदर चूत में सेट करा और उस चॉकलेट वाले लैंड को अंदर लेती चली गई।


फिर मस्त आहे आगाह! ओह बेटे तेरा लन्ड आआह!


यूएफफफ! आआह! मेरी जान।


मस्त लन्ड है तेरा आगाह! कहकर मुझे उत्तेजित करने लगी।


मैं पूरी ताकत से अपनी माँ के चूंचे मसल रहा था, माँ गांड़ उठा उठा के लन्ड ले रही थी, वो तेज़ी से उछलने लगी।


अआह आआह! मैं उनकी पीठ चूमता रहा। 


ऊंह उम्मम माँ आआह!


ओह ! अआआह बेटा ! आगाह


मैं जितनी बार उनको माँ कहता वो और ज़्यादा जोश दिखाने लगती।


हम दोनों मस्त अहो में खोए हुए थे, मेरी आँखें चरमसुख के मारे बंद पड़ी थी।


आगाह! उफ्फ! आगाह


हमममम ! आअआआअह!


इशानी मुझे देखकर और ज़ोर से अपनी चुदाई करवाने लगी। 


वो पूरी उतावली हो गई थी अपनी गांड़ को इस तरह लन्ड पर घिस रही थी के पीस डालेगी, मेरी आँख खुली तो।


सामने फिल्म का क्लाइमैक्स आ गया था, इधर मेरा क्लाइमैक्स आ गया था और इशानी का भी क्लाइमैक्स आ गया था।


आआह! ऊऊह! हमममम!


आगाह! अआआह! ओह!


उफ्फफ! 


पूरे हॉल में हमारी आहे घूम रही थी। मैं माँ के चूंचे मसल रहा था, नीचे से पूरे जोश में घपाघप धक्के लगा रहा था।


माँ अपनी पूरी तेज़ी से उछल रही थी।


मैं उनके पेट पर से चॉकलेट लेकर खाता और उनके होठों पर लगाता फिर इशानी मेरी उंगली चूसती।


वो मुझे देखते हुए आगाह! अआह!


बेटा अआह! मेरे बच्चे ! आआह चोद बेटा!


अआआह! और ज़ोर से अआह!


मैने फिर अपनी माँ के चूंचे ज़ोर से भींचे के उनकी आअआआअह चीख निकल गई। ये Antarvasna Chudai ki Kahani कहानी आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


करीब बीस मिनट मस्त चुदाई के बाद मैं अपनी माँ की चूत में ही झड़ गया मैं लगातार उनकी पीठ को चूम रहा था।


जैसे ही माँ झड़ी वो मेरे ऊपर गिर गई।


हम बुरी तरह हाँफ रहे थे हम दोनों अपने अपने चरमसुख को पा चुके थे।


पता नहीं क्यों अचानक आगे बैठे अंकल तिलमिला कर उठे तो हम छुप गए। उस अंकल ने थोड़ा चीखा तो जल्दी जल्दी हम ने कपड़े पहने और अंजान बनते है हुए हॉल से निकल गए।


पार्किंग में मैं जब अपनी गाड़ी के पास आया तो इशानी मेरी गांड़ दबाते हुए कार में घुसी और दोनों एक दूसरे के होठ चूमते हुए वहां से चले गए। 


इस कहानी को पढ़ने का एक दूसरा एंगल भी है उसके लिए आप को  “सिनेमा हॉल में हुई माँ बेटे की चुदाई!”  कहानी पढ़नी होगी।


तो बताए दोस्तो कैसी लगी आपको ये लाइव माँ बेटे की चुदाई की कहानी? मुझे नीचे कॉमेंट बॉक्स में कॉमेंट करके ज़रूर बताए।


आपका गरम कहानी लेखक कामुक हाशिम लायन!


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📝 Comments :

Jb koi bhi beta maa ko chodta hai to uska josh 10 guna badh jaata hai.