दिवाली की रात में माँ चोद के हनीमून मनाया!

diwali-ki-raat-me-maa-chod-ke-honeymoon-manaya

Hindi Family Sex Story : कैसे एक जवान प्यासी माँ ने अपने बेटे के लंबे जवान लंड का इंतजाम कर दिवाली पर हनीमून मनाई! पढिए इस Antarvasna Sex Story में


कैसे हो दोस्तों, एक इंसान की ज़िंदगी में संयोग की हद किया हो सकती है ये आप इस कहानी को पढ़कर समझ जाएंगे। 


आज की कहानी दिवाली स्पेशल कहानी है, इसी कहानी की चलते मैने अपनी माँ के साथ हनीमून मनाया था। तो तैयार हो जाओ दिवाली में अपनी वासना की आग को भड़काने के लिए। चलिए अब कहानी शुरू करते हैं :


मेरा नाम सौरभ है और मेरे पापा का लंबा चौड़ा कपड़े का कारोबार है, वह अक्सर काम से बाहर ही रहते है।


मैं जब 18 साल का हुआ तो मेरी माँ मुझे और पापा को छोड़कर चली गई, इसमें मैं उनकी गलती नहीं समझता क्योंकि मेरे पापा जब भी घर आते तो माँ साथ मार पीट करते थे।


लेकिन माँ और में छुप छुप कर मिल लिया करते थे, एक बार की बात है दिवाली से 1 हफ्ता पहले पापा कोई औरत को घर ले आए मैं पापा को 6 महीने बाद देख रहा था।


जब पापा और वो औरत घर में घुसे तो बहुत ज़्यादा नशे में थे, पापा ने बताया वो मेरी नई माँ है और उनका नाम इशानी है।


मैने हैरानी से उसे देखा वो मुझसे कुछ ही साल बड़ी होगी तब मेरी उमर 28 थी, इशानी को देखकर मुझे माँ वाली फिलिंग बिल्कुल नहीं आई, आती भी क्यों! वो मेरे सामने एक ब्रा से बस थोड़े बड़े लाल टॉप और काली स्कर्ट में थी।


स्कर्ट भी बस गांड़ को अधूरा ढक पा रही थी, उनके बाल खुले हुए थे एक दम घने और लंबे बाल था माथे के बीच में काली बिंदी थी।


उनकी चूंची बहुत बड़ी थी शायद 42 का साइज़ होगा तब मोटा 36 का पेट उसपर 40 की कमर।


मैने पहले बहुत लड़कियों और भाभियों को चोदा था मगर ऐसा जिस्म पर कभी में नहीं गिरा था, उनको देखकर मेरा लन्ड खड़ा होने लगा उनका एकदम गोरा चेहरा था लगता था के वो कही बाहर की है।


उनका प्यार सा गोल मोल चेहरा था लेकिन उस समय पापा और उन मे से दारू की बहुत तेज़ आ रही थी। 


दोनों लगभग गिरने वाले थे तो मैने उन्हें संभाला फिर मुश्किल से बेडरूम तक ले गया, जब एक एक कर के मैने पापा और इशानी को बेड पर लिटाया तो पापा वही उसके ऊपर चढ़कर चोदने की कोशिश करने लगे।


मुझे ये सब देखकर मज़ा आने लगा, मैं जाकर दरवाज़े के पास छुप गया मेरे सामने पापा ने उस औरत को नंगा करा फिर अपना 6 इंच का मोटा लौड़ा लेकर उसकी चूत में उतर गए।


वो आ आह, उफ्फफ राकेश आगाह! आराम से बेबी।


ओह! हमममम, करते हुए तेज़ी से आहे ले रही थी।


मेरा लन्ड भी तनकर खड़ा हो गया था, मैने भी अपनी नई माँ के हिलते चूंचे देखकर मूठ मारनी शुरू कर दी।


मेरे पापा तेज़ी से उनको चोद रहे थे, दोनों के मुंह से आआह आआह! ओह राकेश ओह! हमममम इशानी ऑफ़ मस्त माल है तू।


ऐसे ही 10 मिनिट तक मस्त चुदाई चलती रही फिर हम तीनों साथ ही झड़ गए।


अगली सुबह मेरी आँख बहुत देर से खुली, इशानी किचेन में खाना नाश्ता बना रही थी। उसने मेरी माँ की साड़ी पहन रखी थी। ये Mom Son Hindi Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हो।


मैने उनसे पूछा पापा कहा गए?


तो वो बोली “वो बिज़नेस ट्रिप पर चले गए है बोले है दिवाली तक आ जाएंगे।” उन्होंने मुझसे मेरे बारे में पूंछा और मैने उनसे उनके बारे में पूंछा।


वो बोली “हम कुछ महीने पहले मिले है, मैं सरकारी टीचर हूं लेकिन शादी नहीं हुई थी, तुम्हारे पापा घर आए थे मेरे पापा से बिज़नेस की बात करने हमने एक दूसरे को देखा और बस शादी हो गई।”


मैने उनसे साफ कह दिया की मैं आपको माँ नहीं मान सकता, तो उन्होंने कोई आपत्ति नहीं जताई,


सिर्फ इतना बोली “दोस्त तो मान सकते हो!”


इतने में इशानी ने मेरे लिया नाश्ता बना दिया था, हम दोनों ने साथ में बैठकर खाया। खाते खाते वो उठी और अपने कमरे में जाकर मेरा अंडरवियर लाई जो रात मैने मूठ मारते समय उतार दिया था।


वो बोली “तुम्हारा कुछ रात कमरे में रह गया था।” मैं थोड़ा घबराया और इधर उधर देखने लगा।


लेकिन उन्होंने मेरे हाथ पर अपना हाथ रखा और बोली “कोई बात नहीं, मैं किसी को कुछ नहीं बोलूंगी हम दोस्त है ना।”


मुझे थोड़ा शांति मिली, उस दिन के बाद से मेरी इशानी से अच्छी बनने लगी थी।


इशानी के घर आने के 3 महीने बाद मेरे पापा ने उनको मारना पीटना शुरू कर दिया।


मुझे उनसे बहुत हमदर्दी होती, मेरी माँ भी कहती थी के वो भी एक औरत है उसका ख्याल रखना, मैं बच गई पता नहीं वो बचपाए की नहीं।


मैं अक्सर इशानी को रोते हुए देखा करता उसके पास जाकर उसका दर्द बाटा करता।


एक सुबह में जल्दी उठ गया जब नीचे पहुंचा तो देखा मेरे पापा इशानी को मार रहे थे क्योंकि उन्होंने उनके कपड़े प्रेस नहीं किए थे और रात पापा ने बताया था की उनको कुछ दिनों के लिए बाहर जाना है।


ये बात सुनकर मुझे बहुत खुशी हुई थी, उन्होंने कहा था कि इस दिवाली वो हमारे साथ नहीं रह पाएंगे।


पापा ने मुझे देखा और गुस्से में अपना सूटकैस लेकर घर से निकल गए।


इशानी सोफे के पास ज़मीन पर बैठी रो रही थी, में उसके पास गया रिश्ते में तो वो मेरी माँ ही थी तो मुझे दिल से बुरा महसूस हो रहा था।


मैं भी ज़मीन पर बैठा वो उस समय एक लाल नाइटी में थी जिसमें से लाल ब्रा की स्ट्रिप्स साफ दिख रही थी उनकी पीठ पर कुछ चोटों के निशान भी थे मुझे मेरे पापा से नफरत सी हो रही थी।


मैने उनके कंधे को पकड़ वो पलटी और आंसू भरी आँखों से मुझे देखने लगी।


मैने उनको अपने करीब लेकर बाहों में भर लिया हम माँ बेटे बैठे हुए एक दूसरे की बाहों में थे। ये xxx Antarvasana Desi Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे है।


वो सुबकते हुए रोने लगी मैं उनके नर्म बालों को सहलाने लगा, उनमें से बहुत प्यारी खुशबू आ रही थी, उनके चूंचे मस्त थे वो मेरे सीन में दब रहे थे।


मेरे दिमाग में न जाने क्या आया मैने अपने होठों से उनके कंधे को छू लिया, अपने होठों से ही मैं उनके खुले कंधों को सहलाने लगा।


इशानी अपनी बाहों में मुझे कसने लगी, उसकी गर्दन मचलने लगी मैने उनकी गर्दन को चूमना शुरू कर दिया।


उन्होंने अपना चेहरा घुमाकर दूसरी तरफ कर लिया फिर मैने दूसरी तरस से उनकी गर्दन चूमनी शुरू कर दी उनकी हमममम! मम्मम्! हमममम! जैसी सिसकारी निकलने लगी।


मेरा खुद पर से काबू खत्म होने लगा था मैने अपने एक हाथ में उनका गाल लिया और अपने होठों पर दबा कर गाल चूम लिया, उन्होंने मेरे हाथ को पकड़ और अपनी नशीली आँखों से मुझे देखने लगी।


मेरी नज़रे उनकी नज़रों से मिली उन्होंने अपनी आँखें बंद कर के खोली और धीरे धीरे हमारे होठ क़रीब आने लगे। कुछ पल गुज़रे फिर हमारे होठों ने एक दूसरे के होठों को चूमना शुरू कर दिया।


इशानी किस करने में माहिर थी, वो बहुत अच्छी तरह से मेरे होठों को पहले ज़बान से गिला करती फिर उन गिले होठों को चूसती ।


15 मिनिट तक लगातार हमने होठों से ही सुबह का जलपान करा और उस दिन से हमारा रिश्ता बहुत गहरा हो गया। इशानी और मैं अपने आपको एक दूसरे के हवाले कर चुके थे, फिर आया दिवाली का दिन।


मैं सुबह सुबह नहाने के लिए बाथरूम जाने वाला था कि तभी इशानी के कमरे से मुझे चीख की आवाज़ आई में जल्दी से भागता हुआ उनके कमरे में गया।


इशानी मुझे कमरे में कही नहीं दिखी फिर मुझे बाथरूम की तरफ से कुछ आवाज़ आई तो में देखने गया दरवाज़े पर लॉक नहीं था।


दरवाज़ा खुलते ही मेरे सामने इशानी का मस्त गोरा नंगा जिस्म था उनकी भारी भरकम मोटी गांड़ मेरे सामने थी, वो मेरी तरफ पलती और हैरानी से पूछने लगी “सौरभ क्या कर रहे हो तुम?”


मैने बोला “मुझे चीख सुनाई दी थी आपकी तो में देखने आया।”


उन्होंने बताया के बाथरूम में एक छिपकली उनके ऊपर गिर गई थी इसलिए वो चीखी।


मैं अभी भी वही खड़ा था उनके गुलाबी निप्पल मेरे सामने झूल रहे थे मुझे थोड़ी शर्म लगी पहली बार मैने ऐसे उनको देखा था।


मैने उसी समय बाहर जाना ठीक समझा तो उन्होंने मुझे रोक लिया और बोली।


तुम मुझे देखने आए थे, बिना देखे क्यों जा रहे हो।”


फिर उसके बाद मै भी अंदर चले गया।


मेरी इशानी माँ खुली तिजोरी की तरह मेरे सामने खड़ी थी, मुझे अंदर देखकर उन्होंने मुझे भी नंगा कर दिया।


अब हम दोनों नंगे खड़े थे हम दोनों प्यार से एक दूसरे की आँखों में देख रहे थे। मैं उनके करीब गया और उनको कमर से पकड़कर अपने गले लगा लिया, उनके जिस्म गर्मी मुझे उत्तेजित कर रही थी।


उन्होंने भी मुझे पकड़ा फिर मुझे अपनी बाहों में कस लिया, मैने उनके कंधे पर अपने होठ रख दिए।


उनके मुंह से एक मीठी सी सीसससह निकल गई, इशानी ने मेरी गर्दन को चूमा फिर मेरे कान में बोली “कुछ करो ना सौरभ मैं प्यासी हूं।”


मैने इशानी की गांड़ दबाई एक हाथ से उनके चेहरे को देखा और उनके होठों पर अपने होठ रख दिए।


वो सच में प्यासी थी, माँ मेरे होठों को भूखी शेरनी की तरह खा रही थी।


मैं उनके चूंचे मसल रहा था उनके मस्त मोटे चूंचे मेरे हाथों में ठीक से नहीं आ रहे थे, मैने फिर उनसे अपने होठ अलग करे और चूंचे पीने लगा।


उनके बड़े बड़े निप्पल मोटे बस कड़क हो रहे थे, मैं एक हाथ से बूब दबाता और एक निप्पल चूसता फिर दूसरे निप्पल को चूसता और दूसरे चूंचे को दबाता।


इशानी बस हमममम! उफ्फ सौरभ! आगाह पियो बेटा! उम्ममम आआह! ओह बच्चे !


कहते हुए मेरे बाल सहला रही थी मैं थोड़ा झुका फिर उनकी गांड़ को दबाते हुए इशानी को गोद में लेकर बहुत प्यार से ज़मीन पर बैठा दिया।


इशानी मेरे सर को अपनी खींचकर मुझे चूम रही थी।


मैं उनके पैरों की तरफ नीचे होकर बैठ गया इशानी की चूत ने मेरे लिए चूत साफ कर रखी थी फिर मैं उनकी गांड़ से जांघ तक चूमते हुए चूत की तरफ बढ़ने लगा।


इशानी मेरे बाल सहला रही थी, जब मैं उसकी चूत तक पहुंचा तो वो गीली हो गई थी।


मैने इशानी की चूत पर चूमा तो उसकी चूत में कप कपाहट दिखने लगी।


मैने अपनी ज़ुबान से इशानी की चूत चाटनी शुरू की उसकी चूत से बहता रस मेरे जोश को बढ़ा रहा था इशानी की ओऊहह्ह्ह सौरभ! अच्छा लग रहा है आगाह!


करते रहो अआआह! हमममम! 


सौरभ ओह!


की कामुक आवाज़ मुझे सुनाई दे रही थी, फिर मैने धीरे धीरे उसके पेट को चूमकर चूत में उंगली अंदर बाहर करी।


मैं उसके जिस्म को अच्छे से चख रहा था इशानी की आगाह! उफ्फ ओह सौरभ मुझसे रहा नहीं जारा कुछ करोना! की आहे मुझे अच्छी लग रही थी।


मुझे इशानी को तड़पाना अच्छा लग रहा था, मैं उसके ऊपर चढ़कर चूंचे पीने लगा।


उन गुलाबी निप्पल को चूसने में जो मज़ा आया उसे शब्दों में बताना मेरे बस में नहीं।


धीरे धीरे धीरे मैं उसके चूंचे चूमता हुआ उनके चेहरे के सामने लन्ड लटकाकर खड़ा हुआ


वो वासना की आग में जल रही थी मैने उसको लन्ड चूसने का इशारा करा तो उन्होंने लपककर लन्ड लिया।


उनपर चुदाई का भूत सर चढ़ चुका था, इशानी ने अपने नाज़ुक से होठों पर लन्ड लगाया फिर बहुत प्यार से चूसना शुरू करा।


इशानी की ज़बान मेरे लन्ड के छेद को तरसा रही थी, उन्होंने 5 मिनिट लन्ड चूसा कर मैं हट गया मेरा मन था कि उसक मुंह में पानी निकाल दूं।


लेकिन इतना समय नहीं था कि एक बार झड़ने के बाद में दुबारा गर्म होने का इंतज़ार कर पाता।


इशानी मचलने लगी थी मैं ज़मीन लेटा उतरा फिर उसकी टांगों के बीच आया।


मैने इशानी के घुटने मोडे फिर उसकी टांगे खोलकर खींची जिससे उसकी चूत मेरे लन्ड पर आकर लगी।


मैने एक हाथ में इशानी के चूंचे दबोचे उसकी दर्द से अआओह! की आवाज़ निकली फिर मैने लन्ड को चूत पर लगाकर एक धक्का लगाया।


इशानी को मैं उसी के बाथरूम में चोद रहा था, मैने लन्ड को अंदर बाहर करना शुरू करा उसकी चूत मस्त चिकनी थी। 


इशानी की ओह ! अआआह! मोहिल आआह!


चोद सौरभ ओह अआआह! ज़ोर से अआआह!


सौरभ yes आह! सौरभ आअआआअह!


की आवाज़ें मेरे कान में जितनी आती उतना मेरी रफ्तार बढ़ जाती । ये Step Mom Son ki Desi Xxx Sex Story आप Garamkahani.com पर पढ़ रहे हो।


चोद सौरभ ओह अआआह! ज़ोर से अआआह!


सौरभ yes आह! सौरभ आअआआअह!


ज़ोर से अआआह! बेटा आह


सौरभ yes आह! सौरभ आअआआअह!


करते करते उसने बताया उसका होने वाला है। अभी हमें चुदाई करते हुए 10 मिनिट हुए थे और मेरा काम पूरा नहीं हुआ था।


सौरभ yes आह! सौरभ आअआआअह!


ज़ोर से अआआह!


सौरभ yes आह! सौरभ आअआआअह!


साअअाआ! बोलती हुई इशानी की चूत ने रस छोड़ दिया।


मैने उसकी टांगे पकड़ कर घुमाई वो इठलाती नज़रों से बोलने लगी “नहीं प्लीज़ पीछे नहीं, अभी गांड़ मत मारो तेल लगाऊंगी फिर मार लेना जो करना है आगे करो।”


मगर मैने नहीं सुनी मैने उसको पलटा फिर उनकी गांड़ में लन्ड पेलना चालू कर दिया मेरा लन्ड चूत के रस से चिकना हो चुका था इसलिए आसानी से घुस गया।


उसकी गांड़ का छेद टाइट था तो उन्हें बहुत दर्द हुआ वो मछली जैसे तड़प ने लगी मेरा उसपर रेहम करने का मन नहीं था।


मैने अपना लन्ड पूरी ताकत से उसकी गांड़ में पेलना शुरू करा वो घोड़ी बनी हुई आगाह! मुओह! मत करो आगाह!


ओह बेटा दर्द हो रहा है आअआआअह! आह! सौरभ नहीं आगाह! यूपयूफ! अआआह!


करीब बीस मिनट उसकी गांड़ मारते मारते में भी झड़ने को आ गाया वो बोली “अंदर मत निकालो प्लीज़।”


लेकिन मैने नहीं सुना मैने अपने लन्ड के रस से इशानी की गांड़ भर दी फिर थक कर उसी के ऊपर गिर गया।


मैं हाफ रहा था इशानी मेरे नीचे अध मरी लेटी थी, मैने उनकी नंगी पीठ को चूमा फिर उसे खड़ा कर के नहाने में मदद करी।


सुबह सुबह हम साथ में नहाए नाश्ता भी बाहर से ऑर्डर करा मैं जैसे ही नहाकर निकला तो दरवाज़े की घंटी मैने पेंट और बनियान पहनी और नाश्ता लेने दरवाज़े के पास दौड़ा।


दरवाज़ा खोला तो वहां पापा खड़े थे, मेरा मुंह खुला रह गया आँखें फटी रह गई।


वो बोले “ओहो! आज लाड साहब जल्दी उठ गए। चलो अच्छा है मेरा काम जल्दी पूरा हो गया तो मैने सोचा जल्दी आ जाऊं।”


वो अंदर आ गए, पीछे से इशानी भी नहाकर निकली उसे देखकर पापा ने गले लगा लिया उसके होठों को ज़बरदस्त तरीके से चूसा जिसे देखकर मुझे अच्छा नहीं लगा फिर वो दोनों अंदर कमरे में चले गए।


मेरा सारा मूड खराब हो गया, साथ ही मेरे सर में दर्द सा होने लगा ऐसे ही मुझे अपने कमरे में लेटे लेटे रात हो गई न बाहर जाने का मन था न ही कुछ करने का।


अचानक नीचे से इशानी ने मुझे आवाज़ दी मैं दौड़ता हुआ गया वो मस्त माल लग रही थी साड़ी पहने हुए माहौल गरमा रही थी।


वो मुझे बोली “बेटा मुझे मेरी मोम के घर जाना है प्लीज़ मेरे साथ चलो, तुम्हारे पापा की मीटिंग है ऑनलाइन तो वो नहीं आ सकते।” 


उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए मुझे मुस्कुराते हुए आँख मारी। मैं समझ गया और जल्दी से तैयार हो के गाड़ी निकाली।


हम बाहर निकले तो इशानी बोली “आज रात में तुम्हारी दुल्हन हूं चलो बताओ कहा जाएंगे हम हनीमून मनाने?”


मैं खुश हो गया उनको अपने पास खींच कर होठों को ज़ोर से चूमा। हमारे शहर से मनाली थोड़ी ही दूरी पर था मैने गाड़ी उसी रास्ते पर लेली, उधर एक शानदार होटल लिया।


प्रिय पाठकों इसके आगे की कहानी अगले भाग में आएगी ज्यादा लंबी होने के कारण मुझे दो भाग में बाटनी पड़ रही है।


दूसरे भाग में आपको इंसानी जीवन में संयोग की हद का एक नया पड़ाव देखने को मिलेगा तो बने रहे मेरे साथ और मेल करे hashmilion5@gmail.com पर मुझे और बताए कैसी लगी यहां आपको ये कहानी।


कहानी का दूसरा भाग :  दिवाली की रात में माँ चोद के हनीमून मनाया 02


Share This Story :  


यह कहानी आपको कैसी लगी?

❤️ Love 0
😍 Wow 0
😂 Funny 0
😢 Sad 0
😡 Angry 0
👏 Clap 0

💬 Leave a Comment :-

📝 Comments :

No comments yet. Be the first to comment!